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ख़जाना खाली, एक बार फिर RBI के दरवाज़े पर पहुंची मोदी सरकार!

सरकार आरबीआई से 45 हजार करोड़ की मदद मांग सकती है.

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11 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 11 जनवरी 2020, 09:34 AM IST)
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सरकारी खजाना खाली है. मदद के लिए सरकार एक बार फिर आरबीआई की ओर देख रही है.
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देश की अर्थव्यवस्था ठीक नहीं है. आर्थिक विकास दर 11 साल के न्यूनतम स्तर 5 फीसदी पर पहुंचने का अनुमान लगाया गया है. सरकार का रेवेन्यू तेजी से घट रहा है. इस बीच खबर आ रही है कि मोदी सरकार एक बार फिर आरबीआई का दरवाजा खटखटाने जा रही है. केंद्र सरकार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से 45 हजार करोड़ की मदद मांग सकती है. न्‍यूज एजेंसी रॉयटर्स के हवाले से खबर आई है. अभी अगस्त की ही तो बात है, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई ने सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपए दिए थे. इनमें से चालू वित्त वर्ष के लिए 1.48 लाख करोड़ रुपये थे. इस वित्त वर्ष में अब तक 1,23,414 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं, जो अब तक एक साल में किए गए ट्रांसफर में सबसे ज्यादा है. इसके अलावा रिजर्व बैंक ने 52,637 करोड़ रुपये अलग से ट्रांसफर किए थे. इसे लेकर विवाद भी हुआ था. फिर से पैसे की जरूरत क्यों पड़ रही है? रॉयटर्स को एक अधिकारी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष काफी मुश्किल है. इस साल आर्थिक सुस्ती के चलते विकास दर 11 साल के सबसे निचले स्तर पर रह सकती है. ऐसे में आरबीआई से मिली वित्तीय मदद से सरकार को राहत मिल सकती है. सूत्र ने कहा कि सरकार को 35 से 45 हजार करोड़ रुपये तक के मदद की जरूरत है. क्यों आया ये संकट? वित्त वर्ष 2019-20 के लिए सरकार ने रेवेन्यू का लक्ष्य 19.6 लाख करोड़ रुपये रखा है. लेकिन मंदी की वजह से उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं हो रही है. कॉरपोरेट टैक्स रेट में कटौती के कारण हर साल खजाने पर 1.5 लाख करोड़ का बोझ बढ़ा है. इसके अलावा जीएसटी से भी हर महीने उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं हो पा रही है. पहली बार जब सरकार ने आरबीआई से पैसा मांगा तो उसने देने से इंकार कर दिया. फिर सरकार ने बिमल जालान की अध्यक्षता में कमिटी बना दी. कमिटी ने बताया कि आरबीआई सरकार को कितना पैसा दे सकता है. हालांकि सरकार को बिमल जालान कमिटी से ये उम्मीद थी कि सरकार को ज्यादा पैसे मिलेंगे. पहले 3.96 लाख करोड़ की मांग की गई थी. लेकिन आरबीआई ने लाल झंडी दिखा दी थी. इसके बाद 1.76 करोड़ लाख देने पर सहमति बनी थी. आरबीआई के पास कितना पैसा है? रिज़र्व बैंक के पास 4 तरह के खाते होते हैं. RBI के 2017-18 के आंकड़ों के मुताबिक उसके पास करीब 9 लाख 60 हजार करोड़ रुपए का रिज़र्व है. ये चार खाते हैं : करेंसी एंड गोल्ड रिजर्वः RBI के पास करीब 6.95 लाख करोड़ रुपए का मुद्रा और गोल्ड स्टॉक है. मतलब इतने रुपए के मूल्य का सोना और नोट-सिक्के आरबीआई के पास हैं. एसेट डेवलपमेंट फंडः इस खाते में आरबीआई के पास 22,811 करोड़ रुपए हैं. निवेश खाताः इस अकाउंट में 13,285 करोड़ रुपए हैं. कंटिंजेंसी फंडः इस खाते को आकस्मिक निधि अकाउंट बोला जाता है. ये सबसे अहम अकाउंट है. रिज़र्व बैंक अपने कामकाज से जो लाभ कमाता है. उसका एक हिस्सा कंटिंजेंसी फंड में आता है. RBI की कमाई का दूसरा हिस्सा सरकार को लाभांश यानी डिविडेंड के रूप में दिया जाता है. करेंसी एंड गोल्ड रिजर्व के बाद इसी खाते में सबसे ज्यादा पैसा है. RBI की आमदनी कैसे होती है? 1.रिजर्व बैंक खुले बाजार से सरकारी बॉन्ड खरीदता है. इनके बदले उसे एक तय ब्याज मिलता है. और ये ब्याज RBI की आमदनी होता है. 2.सरकार और बैंक रिज़र्व बैंक से उधार लेते हैं. इसकी फीस और ब्याज से भी रिज़र्व बैंक की कमाई होती है. 3.रिज़र्व बैंक विदेशी करेंसी अपने पास रखता है. उस करेंसी को लोकल करेंसी से एक्सचेंज भी करता है. इसके बदले RBI को कमीशन मिलता है.
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