MLA अदिति सिंह की बहन की शादी हुई, खाली लोग दूल्हे की जाति याद दिलाने आ गए
उन्हें 'राजपूत के नाम पर कलंक' तक पुकारा गया.
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कुछ तथाकथित राजनीतिक विशेषज्ञ इस शादी में वोट बैंक पॉलिटिक्स भी ले आए (तस्वीर अदिति सिंह की फेसबुक से ली गई है)
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आदिति सिंह. भाजपा विधायक हैं, जो पहले कांग्रेस में थीं. दल बदलने की वजह से हाल में ख़ूब सुर्खियों में रहीं. उससे पहले सुर्खियों में थीं कांग्रेस में रहते हुए अपने बागी बयानों की वजह से. अभी सुर्खियों में तो नहीं हैं, लेकिन कुछ कुंठित लोगों के निशाने पर हैं.
क्या है मामला?
28 नवंबर को अदिति सिंह की छोटी बहन देवांशी सिंह की शादी हुई. विराज सागर दास से. जो उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबू बनारसी दास के पोते हैं और पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश दास गुप्ता के बेटे हैं. तो लोग नाराज़ क्यों हैं? नाराज़ हैं क्योंकि विराज दूसरी जाति के हैं. तो मामला इंटर-कास्ट मैरेज का है, जो अभी भी कुछ लोगों के लिए घोटना बहुत मुश्किल है. आदिति सिंह ने अपनी बहन की शादी की तस्वीरें फेसबुक पर पोस्ट कीं. कैप्शन में लिखा,"आप सभी के आशिर्वाद से कल मेरी छोटी बहन देवांशी सिंह पुत्री स्व. अखिलेश सिंह जी का शुभ विवाह विराज सागर दास सुपौत्र स्व. बाबू बनारसी दास गुप्ता जी (पूर्व मुख्यमंत्री उ.प्र.), सुपुत्र स्व. अखिलेश दास गुप्ता (पूर्व केंद्रीय मंत्री) के साथ वैदिक रीति - रिवाजों के साथ सम्पन्न हुआ. आप सभी का स्नेह व आशिर्वाद नवदम्पति को मिलता रहे यही मेरी प्रभु श्रीराम जी से कामना है."बस ख़बर मिली और फेसबुक पर लोगों का जातिवाद जाग गया. कुछ लोग तो फेसबुक पर चिंता ज़ाहिर करने लगे. कह रहे थे - "क्या उत्तर प्रदेश में अच्छा क्षत्रिय वर ढूंढना मुश्किल हो गया था? जो ऐसा करना पड़ा?"





आदिति ने क्या कहा?
हमने इस पूरे मसले पर आदिति सिंह से उनका पक्ष जानने की कोशिश की. आदिति ने हमसे बात करके बताया कि यह उनका निजी मसला है और वह इसे पॉलिटिसाइज़ नहीं करना चाहतीं. उन्होंने कहा,"मैं पब्लिक फिगर हूं और मुझे इस तरह की टिप्पणियों की आदत है. यह मेरा निजी मसला है और मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती."

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