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रिफ्यूजी वापस भेजे जा रहे हैं, ग्रीस में दंगा हो सकता है

ग्रीस से रिफ्यूजियों की यह भीड़ अब संभाली नहीं जा रही है. सोमवार से उन्हें वापस भेजने का काम शुरू हो गया.

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तुर्की पहुंचे रिफ्यूजी. Photo: Reuters
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कुलदीप
4 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 4 अप्रैल 2016, 02:48 PM IST)
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ग्रीस में दंगे हो सकते हैं. क्यों? क्योंकि वहां तुर्की से जो भारी संख्या में रिफ्यूजी आए थे, उन्हें वापस भेजा जा रहा है. सोमवार को यह प्रक्रिया शुरू हो गई. कुछ लोगों को पानी के जहाज के जरिये भेजा गया. लेस्बोस और कायोस से 202 लोग भेजे गए जिन्हें तुर्की के दिकिली में रिसीव कर लिया गया. वे सभी पाकिस्तानी बताए जा रहे हैं. समझौते के मुताबिक, जितने भी सीरियाई नागरिक तुर्की भेजे जाएंगे, यूरोपियन यूनियन उनके बदले उतनी ही संख्या में उन सीरियाई रिफ्यूजियों को अपने यहां शरण देगी, जिन्होंने इसके लिए कानूनी तरीके से अप्लाई किया है. इससे पहले सरकार के प्रवक्ता ने खुद यह आशंका जाहिर की थी कि इस दौरान हिंसा हो सकती है. उन्होंने कहा, 'हमें हिंसा की आशंका है. हमारा मकसद तुर्की के तट से होने वाली ह्यूमन ट्रैफिकिंग को रोकना है. यह मुश्किल होगा, लेकिन हम सॉफ्ट अप्रोच इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं. ये लोग क्रिमिनल नहीं हैं. ये युद्ध से डरकर भागे हैं.'

मसला क्या है?

दरअसल गृह युद्ध में जान के खतरे को देखते हुए अलग-अलग मुल्कों के बहुत सारे लोग तुर्की से ग्रीस पहुंचे थे. ग्रीस यूरोपियन यूनियन का सदस्य देश है. बाद में यूरोपियन यूनियन और तुर्की के बीच एक समझौता हुआ. जिसके हिसाब से जितने भी बाहरी लोग गैरकानूनी तरीके से ग्रीस में घुसे थे उनको वापिस तुर्की भेजा जाना है. इन लोगों में मुख्य रूप से सीरिया, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के लोग हैं जो अलग अलग युद्धों के डर से अपना मुल्क छोड़कर भागे हैं.

अभी तुर्की में हालात ठीक नहीं: रिफ्यूजी

सीरिया के लोग ISIS से बचने के लिए भागे थे. पनाह मिली, पर वह अस्थायी थी. उत्तरी यूरोपियन देशों ने दरवाजे बंद ही रखे. लेकिन अब ग्रीस से रिफ्यूजियों की यह भीड़ अब संभाली नहीं जा रही है. सोमवार को रिफ्यूजियों की इच्छा के खिलाफ उन्हें वापस भेजना शुरू कर दिया गया. उनका आरोप है कि उनसे ग्रीस मे शरणार्थी बनने की प्रक्रिया छिपाकर रखी गयी. उनका कहना है कि हमें तुर्की वापस भेजा जा रहा है, लेकिन अभी वहां भी हालात ऐसे नहीं हैं, जहां जाकर उनकी जिंदगी ठीक-ठाक चल सके. इंटरनेशनल ऑर्गेनाईजेशन ऑफ़ माइग्रेशन (IOM) की एक रिपोर्ट में बताया गया है, सिर्फ साल 2015 में लगभग 10 लाख लोग यूरोप पहुंचे. IOM एक संस्था है, जो अलग अलग देशों की सरकारों के साथ मिलकर विस्थापितों (माइग्रेटेड) के लिए काम करती है. लिहाजा वापस भेजे जाने का रिफ्यूजियों ने विरोध कर शुरू कर दिया है. शानिवार को रिफ्यूजियों की भीड़ ने एक रजिस्ट्रेशन सेंटर में हंगामा कर दिया और करीब 800 लोग वहां से भाग गए. पुलिस ने आंसूगैस से उन्हें रोकने की कोशिश की, भगदड़ में तीन लोगों की मौत हो गई. हालांकि सीरिया के रिफ्यूजी जो भी हैं.उनके बदले दुसरे नये रिफ्यूजी जो पुरे कायदे नियम से यूरोप में रहने की इजाज़त मांगेंगे उन्हें आने दिया जाएगा.और पुराने वाले भेज दिए जायेंगे.अब,आज सुबह ग्रीस से एक जहाज में हर एक रिफ्यूजी के पीछे एक सुरक्षाबल लगा के वापिस टर्की भेज दिए गये.

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