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मोदी सरकार ने 3 सालों में जितना पैसा बूचड़खानों को दिया है, वो करोड़ों में है

क्यों बूचड़खाने चलाने के लिए करोड़ों रुपये दे दिए गए. जबकि देश में बीफ को लेकर भावनाएं भड़क रही हैं.

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3 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 3 जुलाई 2017, 08:00 AM IST)
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बीफ को लेकर हंगामा है. बीफ के शक में भीड़ हत्याएं कर दे रही है. मौजूदा केंद्र सरकार यानी मोदी सरकार के राजनीतिक एजेंडे में है. बीफ को लेकर सख्त है. यूपी में योगी सरकार ने 'अवैध बूचड़खानों' पर कार्रवाई की तो प्रदेश में मीट की ही किल्लत हो गई. लेकिन गौ हत्या और बूचड़खाने के खिलाफ रहने वाली केंद्र सरकार ने ही पिछले 3 सालों में एक दो करोड़ नहीं, बल्कि 67 करोड़ रुपये से बूचड़खानों की मदद की है. RTI के जरिए इस बात की जानकारी मिली है कि मोदी सरकार ने बूचड़खानों को चलाने के लिए 67 करोड़ रुपये का अनुदान दिया है. ये जानकारी मिनिस्ट्री ऑफ़ फ़ूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज (खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय) की तरफ से दी गई है. beef 1 RTI में पूछा गया था कि साल 2014 से 17 तक बूचड़खानों को कितनी सब्सिडी दी गई. हर साल की रकम बताई जाए. पशुओं को काटने के लिए मशीनें खरीदने को किस साल और कितनी रकम दी गई. किस-किस राज्य को दी गई? इन सवालों का जवाब देते हुए मंत्रालय ने बताया कि साल 2014-15 में 10 करोड़,  2015-16 में 27 करोड़ और 2016-17 में 30 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई. beef 4 राज्यों को दी गई सब्सिडी में पहले दो साल सबसे ज्यादा रकम आंध्र प्रदेश को दी गई है. beef 5 beef 3 ऐसे में ये सवाल उठे तो कोई हैरानी नहीं कि जब मोदी सरकार बीफ को लेकर इतनी गंभीर है तो क्यों बूचड़खानों को मदद दी जा रही है? एक तरफ बूचड़खानों को मदद, तो दूसरी तरफ बीफ बैन का शोर.

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