पैगंबर के खिलाफ़ फेसबुक पर लिखा, तो पंचायत ने सुनाई ये सज़ा
भड़काऊ पोस्ट लिखने पर पंचायत ने खुद लिया एक्शन.
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प्रतीकात्मक इमेज.
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फेसबुक पर भड़काऊ पोस्ट करने वाली जमात में इज़ाफ़ा होता ही जा रहा है. ख़ास तौर से किसी धर्म को लेकर ऊलजलूल पोस्ट करने का ट्रेंड सा चल पड़ा है. बंगाल में ऐसी ही एक पोस्ट से ट्रिगर होकर दंगा तक हो चुका है. ऐसे में समाज के रहनुमाओं का फ़र्ज़ बनता है कि वो इस तरह की घटनाओं से लोगों को दूर रखने की कोशिश करे. ऐसी ही एक घटना में मेवात की एक महापंचायत ने एक्शन ले लिया. फेसबुक पर भड़काऊ पोस्ट लिखने वाले लड़के पर महापंचायत में मुकदमा चलाया. उसका दोष साबित भी हुआ. यहां तक तो ठीक था. पर उसके बाद पंचायत ने वही किया, जिसके लिए वो बदनाम है.
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पहले पूरा मामला जान लें
मेवात के नगीना कस्बे में एक महापंचायत बुलाई गई. वजह थी दौलतराम नाम के एक 25 साल के लड़के की फेसबुक पर की गई कारगुज़ारी. लड़के ने किसी धर्म को लेकर फेसबुक पर अभद्र टिपण्णी कर दी थी. इससे इलाके में दो धर्मों के बीच तनाव बढ़ने के आसार बढ़ गए थे. तुरंत गांव के बुजुर्गों ने एक्शन लिया. कस्बे के सरपंच और सर्वधर्म समाज की एक बैठक बुलाई. नगीना की चौधरी चौपाल पर महापंचायत शुरु हुई. हाजी असगर हुसैन ने मामले से सबको अवगत कराया. आरोपी युवक से जवाब मांगा गया. हाजी नासिर हुसैन ने आरोपों की फेहरिस्त पढ़ कर सुनाई. दौलतराम ने सारे आरोप कबूल कर लिए. पंचायत से माफ़ी मांग ली. कहा कि पंचायत जो सज़ा दे वो उसे भुगतने के लिए तैयार है.पंचायत का फैसला
पंचायत का कहना था कि दौलतराम की इस हरकत से इलाके के लोगों का आपसी भाईचारा ख़तरे में पड़ गया है. इस महापंचायत में 21 सदस्य थे, जो सभी धर्मों का प्रतिनिधित्व करते थे. आरोपों और अपराधी की स्वीकारोक्ति को सुनने के बाद, अध्यक्ष सुभाष गुप्ता ने फैसला सुनाया. बस यही फैसला पंचायत के तमाम अच्छे क़दमों पर भारी पड़ गया. पंचायत ने लड़के को 11 जूते मारने का फरमान सुनाया. साथ में 21 हज़ार का जुर्माना और तीन महीने के लिए गांव से तड़ीपार करने का हुक्म सुना दिया गया. गांव के एक बुज़ुर्ग व्यक्ति ने दौलतराम को सबको सामने 11 जूते लगाए भी. बस यही कुछ जम नहीं रहा.क्यों ये फैसला गलत है?
पंचायत ने खुद नोटिस लेकर मामले की छानबीन की, ये अच्छी बात है. बल्कि सच कहा जाए तो एक मिसाल है. अगर समाज के लोग ही इतने सजग रहने लगे तो सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बने ही न. लोगों को हमेशा ही इतना अलर्ट रहना चाहिए. इस लिहाज़ से मेवात की ये पंचायत सच में ही बधाई की पात्र है. लेकिन...लेकिन जो सज़ा उन्होंने तय की वो सही नहीं है. किसी को भरी पंचायत में जूते मारना और कुछ नहीं, हल्का तालिबानी संस्करण ही है. 21 हज़ार का जुर्माना भी सही नहीं. हो सकता है आरोपी के परिवार की माली हालत इतना लोड लेने लायक हो ही न. 11 जूते मारकर किया गया अपमान तो उस व्यक्ति को और भी नफरत करने के लिए प्रेरित करेगा.बेहतर तो ये होता कि पंचायत सज़ा देने का कोई अच्छा रास्ता खोजती. जैसे अगर उस लड़के को तमाम दूसरे धर्मों के ग्रंथों का अध्ययन करने और उसपर कुछ पॉजिटिव लिखने के लिए कहा जाता. ऐसी ही कोई सज़ा मामले को दबा भी देती और एक युवा नफरत से दूर भी चला जाता. खैर ये हो न सका. पंचायत ने एक गलत फैसले से अपनी एक बेहतरीन पहल का सत्यानास मार दिया.
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