खामेनेई के बेटे मोजतबा को ईरान का सुप्रीम लीडर चुन लिया? ऐलान क्यों नहीं कर रहे
अयातुल्ला अली खामेनेई के दूसरे बेटे मोजतबा 56 साल के हैं. उनकी पैदाईश 1969 में ईरान के शहर मशहद में हुई थी. मोजतबा उस दौर में बड़े हुए जब उनके वालिद अली खामेनेई शाह की सत्ता के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय थे.

ईरान की सियासत में इन दिनों एक बड़ा सवाल घूम रहा है. अगला सुप्रीम लीडर कौन होगा? इसी बीच खबर है कि ईरान की ‘मजलिस-ए-खोबरेगान’ यानी ‘Assembly of Experts’ ने 3 मार्च को एक बैठक में नया सुप्रीम लीडर चुन लिया है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, खामेनेई के बेटे मोजतबा को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई है. हालांकि, इसका आधिकारिक ऐलान अभी तक नहीं किया गया है.
इससे पहले Assembly of Experts से जुड़े तीन ईरानी अधिकारियों ने बताया था कि मोजतबा खामेनेई ईरान के सुप्रीम लीडर की रेस में सबसे आगे हैं. मजलिस-ए-खोबरेगान यानी Assembly of Experts 88 मौलवियों का एक ग्रुप है, जिनका काम ईरान के सुप्रीम लीडर को चुनना, उन पर नज़र रखना और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें पद से हटाना है. अब सवाल है कि अगर मोजतबा सुप्रीम लीडर चुन लिए गए हैं तो अब तक उनके नाम का ऐलान क्यों नहीं हुआ? इस पर कुछ नेताओं का मानना है कि अगर अभी उनका नाम घोषित कर दिया गया तो हो सकता है कि जंग के बीच अमेरिका या इजरायल उन्हें भी निशाना बनाए.
कौन हैं मोजतबा खामेनेई?अयातुल्ला अली खामेनेई के दूसरे बेटे मोजतबा 56 साल के हैं. उनकी पैदाईश 1969 में ईरान के शहर मशहद में हुई थी. मोजतबा उस दौर में बड़े हुए जब उनके वालिद अली खामेनेई शाह की सत्ता के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय थे. बाद में 1979 की इस्लामिक क्रांति हुई और ईरान की राजनीति पूरी तरह बदल गई. पहले अयातुल्ला खुमेनी और बाद में मोजतबा के पिता खामेनेई ईरान के सुप्रीम लीडर बने. अगर दावेदारी पर मुहर लग जाती है तो मुजतबा अपने पिता की जगह लेते हुए ईरान के तीसरे सुप्रीम लीडर बन सकते हैं.
दिलचस्प बात ये है कि ईरान के कई बड़े धार्मिक नेताओं के उलट मोजतबा को बहुत ऊंचे दर्जे का धार्मिक विद्वान नहीं माना जाता है. उन्होंने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा और न ही सरकार में कोई आधिकारिक पद संभाला है लेकिन इसके बावजूद माना जाता है कि पर्दे के पीछे उनका काफी असर रहा है. खासतौर पर ईरान की सैन्य संस्था ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) से उनके करीबी रिश्ते बताए जाते हैं.
मोजतबा खामेनेई ईरान-इराक युद्ध के दौरान जंग लड़ चुके हैं. बाद में वे अपने पिता के दफ्तर के कुछ कामकाज संभालने लगे. 2019 में अमेरिका ने उन पर प्रतिबंध भी लगाए थे. अमेरिका का आरोप था कि वे बिना किसी आधिकारिक पद के भी सुप्रीम लीडर की तरफ से काम कर रहे थे लेकिन मोजतबा खामेनेई के रास्ते में सबसे बड़ी मुश्किल उनकी अपनी ही पहचान भी बन सकती है. पहचान वही. अली खामेनेई का बेटा होना. कहा जाता है कि खुद अली खामेनेई पिता से बेटे को सत्ता मिलने की व्यवस्था के खिलाफ रहे हैं.
ईरान में इस तरह की विरासत वाली सत्ता को अच्छा नहीं माना जाता. इसकी वजह 1979 की इस्लामी क्रांति है, जब शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी की राजशाही को खत्म किया गया था. इसलिए अगर सत्ता सीधे बेटे को मिलती है तो कई लोग इसे उसी तरह की “परिवार वाली हुकूमत” मान सकते हैं, जिसके खिलाफ ईरान में क्रांति हुई थी. मोजतबा खुद भी शासन में वंशवाद के खिलाफ रहे हैं.
अमेरिका की जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के ईरान मामलों के जानकार अली नसर ने The New York Times से कहा कि अगर मोजतबा इस पद पर आते हैं तो ये संकेत होगा कि अब सत्ता में ईरान की व्यवस्था का ज्यादा सख्त, रिवोल्यूशनरी गार्ड वाला पक्ष मजबूत हो रहा है. कुछ का मानना है कि इस वक़्त में पिता की नीतियों को आगे बढ़ाने वाला चेहरा ही स्थिरता दे पाएगा लेकिन आलोचक इसे ऐसी राजनीति मान सकते हैं जिसमें सत्ता एक ही परिवार के भीतर सिमटती जा रही है.
ऐसे में सुप्रीम लीडर के तौर पर मोजतबा खामेनेई के अलावा और कई नाम हैं, जो ‘मोजतबा नहीं तो कौन’ का जवाब हो सकते हैं.
एक नाम है अलीरेज़ा अराफ़ी का.
67 साल के अलीरेज़ा अराफ़ी ईरान की धार्मिक व्यवस्था में काफी प्रभावशाली माने जाते हैं, लेकिन राजनीति में उनकी पकड़ उतनी मजबूत नहीं मानी जाती. वे असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के उपाध्यक्ष हैं. खबरें हैं कि वह फिलहाल कार्यकारी सुप्रीम लीडर के तौर पर काम भी कर रहे हैं.
मोहम्मद मेहदी मीरबाघेरी
मोहम्मद मेज़दी मीरबाघेरी को ईरान की व्यवस्था के बेहद सख्त विचार वाले धार्मिक नेता के तौर पर जाना जाता है. वे असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्य हैं और पश्चिमी देशों की नीतियों के आलोचक माने जाते हैं. फिलहाल वे क़ोम शहर में स्थित इस्लामिक साइंसेज अकादमी का नेतृत्व कर रहे हैं.
ग़ुलाम हुसैन मोहसेनी-एजेई
मोहसेनी-एजेई ईरान के आला दर्जे के धार्मिक नेता माने जाते हैं और फिलहाल देश की न्यायपालिका के प्रमुख हैं. उन्हें जुलाई 2021 में अली खामेनेई ने इस पद पर नियुक्त किया था. उन्हें ईरान की सत्ता के रूढ़िवादी धड़े के बड़े समर्थक के तौर पर देखा जाता है.
आखिर में हसन खोमेनी
54 साल के हसन खोमेनी भी इस चर्चा में आने वाले प्रमुख नामों में हैं. वे अयातुल्ला रूहोल्लाह खोमेनी के पोते हैं, जो ईरान की इस्लामिक क्रांति के नेता और इस्लामिक गणराज्य के संस्थापक थे. हसन खोमेनी अपने दादा के तेहरान में मौजूद मकबरे के मुहाफिज़ भी हैं. उन्होंने कभी कोई सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन उन्हें उदार और सुधारवादी सोच वाला धार्मिक नेता माना जाता है. 2016 में उन्होंने असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स का चुनाव लड़ने की कोशिश की थी, लेकिन जांच करने वाली परिषद ने उन्हें नाकाबिल करार दिया था.
सुप्रीम लीडर चुने कैसे जाते हैं?
अब आपको बताते हैं कि ईरान में सुप्रीम लीडर कैसे चुना जाता है? यहां सुप्रीम लीडर को चुनने की जिम्मेदारी असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के पास होती है. ये 88 सदस्यों वाली संस्था है, जिनका चुनाव जनता करती है. इस्लामिक गणराज्य ईरान के इतिहास में ये सिर्फ दूसरी बार होगा जब ये संस्था नया सुप्रीम लीडर चुनेगी. यानी फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि ईरान की सत्ता की दौड़ में मोजतबा खामेनेई का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है.
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