बजट पेश होने में अभी कुछ वक्त है. जब वो आएगा, तब अचानक लोग फीसदी, कोटे और अनुपातकी भाषा में बात करने लगेंगे. लेकिन वो बाद की बात है. 10 जनवरी को केंद्र सरकार नेकुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं और FDI कीवर्ड बन गया. FDI माने फॉरेन डायरेक्टइंवेस्टमेंट. बाहर से कोई कंपनी हिंदुस्तान में आकर पैसा लगाए, काम करने लगे, उसकेलिए अंग्रेज़ा तद्भव. अब सरकार हर काम नीति बनाकर करती है. सो FDI के लिए भी एकनीति है. इसी में कुछ बदलाव किए गए हैं. हम बारी-बारी से आपको समझाएंगे कि ये बदलावक्या हैं -1. एयर इंडिया में 49% FDIएयर इंडिया लंबे समय से घाटे में है और सरकार के लिए उसे पालना महंगा साबित हो रहाहै. कहा जाता रहा है कि इंडियन एयर को निजी हाथों में दे दिया जाए तभी उसके दिनबहुर सकते हैं. इसीलिए इस बदलाव ने ही सबसे ज़्यादा दिलचस्पी पैदा की.एयर इंडिया - सरकार का सफेद हाथी, जिसका नाम महाराजा है. (फोटोः रॉयटर्स)अब तक कानून ये था कि कोई विदेशी एयरलाइन भारत सरकार से इजाज़त लेकर किसी भारतीयएयरलाइन में 49% तक निवेश कर सकती थी. लेकिन एयर इंडिया में निवेश की अनुमति नहींथी. अब इस शर्त को खत्म कर दिया गया है. अब एयर इंडिया में भी 49% तक निवेश कीअनुमति दे दी गई है. लेकिन सरकार ने साफ किया है कि एयर इंडिया का नियंत्रण फिलहालनिजी हाथों में देने का उसका इरादा नहीं हैं.2. सिंगल-ब्रांड रिटेल में 100% FDIसिंगल-ब्रांड रिटेल माने एक ऐसा स्टोर जिसमें एक ही कंपनी के उत्पाद मिलते हैं.यानी एप्पल, आइकिया वगैरह. इसमें पहले 49% तक का विदेशी निवेश हो जा सकता था. इससेज़्यादा के लिए सरकार से अनुमति लेनी पड़ती थी. अब ये अनुमति वाली शर्त खत्म कर दीगई है. अब विदेशी कंपनियां सीधे निवेश कर पाएंगी.एप्पल स्टोर. जहां किडनी बेचकर पैसे जुटाने वाले लोग फोन खरीदने जाते हैं. (फोटोःरॉयटर्स)पहले ये नियम था कि इन कंपनियों को हर साल अपना 30 फीसदी माल हिंदुस्तान से हीखरीदना होता था. अब ये शर्त खत्म हो गई है. अब हिंदुस्तान आने वाली कंपनियों को बसइतना करना है कि हर साल पहले से ज़्यादा माल हिंदुस्तान से खरीद कर विदेशों मेंअपने स्टोर भेजना है. स्टोर खोलने के पांच साल बाद से इन पर पुराना नियम लागू होगाऔर इन्हें अपना 30 फीसदी माल हिंदुस्तान से खरीदना होगा.3. रियल एस्टेट ब्रोकिंग में 100% FDIसरकार ने ये साफ कर दिया है कि रियल एस्टेट और रियल एस्टेट ब्रोकिंग अलग-अलग हैं.इस कंफ्यूज़न के चलते बाहर से आने वाली ब्रोकिंग फर्म भारत में काम करने सेहिचकिचाती थीं. अब रियल एस्टेट ब्रोकिंग में 100 फीसदी FDI लाया जा सकेगा.रीयल एस्टेट. अमरीका के राष्ट्रपति बनने के तरीकों में से एक. (फोटोः रॉयटर्स)4. 'मेडिकल डिवाइस' वाला कंफ्यूज़न दूर हुआFDI एक्ट में फार्मा सेक्टर में निवेश से जुड़े नियम भी हैं. अब FDI एक्ट केमुताबिक मेडिकल डिवाइस की परिभाषा ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के हिसाब से बदलतीरहती है. इससे भी कंफ्यूज़न पैदा होता था. अब FDI के संदर्भ में मेडिकल डिवाइस कीपरिभाषा वही रहेगी, जो FDI एक्ट में लिखी है. उम्मीद की जा रही है कम कंफ्यूज़नवाले माहौल में ज़्यादा कंपनियां भारत में मेडिकल डिवाइस बनाना शुरू करेंगी.पेसमेकर. जब प्यार से दिल न धड़के तो इसे लगाते हैं. (फोटोः रॉयटर्स)5. पावर सेक्टर को ज़्यादा पावरजैसे स्टॉक एक्सचेंज होता है शेयर के लेन-देन के लिए, वैसे ही बिजली के लेन-देन केलिए पावर एक्सचेंज होते हैं. अब इनके दो प्रकार होते हैं - प्राइमरी और सेकेंडरी.अब तक विदेशी कंपनियां सिर्फ सेकेंडरी एक्सचेंज में 49% निवेश कर सकती थीं. अब सेवो प्राइमरी एक्सचेंज में भी निवेश कर पाएंगे.बिजली का खंबा. (फोटोः रॉयटर्स)--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ेंःभारत का महाराजा 52 हजार करोड़ रुपये के कर्जे में, नरेंद्र मोदी इनको उबारने काफैसला ले रहे हैंक्या फायदे हैं मोदी जी के 100% FDI के?जिन कारीगरों ने मोदी और शी जिनपिंग के बैठने के लिए झूला तैयार किया था उनके साथबहुत बुरा हुआजीडीपी घट गई, इसका कुल तियां-पांचा यहां जान लोनोटबंदी के समय सरकार ने क्या दावे किए थे और उनका क्या हश्र हुआ क्या तांत्रिक ने एयर इंडिया के शाही प्लेन को समंदर में डुबो दिया था!