देश का सबसे लंबा रेल पुल, जिसे देश के 3 प्रधानमंत्रियों की कोशिशों ने बनवाया
क्या ख़ास है इस पुल में, जिसकी बात आज हर कोई कर रहा है.
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फोटो - thelallantop
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तू किसी रेल सी गुज़रती है, मैं किसी पुल सा थरथराता हूं. पॉपुलर कल्चर में ये लाइन्स फ़िल्म मसान ने दीं लेकिन इन्हें बहुत वक़्त पहले दुष्यंत कुमार ने लिखा था. एक ऐसा ही पुल देश में शुरू होने को है जिसपर से रेल गुज़रेगी और साथ ही जिसपर गाड़ियां भी चलेंगीं. आज आसान भाषा में इसी पुल के बार में बात होगी जो कि बना है असम में और जिसे नाम दिया गया है बोगीबील पुल.

ऐसा दिखता है बोगीबील पुल

ब्रह्मपुत्र नदी पर बना है ये पुल

असम-अरुणाचल के बीच यात्रा में घंटों की बचत होगी
इसके साथ ही ये पुल सेना के काम भी आएगा. भारत के पूर्वोत्तर सीमा तक सेना को पहुंचने में इस पुल से काफ़ी मदद मिलेगी और अरुणाचल में किबिथू, वलॉन्ग और चगलगाम चौकियों तक सेना पहले की अपेक्षा जल्दी और आसानी से पहुंच जाएगी.

पूर्वोत्तर सीमा तक सेना को पहुंचने में मदद मिलेगी

120 सालों तक पुल के टिकने की गारंटी है
इस पूरे दौरान जिस प्रकार की वेल्डिंग का इस्तेमाल किया गया वो भारत में पहली बार हुआ. इंजीनियरिंग की फ़ील्ड में वेल्डिंग के लिए अलग अलग रूल बुक्स हैं और ये जगहों और प्रोफेशन के हिसाब से बदलती रहती हैं. मसलन अमेरिकन सोसायटी ऑफ़ मेकेनिकल इंजिनियर्स वेल्डिंग के लिए अलग नियमों का इस्तेमाल करते हैं और अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टिट्यूट अलग नियमों को फॉलो करते हैं. ऐसे में इस पुल को बनाते वक़्त यूरोपियन वेल्डिंग स्टैंडर्ड्स को फॉलो किया गया है जो कि पहली बार हुआ है.

पहली बार यूरोपियन वेल्डिंग स्टैंडर्ड्स फॉलो किया गया
इसके अलावा इस पुल को बनाते वक़्त कंक्रीट को जगह तक पहुंचाना बहुत बड़ा मसला था. इसके लिए पाइप लाइंस का इस्तेमाल किया गया. इस पुल के ऊपर 3 लेन की सड़क और नीचे 2 रेलवे ट्रैक बनाए गए हैं. चूंकि यहां बारिश बहुत होती है, इसीलिए इस पुल की सड़कों में रबड़ की भी मिलावट की गई है. इसके रेलवे ट्रैक पर आमने सामने से आती दो ट्रेनें 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार दौड़ सकती हैं. अमूमन पुल पर जब ट्रेन गुज़रती है तो स्पीड काफ़ी कम कर दी जाती है. लेकिन ओस पुल पर ऐसा नहीं होगा. 42 खंभों पर टिका हुआ ये पुल 8.0 की तीव्रता से आए भूकंप को भी झेल सकता है.

आमने सामने से आती दो ट्रेनें 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार दौड़ सकती हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुल का उद्घाटन किया
इस पुल के नाम का अभी तक औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है, चूंकि ये पुल असम के बोगीबील के पास बना है इसीलिए इसे सभी बोगीबील पुल कह रहे हैं.
Bogibeel Bridge

ऐसा दिखता है बोगीबील पुल
- इस पुल की पूरी कहानी क्या है?

ब्रह्मपुत्र नदी पर बना है ये पुल
- इस पुल के फायदे क्या-क्या हैं?

असम-अरुणाचल के बीच यात्रा में घंटों की बचत होगी
इसके साथ ही ये पुल सेना के काम भी आएगा. भारत के पूर्वोत्तर सीमा तक सेना को पहुंचने में इस पुल से काफ़ी मदद मिलेगी और अरुणाचल में किबिथू, वलॉन्ग और चगलगाम चौकियों तक सेना पहले की अपेक्षा जल्दी और आसानी से पहुंच जाएगी.

पूर्वोत्तर सीमा तक सेना को पहुंचने में मदद मिलेगी
- क्या ख़ास है इस पुल में?

120 सालों तक पुल के टिकने की गारंटी है
इस पूरे दौरान जिस प्रकार की वेल्डिंग का इस्तेमाल किया गया वो भारत में पहली बार हुआ. इंजीनियरिंग की फ़ील्ड में वेल्डिंग के लिए अलग अलग रूल बुक्स हैं और ये जगहों और प्रोफेशन के हिसाब से बदलती रहती हैं. मसलन अमेरिकन सोसायटी ऑफ़ मेकेनिकल इंजिनियर्स वेल्डिंग के लिए अलग नियमों का इस्तेमाल करते हैं और अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टिट्यूट अलग नियमों को फॉलो करते हैं. ऐसे में इस पुल को बनाते वक़्त यूरोपियन वेल्डिंग स्टैंडर्ड्स को फॉलो किया गया है जो कि पहली बार हुआ है.

पहली बार यूरोपियन वेल्डिंग स्टैंडर्ड्स फॉलो किया गया
इसके अलावा इस पुल को बनाते वक़्त कंक्रीट को जगह तक पहुंचाना बहुत बड़ा मसला था. इसके लिए पाइप लाइंस का इस्तेमाल किया गया. इस पुल के ऊपर 3 लेन की सड़क और नीचे 2 रेलवे ट्रैक बनाए गए हैं. चूंकि यहां बारिश बहुत होती है, इसीलिए इस पुल की सड़कों में रबड़ की भी मिलावट की गई है. इसके रेलवे ट्रैक पर आमने सामने से आती दो ट्रेनें 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार दौड़ सकती हैं. अमूमन पुल पर जब ट्रेन गुज़रती है तो स्पीड काफ़ी कम कर दी जाती है. लेकिन ओस पुल पर ऐसा नहीं होगा. 42 खंभों पर टिका हुआ ये पुल 8.0 की तीव्रता से आए भूकंप को भी झेल सकता है.

आमने सामने से आती दो ट्रेनें 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार दौड़ सकती हैं
- इस पुल का राजनीतिक ऐंगल क्या है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुल का उद्घाटन किया
इस पुल के नाम का अभी तक औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है, चूंकि ये पुल असम के बोगीबील के पास बना है इसीलिए इसे सभी बोगीबील पुल कह रहे हैं.
Bogibeel Bridge

