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वाह! इस डीएम ने अपने कमरे के एसी निकलवाकर बच्चों के वॉर्ड में लगवा दिए

सोशल मीडिया पर लोग खूब वाहवाही कर रहे हैं.

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उमरिया के डीएम स्वरोचिष सोमवंशी.
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अजय
7 जून 2019 (अपडेटेड: 7 जून 2019, 03:30 PM IST)
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लोग जब सरकारी नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाते हैं तो अक्सर कहते हैं कि वो समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं. जो लिया है उसे वापस करना चाहते हैं. कर पाते है या नहीं ये तो नहीं पता लेकिन कुछ ऐसे लोग ज़रूर हैं जो बिना कहे भी ऐसा करते रहते हैं. तमाम परेशानियों और दबाव के बाद जो जितना कर सकते हैं, करने की कोशिश ज़रूर करते हैं. ऐसा ही एक काम किया है मध्यप्रदेश के एक डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर ने. इनका नाम है स्वरोचिष सोमवंशी. फिलहाल मध्यप्रदेश के उमरिया में पोस्टेड हैं. गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ रखे हैं. रोजमर्रा के कामों के लिए लोग जिला कार्यालय पहुंचते हैं. ऐसे में उन्हें काफी परेशान होना पड़ता है. लाइन में लगते हैं. अब कलेक्टर साहब को लगा कि लोगों को गर्मी में क्यों रहने दिया जाए. जब उनके पास एसी की सुविधा है तो लोग गर्मी में क्यों मरें? पहले उन्होंने प्रशासन से एसी का प्रबंध करने को कहा. लेकिन जब वक़्त लगता दिखा तो उनसे रहा नहीं गया. अपने कमरे और मीटिंग हॉल का एसी निकालकर पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में लगवा दिया. यहां पर शारीरिक रूप से कमजोर और पोषण की कमी से जूझ रहे नवजात बच्चों का इलाज किया जाता है. यहां भर्ती महिलाओं और बच्चों को इस फैसले से काफी राहत मिलने वाली है.
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जब स्वरोचिष से पूछा गया कि ये फैसला क्या सोचकर लिया तो उन्होंने कहा-
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अक्सर अफसरशाही की हनक के किस्से सामने आया करते हैं. आम लोगों पर रौब जमाने के. खुद को इलीट क्लास साबित करने की कोशिश करने के. लोगों से अलग. कुछ खास. ऐसे में ऐसी ख़बरें सुकून देती हैं. नौकरशाही अपने आराम छोड़कर वो करना चाहती हैं जो उन्हें वाकई करना चाहिए. एक कदम आगे जाकर लोगों की मदद. अभी कुछ दिन पहले ऐसा ही कुछ काम जालौन के डीएम मन्नान अख्तर ने भी किया था. इस अधिकारी ने यूपी में सूखे का वो इलाज किया जो करोड़ों का पैकेज भी नहीं पाए. बुंदेलखंड में सूखे की समस्या से निबटने के लिए मन्नान अख्तर ने ज़िले के ज्यादातर चेक डैम मनरेगा के ज़रिए रिपेयर करवा लिए. इसके लिए सरकार की ओर से सम्मानित भी किया गया. देश को आगे ले जाने में स्वरोचिष जैसे और अधिकारियों की ज़रूरत है.
वीडियो:जालौन के डीएम डॉ. मन्नान अख्तर की कहानी, जिन्हें बुंदेलखंड में अपने काम के लिए अवॉर्ड मिला है

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