यहां ढूंढने से भी नहीं मिलेगी कोई विधवा
उनके पति तो मरते ही हैं. लेकिन फिर वे जाती कहां हैं?
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फोटो - thelallantop
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ये वो जगह है जहां ढूंढे से भी कोई विधवा नहीं मिलेगी. फिर वे जाती कहां हैं? वे दोबारा सुहागिनों में तब्दील हो जाती हैं.
मध्य प्रदेश के मंडला जिले में गोंड जनजाति के लोग रहते हैं. यहां कोई विधवा नही है. ऐसा नही है कि यहां किसी की मौत नहीं होती. लेकिन कोई औरत अपने पति की मौत के बाद बहुत समय तक विधवा नहीं रहती. पति के श्राद्ध से पहले ही उस औरत की फिर से शादी करवा दी जाती है. वो भी घर के ही किसी बैचलर से. भले ही वह उसका देवर हो या पोता हो.
शादी के वक़्त औरत को चांदी की चूड़ियां पहनाई जाती हैं. इन चूड़ियों को 'पतो' कहते हैं. जिस भी रिश्तेदार से उनकी शादी करवाई जाती है उसी के नाम के 'पतो' उसे पहनाए जाते हैं. विधवा का नया पति उसका देवर, भांजा, भतीजा या नाती-पोता भी हो सकता है. बात अजीब है लेकिन इसके पीछे गांव वालों की मंशा ये है कि विधवाओं को बुरे हालात का सामना न करना पड़े.'टाइम्स ऑफ इंडिया' ने यह खबर दी है. इस गांव की सुंदरो बाई कुरवाती की शादी को दो साल ही हुए थे. अचानक उनके पति की मौत हो गयी. घर में एक छोटा देवर संपत था. सुंदरो का ब्याह उससे करवाए जाने की बात होने लगी. संपत अड़ गया. उसको नहीं करनी थी भाभी से शादी. गांव के सारे बड़े बुजुर्गों ने संपत के मरहूम भाई के श्राद्ध में खाना खाने से मना कर दिया. आखिर में संपत मान गया. 'देवर पतो' के तहत उनका ब्याह करवा दिया गया. आज उनकी शादी को 30 साल हो गए हैं. संपत कहते हैं कि वो बहुत खुश हैं कि उन्होंने सुंदरो से शादी के लिए हां कर दी थी. एक किस्सा और दिलचस्प है. चमरी बाई के पति की मौत के बाद उनकी शादी उनके नाती से करवा दी गई थी. 'नाती पतो के चलते छोटे से पतिराम पर बचपन से अपनी नानी की ज़िम्मेदारी आ गई. लेकिन नियम यह भी है कि जब नाती या पोता बड़ा हो जाए तो वो अपनी पसंद की लड़की से शादी कर सकता है. पतिराम ने भी दूसरी शादी कर ली. कुछ सालों पहले नानी, चमरी बाई की मौत हो गयी. पतिराम अब अपनी दूसरी बीवी के साथ रहता है.
अगर फिर भी कोई लड़की अड़ ही जाए कि नहीं करनी है शादी. या कोई भी लड़का तैयार न हो शादी के लिए. तो उसके लिए भी इंतजाम है. तब 'पंच पतो' एक्टिवेट किया जाता है. ऐसी स्थिति में गांव की कोई भी औरत उस विधवा औरत को चांदी की चूड़ियां दे सकती है. उस दिन के बाद से वो विधवा उस औरत के घर में शादीशुदा के रूप में रहती है. पति कोई नही होता. बस नाम मात्र के लिए वो ब्याहता हो जाती है.गांव के लोग इन नए विवाहित जोड़ों की खूब मौज भी लेते हैं. जैसे अगर 'नाती पतो' में ब्याहा नाती या पोता अपनी नानी के साथ खेलता हुआ दिख जाता है तो लोग उसको खूब छेड़ते हैं. ये सब बिलकुल हंसी खुशी होता है. गोंड जनजाति वाले लोग इस प्रथा का और फिर से ब्याही विधवाओं का बहुत सम्मान करते हैं.

