PM मोदी को तोहफा कुबूल है, पर रक्खे कहां?
इंडिया से चोरी हुई मूर्तियां इंडिया लाई जा रही हैं. पर सिक्योरिटी के लफड़े की वजह से मूर्तियों को रखने की दिक्कत शुरू हो गई है.
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फोटो - thelallantop
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प्यार बहुत है. दिल में जगह भी बहुत है. लेकिन दिल वाली ये जगह उस प्यार को समेट नहीं पा रही है, जो साड्डे पीएम नरेंद्र मोदी विदेशों से बटोर कर ला रहे हैं. यूं कि बात यूं है कि विदेशों से इंडिया को जो बेशकीमती आर्ट पीस, मूर्तियां मिल रही हैं, उन्हें रखने की जगह नहीं मिल रही है.वजह है सिक्योरिटी. अब चूंकि विद क्योंकि, ये मूर्तियां इतनी महंगी और ऐतिहासिक हैं तो इनको कहीं भी नहीं रखा जा सकता. इस काम से जुड़े कई बड़े अधिकारी इसको लेकर मीटिंग कर चुके हैं. आर्ट पीस को रखने की जगह छोड़िए, अधिकारियों के पास इस बात का जवाब नहीं है कि टोटल आर्ट पीस कित्ते हैं, ये मुल्क में कैसे लाए जाएं.
मोदी ले आए इंडिया के 670 करोड़ रुपये
जिन आर्टपीस को रखने की जगह नहीं मिल रही है, अब उनकी बात बताते हैं. ये आर्टपीस इंडिया के ही थे. स्मगल करके दूसरे देशों में बेचे जा चुके थे. लेकिन जब PM मोदी या सरकार के लोग जब किसी दूसरे देश जाते हैं तो ये आर्टपीस बीते कुछ सालों से लौटाए जा रहे हैं.
इस साल जून में अमेरिका से लौटते वक्त प्रधानमंत्री मोदी को भी इंडिया की 200 से ज्यादा चोरी हुई कल्चरल कलाकृतियां लौटाई गई थीं. ये आर्टपीस 2 हजार सालों से ज्यादा पुराने थे. बाजार में इन पीसेस की कीमत 670 करोड़ रुपये से ज्यादा की है.कल्चरल मिनिस्ट्री सूत्रों ने मेल टुडे को बताया, 'अब दिक्कत ये है कि इन चोरी हुई एंटिक पीस को हम इंडिया ले भी आते हैं तो इन्हें रखेंगे कहां? हम इनको कहीं भी नहीं रख सकते हैं. क्योंकि कुछ पीस ऐसे हैं, जिनसे तगड़ी धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. दूसरी दिक्कत ये है कि अगर हमें इन्हें मंदिर में लगा देते हैं तो इनकी सुरक्षा का जिम्मा कौन संभालेगा. अगर ये एंटिक पीस जहां से चुराए गए थे. वहीं लगाए गए तो ये दोबारा चोरी हो सकते हैं. इससे बचने के लिए हमें सीसीटीवी कैमरा जैसे सिक्योरिटी के इंतजाम करने होंगे.' बता दें कि लंबे समय से इंडिया के कुछ मास्टर पीस दूसरे देशों में स्मगल किए गए हैं. सरकार इन एंटिक पीस को लाने की कोशिशें कर रही हैं. 2007 में अमेरिका वालों ने एक ऑपरेशन हिजन आइडल चलाया था. इस ऑपरेशन में भगवान गणेश और बाहुबली की ब्रॉन्ज मूर्तियां मिली थीं. बीते महीने इन कल्चरल पीस को इंडिया लाने की प्रोसेस शुरू हो गई है.

