अमीर-गरीब के बीच खाई पर रिपोर्ट पेश करने वाले संगठन के खिलाफ CBI जांच के आदेश
ऑक्सफैम इंडिया पर FCRA उल्लंघन के लिए कार्रवाई का आदेश आया है. बीते दिनों हर्ष मंदर के संगठन के खिलाफ भी CBI जांच का आदेश आया था.

2 साल पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ऑक्सफैम इंडिया (Oxfam India) के फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) लाइसेंस के रिन्यूअल को रद्द कर दिया था. 6 अप्रैल को गृह मंत्रालय ने FCRA कानून के उल्लंघन के आरोप में ऑक्सफैम इंडिया के खिलाफ CBI जांच के आदेश दिए हैं. गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, ऑक्सफैम इंडिया को सामाजिक गतिविधियों के लिए FCRA, 2010 के तहत रजिस्टर किया गया था. और उनका रजिस्ट्रेशन 31 दिसंबर, 2021 तक ही वैध था. इस दौरान, गृह मंत्रालय ने कथित तौर पर ऑक्सफैम इंडिया में कई बड़े उल्लंघन पाए, जिसके बाद ये मामला कानूनी कार्रवाई के लिए CBI को भेज दिया गया है. मामले पर ऑक्सफैम का बयान भी सामने आया है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने पाया है कि ऑक्सफैम इंडिया ने FCRA एक्ट 2020 लागू होने के बाद भी पैसों को विदेशी खातों में अलग-अलग संस्थाओं के जरिए ट्रांसफर करना जारी रखा. FCRA एक्ट 2020 इस तरह के ट्रांसफर पर रोक लगाता है. ये अमेंडमेंट 29 सितंबर, 2020 को लागू हुआ और ऑक्सफैम इंडिया ने FCRA, 2010 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए अन्य NGO को फंड ट्रांसफर किया.
ऑक्सफैम इंडिया की तरफ से जारी बयान में कहा गया,
IT सर्वे में क्या खुलासा हुआ?पिछले साल, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ऑक्सफैम इंडिया में एक सर्वे किया था. ये सर्वे सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) ने किया था. आईटी सर्वे के दौरान कई ऐसे ईमेल मिले जिनसे यह पता चला है कि ऑक्सफैम इंडिया FCRA, 2010 के प्रावधानों के खिलाफ जाकर अन्य FCRA रजिस्टर्ड कंपनीज़ को फंड भेजे. CBDT के आईटी सर्वे ने ये भी बताया कि विदेशी संगठन/संस्थाएं ऑक्सफैम इंडिया को कई सालों से पैसे भेज रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, ऑक्सफैम इंडिया ने 1.50 करोड़ रुपये FC अकाउंट में लिए जबकि इस पैसे को उस बैंक अकांउट के जरिए आना चाहिए जो FCRA में रजिस्टर्ड है. ऑक्सफैम इंडिया ने कमीशन के रूप में अपने सहयोगियों/कर्मचारियों के माध्यम से सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR) को भी फंड भेजा. ऑक्सफैम इंडिया के TDS डेटा से भी पता चला कि धारा 194J के तहत साल 2019-20 में 12,71,188 रुपये CPR को भेजे गए.
पहले से क्या चल रहा था?गृह मंत्रालय के माध्यम से केंद्र सरकार ने 22 दिसंबर, 2021 को FCRA लाइसेंस रिन्यूअल वाले ऑक्सफैम इंडिया के आवेदन को खारिज कर दिया था. इसके खिलाफ ऑक्सफैम इंडिया ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की. हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि ऑक्सफैम इंडिया के संशोधित आवेदन पर विचार करे. माने ऑक्सफैम ने फॉर्म फिर से भरा, और केंद्र से कहा गया कि आप इसपर फैसला लीजिए.
इसके बाद केंद्र ने 1 दिसंबर, 2022 को ऑक्सफैम के नए वाले (संशोधित) आवेदन को भी खारिज कर दिया. माने FCRA रजिस्ट्रेशन रिन्यू नहीं हुआ. तो ऑक्सफैम एक बार फिर दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा. 13 फरवरी 2023 को, दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑक्सफैम इंडिया की याचिका पर केंद्र सरकार का पक्ष मांगा था.
ऑक्सफैम है क्या बला?ऑक्सफैम का नाम आया है Oxford Committee for Famine Relief से. द्वितीय विश्वयुद्ध का दौर था. अप्रैल 1941 में ग्रीस पर एक्सिस पावर्स - माने नात्ज़ी जर्मनी और इटली का कब्ज़ा हो गया. ये ग्रीस को लूटने लगे. ग्रीस में जमी जर्मन सेना का मनोबल तोड़ने के लिए मित्र देशों ने ग्रीस का हुक्का पानी बंद कर दिया. और रसद की सप्लाई पर रोक लग गई. नतीजा - ग्रीस में भयंकर अकाल पड़ गया. 1941 से 1944 तक चले इस अकाल ने तकरीबन 3 लाख लोगों की जान ले ली.
ग्रीस में जो हो रहा था, पूरी दुनिया को पता था. लेकिन नात्ज़ियों के खतरे के आगे अकाल में मर रहे लोगों की सुध कौन लेता. इसी पागलपन के बीच ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड शहर में कुछ समाजसेवी और शिक्षाविद मिले और ऑक्सफैम की स्थापना की. ताकी ब्रिटेन की सरकार पर दबाव डालकर ग्रीस तक अनाज की सप्लाई दोबारा शुरू कराई जा सके. तभी से OXFAM दुनिया भर में आपदा राहत और गरीबी उन्मूलन का काम कर रहा है. दुनियाभर के अलग अलग देशों में डेढ़ दर्जन से ज़्यादा ''OXFAM'' बने हुए हैं. मसलन ऑक्सफैम अमेरिका, ऑक्सफैम ऑस्ट्रेलिया आदि. भारत वाले संगठन का नाम है ऑक्सफैम इंडिया.
जनवरी 2023 में ऑक्सफैम इंडिया ने स्वित्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम की वार्षिक बैठक में Survival of the Richest: The India Supplement नाम से एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें भारत में आर्थिक विषमता पर आंकड़े पेश किए गए थे. रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में 1 फीसदी अमीर लोगों के पास भारत की 40 फीसदी से ज़्यादा संपत्ति है. और भारत के 50 फीसदी लोगों के पास मिलाकर देश की सिर्फ 3 फीसदी संपत्ति है.
तब इस रिपोर्ट के मैथेडॉलजी को लेकर सवाल उठे थे. जवाब में ऑक्सफैम ने कहा था कि उसने सिर्फ सरकार और दूसरे स्रोतों से मिले आंकड़ों का संकलन किया है, खुद से कोई शोध प्रस्तुत नहीं किया है.
1 महीने में दूसरे NGO पर गिरी गाजपिछले एक महीने में यह दूसरा मौका है जब गृह मंत्रालय ने किसी NGO के खिलाफ CBI जांच की सिफारिश की है. मार्च में ऐसा ही आदेश हर्ष मंदर के संगठन अमन बिरादरी के लिए भी आया था.
वीडियो: देश के 21 अमीरों के पास इतना पैसा कैसे, खुलासा करने वाली Oxfam India के CEO ने क्या बताया?

.webp?width=60)

