IL&FS के संकट का बड़ा असर दिखना शुरू हो गया है. कंपनी में मदर डेयरी के 190 करोड़रुपए फंस गए हैं. ये रकम मदर डेयरी से जुड़े किसानों की है. अब मदर डेयरी किसानोंका बकाया नहीं दे पा रही है. इसको लेकर कंपनी ने प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखीहै. चौंकाने वाला बात ये है कि मदर डेयरी ने ये निवेश IL&FS में तब किया, जब IL&FSअपना लोन चुकाने में चूक रही थी. मदर डेयरी ने पूरे मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी से दखल देने की गुजारिश की है.कब और कैसे किया गया निवेश? मदर डेयरी चलाने वाली कंपनी MDFVL यानी मदर डेयरी फ्रूटएंड वेजिटेबल प्राइवेट लिमिटेड ने IL&FS में 20 से 28 अगस्त, 2018 के बीच ये निवेशकिया. MDFVL नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की सब्सिडियरी कंपनी है. इंडियन एक्सप्रेसके मुताबिक मदर डेयरी चलाने वाली कंपनी ने छह बार में 190.84 करोड़ रुपए IL&FS मेंलगाए. ये निवेश ठीक उस वक्त हुआ, जब IL&FS के कर्ज भुगतान में चूक गई थी. और IL&FSअपने असेट्स बेचकर पैसा जुटा रही थी, जिससे वो कर्ज का भुगतान कर सके. जून, 2018में ही IL&FS की सब्सिडियरी कंपनी ITNL यानी IL&FS ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क्सलिमिटेड कर्ज भुगतान में चूक गई थी.दूध उत्पादों के मामले में बड़ा नाम है मदर डेयरी.प्रधानमंत्री को चिट्ठी कब लिखी गई? इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मदर डेयरी चलानेवाली कंपनी MDFVL के सीईओ संजीव खन्ना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फरवरी, 2019में एक चिट्ठी लिखी है. इसमें उन्होंने लिखा कि मदर डेयरी संकट में है. किसानों कापैसा भुगतान करने में दिक्कत हो रही है.संजीव खन्ना ने लिखा, 'किसान अपने गुजारे के लिए मदर डेयरी पर आश्रित हैं. IL&FS कोकिसानों के निवेश को लौटाना चाहिए. ये पैसा छोटी अवधि के लिए निवेश किया गया था.IL&FS की ओर से पैसे का भुगतान न होने से मदर डेयरी के पास किसानों से आने वालीकृषि उत्पादों की सप्लाई चेन टूट रही है. कृपा करके इस मामले में दखल दीजिए औरहमारी मदद कीजिए. जिससे किसानों के हित में IL&FS से बकाया मिल सके.' IL&FS की ओरसे मदर डेयरी के निवेश 5 और 8 सितंबर, 2018 को वापस मिलना था. मगर IL&FS ये भुगताननहीं कर पाया. उलटे IL&FS की गुजारिश पर निवेश को एक महीने के लिए रिन्यू कर दिया.एक महीने बाद कंपनी ने फिर भुगतान हासिल करने का प्रयास किया. मगर उसे पैसा नहींमिला.क्या है IL&FS का संकट? IL&FS यानी इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियलसर्विसेज करीब 90,000 करोड़ रुपए नहीं चुका पा रही है. IL&FS एक सरकारी क्षेत्र कीकंपनी है. इसकी करीब 40 सहायक कंपनियां हैं. इसे नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी कीश्रेणी में रखा जाता है. इस कंपनी में दूसरी कंपनियां भी निवेश किए हैं. ये बैंकोंसे लोन भी लेती है. लोन के लिए संपत्ति गिरवी नहीं रखती है. बॉन्ड यानी एक सादेकागज पर गारंटी दी जाती है कि लोन चुका देंगे. चूंकि इसके पीछे भारत सरकार है,इसलिए इसकी गारंटी पर निवेशकों को भरोसा होता है. कंपनी में प्रोविडेंड फंड औरपेंशन फंड का पैसा भी लगा है. मतलब ये कि आम लोगों की मेहनत की कमाई का पैसा. इसमेंम्यूचुअल फंड कंपनियां भी निवेश करती हैं. बॉन्ड या कागज पर लिखे वचननामे पर बैंकोंने IL&FS और उसकी सहायक कंपनियों को लोन दिए हैं. पर ये कंपनी अब पैसा नहीं लौटा पारही है.मदर डेयरी के अलावा और किन फंड्स का पैसा लगा है IL&FS में? IL&FS में लोगों कीजीवनभर की कमाई लगी है. मौजूदा कानून बैंक और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के पक्ष मेंहैं. ये सुरक्षित कर्जदाता की श्रेणी में आते हैं. आम लोगों से जुड़े जिन फंडों केपैसे फंसे हैं, उनमें इंडियन ऑयल ईपीएफ, इन्फोसिस ईपीएफ, ईआईएल ईपीएफ, एचयूएलयूनियन प्रोविडेंट फंड, टाइटन पीएफ, आईडीबीआई ट्रस्टशिप, यूटीआई रिटायरमेंट फंड,पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस और आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस फंड जैसे फंड शामिल हैं.--------------------------------------------------------------------------------वीडियो- नेता नगरी: आडवाणी की चिट्ठी पर आए मोदी के बयान के अलावा देखिए दिनभर कीसभी बड़ी सियासी खबरें