PM Cares से 200 करोड़ खर्च होने के बाद भी नहीं लगे ऑक्सीजन प्लांट, लेकिन राजनीति पूरी हो रही है
यूपी जैसे बड़े राज्य में केवल 1 प्लांट ही लगा.
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देश भर में इस वक्त ऑक्सीजन की भारी किल्लत है. फोटो- PTI
दिल्ली में ऑक्सीजन की किल्लत अब जगजाहिर है. तकरीबन हर अस्पताल से ऑक्सीजन की कमी की खबरें सामने आ रही हैं. काफी लोग ऑक्सीजन की इस कमी के कारण अपनी जान गवां चुके हैं. 23 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई वर्चुअल मीटिंग में भी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे को उठाया था. वहीं बीजेपी नेताओं के मुताबिक साल 2020 में 8 ऑक्सीजन प्लांट के लिए केंद्र ने दिल्ली को पैसे दिए थे लेकिन केवल 1 प्लांट ही तैयार हो पाया है. अब दिल्ली हाईकोर्ट ने भी ऑक्सीजन की कमी को लेकर दिल्ली सरकार को फटकार लगाई है.
दिल्ली में भारी मांग
दिल्ली में अभी तक कोरोना के कुल 9,80,679 केस सामने आ चुके हैं और इस वायरस के कारण 13,541 लोग अपनी जान गवां चुके हैं. इस वक्त दिल्ली में करीब 91,618 एक्टिव केस हैं और इनमें से काफी लोग ऐसे हैं जिनको अस्पतालों में बेड्स और ऑक्सीजन की जरूरत है. लेकिन हर अस्पताल से ऑक्सीजन की कमी की बातें सामने आ रही हैं. इस मुद्दे पर बीजेपी और आम आदमी पार्टी आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं.
ऑक्सीजन की पॉलिटिक्स
23 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्रियों की बैठक हुई. इस बैठक में अरविंद केजरीवाल भी शामिल हुए. उन्होंने इस मीटिंग को LIVE भी कर दिया जिस पर प्रधानमंत्री ने उन्हें टोका भी. अरविंद केजरीवाल ने इस मीटिंग में ऑक्सीजन की कमी का मुद्दा उठाया और कहा कि सरकार को देश के ऑक्सीजन प्लांट सेना के हवाले कर देने चाहिए ताकि सभी राज्यों को तुरंत ऑक्सीजन मिल पाए. उन्होंने कहा कि दिल्ली को हवाई मार्ग और रेल मार्ग के जरिए भी ऑक्सीजन मिलनी चाहिए. अगर दिल्ली में ऑक्सीजन के संकट को दूर नहीं किया गया, तो त्रासदी हो सकती है.
इस मीटिंग के अगले दिन यानी 24 अप्रैल को बीजेपी नेताओं ने केजरीवाल और दिल्ली सरकार को ऑक्सीजन के मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया. बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट किया, https://twitter.com/amitmalviya/status/1385828125116751874
असम के बीजेपी नेता हेमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट किया और कहा कि https://twitter.com/himantabiswa/status/1385891353842708480
हेमंत बिस्वा के इस आरोप पर आम आदमी पार्टी आसाम की ओर से भी ट्वीट किया गया. https://twitter.com/AAP4Assam/status/1385928286925037571 दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा है? दिल्ली हाईकोर्ट ने 24 अप्रैल को नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर कोई भी सरकारी अधिकारी चाहे वो केंद्र का हो, राज्य का हो या फिर स्थानीय प्रशासन का हो, अगर उसने ऑक्सीजन सप्लाई में बाधा डालने की कोशिश की, तो उसे फांसी पर चढ़ा दिया जाएगा. महाराजा अग्रसेन अस्पताल की याचिका पर सुनवाई के दौरान, जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पाल्ली की बेंच ने ये बात कही.
दिल्ली सरकार ने कोर्ट से कहा कि उसे केंद्र सरकार की ओर से रोजाना केवल 380 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ही मिल रही है और कुछ दिनों से तो केवल 300 मीट्रिक टन ही मिल पा रही है. इस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि "आपने 21 तारीख को कहा था कि दिल्ली को रोजाना 480 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मिलेगी. आप बताएं कि ऐसा कब से होगा?"
ऑक्सीजन की मांग अचानक काफी बढ़ गई है और इसलिए किल्लत होने लगी है. फोटो- PTI
ये है पूरे देश का हाल आपको बता दें कि पीएम केयर्स फंड के तहत 202 करोड़ की लागत से देश भर में 162 PSA (Pressure Swing Adsoprtion यानी ऑक्सीजन बनाने वाला प्लांट) लगाए जाने थे. राज्य सरकारों को केवल इंस्टॉलेशन का पैसा देना था. यहां से अस्पताल तक के लिए पाइपलाइन बनाने का खर्चा अस्पताल को खुद उठाना था. साल की शुरुआत में कोविड काफी कम हो चुका था, ऐसे में काम में लापरवाही बरती गई और अभी तक केवल 33 प्लांट ही इंस्टॉल हो पाए हैं.
इनमें से
-5 मध्य प्रदेश में
-4 हिमाचल प्रदेश में
-3-3 प्लांट चंडीगढ़, गुजरात और उत्तराखंड में
-2-2 बिहार, कर्नाटक और तमिलनाडु में
-और 1-1 आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, पुडुचेरी, पंजाब और यूपी में लगाया गया है. यूपी जैसे बड़े राज्य में भी केवल 1 प्लांट लग पाया है.
इंडिया टुडे के मुताबिक अप्रैल के आखिर तक 59 प्लांट इंस्टॉल होने थे जबकि मई के अंत तक 89 प्लांट इंस्टॉल हो जाने थे. अप्रैल बीतने वाला है और अभी तक केवल 33 प्लांट ही इंस्टॉल हो पाए हैं. इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने 201.58 करोड़ का फंड दिया है. इसमें 7 साल की मेंटीनेंस की कीमत भी शामिल है.
इस मीटिंग के अगले दिन यानी 24 अप्रैल को बीजेपी नेताओं ने केजरीवाल और दिल्ली सरकार को ऑक्सीजन के मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया. बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट किया, https://twitter.com/amitmalviya/status/1385828125116751874
असम के बीजेपी नेता हेमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट किया और कहा कि https://twitter.com/himantabiswa/status/1385891353842708480
हेमंत बिस्वा के इस आरोप पर आम आदमी पार्टी आसाम की ओर से भी ट्वीट किया गया. https://twitter.com/AAP4Assam/status/1385928286925037571 दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा है? दिल्ली हाईकोर्ट ने 24 अप्रैल को नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर कोई भी सरकारी अधिकारी चाहे वो केंद्र का हो, राज्य का हो या फिर स्थानीय प्रशासन का हो, अगर उसने ऑक्सीजन सप्लाई में बाधा डालने की कोशिश की, तो उसे फांसी पर चढ़ा दिया जाएगा. महाराजा अग्रसेन अस्पताल की याचिका पर सुनवाई के दौरान, जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पाल्ली की बेंच ने ये बात कही.
दिल्ली सरकार ने कोर्ट से कहा कि उसे केंद्र सरकार की ओर से रोजाना केवल 380 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ही मिल रही है और कुछ दिनों से तो केवल 300 मीट्रिक टन ही मिल पा रही है. इस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि "आपने 21 तारीख को कहा था कि दिल्ली को रोजाना 480 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मिलेगी. आप बताएं कि ऐसा कब से होगा?"
ऑक्सीजन की मांग अचानक काफी बढ़ गई है और इसलिए किल्लत होने लगी है. फोटो- PTI
ये है पूरे देश का हाल आपको बता दें कि पीएम केयर्स फंड के तहत 202 करोड़ की लागत से देश भर में 162 PSA (Pressure Swing Adsoprtion यानी ऑक्सीजन बनाने वाला प्लांट) लगाए जाने थे. राज्य सरकारों को केवल इंस्टॉलेशन का पैसा देना था. यहां से अस्पताल तक के लिए पाइपलाइन बनाने का खर्चा अस्पताल को खुद उठाना था. साल की शुरुआत में कोविड काफी कम हो चुका था, ऐसे में काम में लापरवाही बरती गई और अभी तक केवल 33 प्लांट ही इंस्टॉल हो पाए हैं.
इनमें से
-5 मध्य प्रदेश में
-4 हिमाचल प्रदेश में
-3-3 प्लांट चंडीगढ़, गुजरात और उत्तराखंड में
-2-2 बिहार, कर्नाटक और तमिलनाडु में
-और 1-1 आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, पुडुचेरी, पंजाब और यूपी में लगाया गया है. यूपी जैसे बड़े राज्य में भी केवल 1 प्लांट लग पाया है.
इंडिया टुडे के मुताबिक अप्रैल के आखिर तक 59 प्लांट इंस्टॉल होने थे जबकि मई के अंत तक 89 प्लांट इंस्टॉल हो जाने थे. अप्रैल बीतने वाला है और अभी तक केवल 33 प्लांट ही इंस्टॉल हो पाए हैं. इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने 201.58 करोड़ का फंड दिया है. इसमें 7 साल की मेंटीनेंस की कीमत भी शामिल है.

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