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नाशिक में अस्पताल के बाहर टैंक से ऑक्सीजन लीक, 22 मरीज़ मर गए

कुछ मरीज़ों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया.

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ऑक्सीजन लीक की वजह से नासिक के ज़ाकिर हुसैन अस्पताल में आधे घंटे तक ऑक्सीजन की सप्लाई ठप रही. फोटो- वीडियो स्क्रीनग्रैब
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कुसुम
21 अप्रैल 2021 (अपडेटेड: 21 अप्रैल 2021, 11:07 AM IST)
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महाराष्ट्र का नाशिक. यहां ज़ाकिर हुसैन अस्पताल के बाहर 21 अप्रैल को ऑक्सीजन टैंकरों को भरा जा रहा था. इसी दौरान एक टैंक से गैस लीक होने लगी और पूरे इलाके में फैल गई. गैस लीक की वजह से अस्पताल में करीब आधे घंटे तक ऑक्सीजन सप्लाई ठप रही. ऑक्सीजन सप्लाई रुकने की वजह से अस्पताल में भर्ती 22 मरीज़ों की मौत हो गई. नाशिक के कलेक्टर सूरज मंढरे ने इस बात की पुष्टि की है. इंडिया टुडे से जुड़े प्रवीण ठाकरे के मुताबिक, घटना की जानकारी मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई थी. फिलहाल लीक को रोकने की कोशिशें की जा रही हैं. उन्होंने बताया कि ज़ाकिर हुसैन अस्पताल में कुल 171 मरीज़ भर्ती थे. ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने के बाद गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों को आनन-फानन में दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया. Oxygen Leak के जो वीडियो सामने आए हैं उनमें दिख रहा है कि सफेद घना कुहरा जैसा तेज़ी से चारों तरफ फैल रहा है. कर्मचारी ऑक्सीजन मास्क लगाकर टैंकर के पास जाते दिख रहे हैं ताकि लीक को रोका जा सके. ANI के मुताबिक, FDA मंत्री डॉक्टर राजेंद्र शिंगणे ने कहा कि सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं. और इस बात की डिटेल्ड रिपोर्ट मांगी गई है कि गैस लीक कैसे हुई. उन्होंने कहा कि जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होगी. मुख्यमंत्री ने की पांच लाख की मदद की घोषणा महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री उद्धव ठाकरे ने घटना पर शोक व्यक्त किया है. उन्होंने लिखा,
"इस वक्त जब कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में संकट है. कहीं ऑक्सीजन नहीं, दवाई नहीं, बेड्स नहीं हैं. इनके अभाव में मरीज़ों की मौत लगातार हो रही है. ऐसे में नाशिक की महानगरपालिका के अस्पताल में ऑक्सीजन रिसाव की घटना बेहद आहत करने वाली और दिल दहलाने वाली है. 22 मरीज़ों की जान चली गई. इस दुख को ज़ाहिर करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं. इस दुर्घटना के जवाबदारों को छोड़ा नहीं जाएगा. मैंने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं. साथ ही सभी मृतकों को परिजनों को पांच लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी."
देश में ऑक्सीजन की भारी किल्लत है Covid-19 की दूसरी लहर से पूरा देश इस वक्त जूझ रहा है. अलग-अलग शहरों के अस्पतालों से ऑक्सीजन की कमी की खबरें आ रही हैं. ऑक्सीजन के लिए तमाम हेल्पलाइन नंबर्स भी दिए गए हैं. फिर भी कोविड के कई मरीज़ों को न ऑक्सीजन मिल पा रहा है और न ही अस्पतालों में बिस्तर. राजधानी दिल्ली के ही अस्पतालों की बात करें तो  आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां के सर गंगाराम अस्पताल के पास जितना ऑक्सीजन है वो केवल 24 घंटे तक चल सकता है, LNJP अस्पताल को 10 टन ऑक्सीजन मिला है जो अभी के लिए पर्याप्त है. वहीं संजय गांधी अस्पताल के पास केवल आठ घंटा चलने लायक ऑक्सीजन है. हाल ही में हमारे साथी वरुण ने एक रिपोर्ट लिखी थी. उसके मुताबिक, भारत की ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता 6400 मीट्रिक टन है. जबकि, आमतौर पर मेडिकल ऑक्सीजन की मांग 2,000 मीट्रिक टन के करीब होती है. हालांकि, कोविड 19 की वजह से मेडिकल ऑक्सीजन की मांग तेज़ी से बढ़ी है. सरकार क्या कदम उठा रही है? अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई बढ़ाने के लिए उद्योगों को ऑक्सीजन देने पर रोक लगा दी है. केंद्र सरकार ने 18 अप्रैल को आदेश जारी किया कि अब केवल नौ जरूरी इंडस्ट्रीज़ को ही ऑक्सीजन दी जाएगी. इसके साथ ही सेल, रिलायंस, टाटा स्टील, जिंदल स्टील ने कोविड के इलाज के लिए अस्पतालों में ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू कर दी है. इसके अलावा IFFCO ऑक्सीजन के प्लांट्स लगा रही है, जहां से अस्पतालों में मुफ्त में ऑक्सीजन सप्लाई की जाएगी.

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