कलाकार का काम तो बोलता ही है लेकिन जब किसी ज़रूरी मुद्दे पर कलाकार खुद बोलता है,तो वो दृश्य संजोये जाने लायक होता है. और वो भी किसी बड़े मंच पर. तमाम बड़े बड़ेनामों के सामने. मानवीय संवेदनाओं को अपने अभिनय से परदे पर उकेरने वाले आर्टिस्ट्सजब असल ज़िंदगी में भी उतने ही सेंसिटिव पाए जाते हैं तो ख़ुशी होती है. ना सिर्फसंवेदनशील बल्कि हिम्मती भी. हॉलीवुड अदाकारा मेरील स्ट्रीप ने गोल्डन ग्लोबअवॉर्ड्स में एक झन्नाटेदार स्पीच देकर वहां मौजूद तमाम लोगों का दिल जीत लिया.उन्होंने बेहद ज़िम्मेदारी से शब्दों का चयन करते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्डट्रंप की, उनका नाम लिए बगैर धज्जियां उड़ा दी. मेरील स्ट्रीप को अपने बेहद शानदारएक्टिंग करियर के लिए गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड्स में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया जारहा था. इसकी एक्सेप्टेंस स्पीच में मेरील ने जो कहा उसने तमाम दुनिया में आग लगालगा दी है. हर तरफ मेरील के साहस की तारीफ़ हो रही है. कहा जा रहा है कि अपनेसुप्रीम एक्टिंग टैलेंट जितना ही शानदार व्यक्तिव पाया है मेरील ने. अपनी लगभग 6मिनट लंबी स्पीच में मेरील ने डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिए बिना उनकी तीखी आलोचना की.अपनी असहमति को कड़े शब्दों में रखा. उनकी बेहूदा टिप्पणियों पर अपनी नाराज़गी दिखाई.अपनी स्पीच की शुरुआत उन्होंने ये कहते हुए की, “आज इस छत के नीचे अमेरिकन सोसाइटीमें सबसे ज़्यादा अपमानित तीन तबकों के लोग हैं. हॉलीवुड, विदेशी और प्रेस.” वोट्रंप के विदेशी लोगों की अमेरिका में मौजूदगी वाले बयान पर कमेन्ट कर रही थी.उन्होंने ढेर सारे हॉलीवुड एक्टर्स और सेलिब्रिटीज के नाम गिनाएं जो अमेरिकन मूल केनहीं थे, लेकिन जिन्होंने हॉलीवुड में अपनी गहरी छाप छोड़ी है. उन्होंने उदाहरण देकरजताया कि कैनडा, आयरलैंड, इजराइल, इथियोपिया, इंडिया, केन्या, पाकिस्तान, मेक्सिको,कोलंबिया, इंग्लैंड, चाइना, ऑस्ट्रेलिया और यहां तक की रशिया के कलाकारों ने भीहॉलीवुड को समृद्ध करने में अपना योगदान दिया है. उन्होंने तंजिया लहज़े में पूछा,‘इन सबके बर्थ सर्टिफिकेट्स कहां है?’ याद रहे ट्रंप ने ओबामा के बर्थ सर्टिफिकेटके लिए कुछ दिन पहले काफी हंगामा काटा था. स्ट्रीप ने ज़ोर देकर ये बात कही किअलग-अलग रंग, धर्म, भाषा और यहां तक कि अलग अलग देशों के लोगों ने हॉलीवुड कीदुनिया में रंग भरे हैं. मेरील ने अपनी सबसे तीखी टिप्पणी तब की जब उन्होंने ट्रंपद्वारा एक दिव्यांग व्यक्ति का मज़ाक उड़ाने वाली घटना का ज़िक्र किया. डोनाल्ड ट्रंपने न्यूयॉर्क टाइम्स के रिपोर्टर सर्ज कोवाल्स्की की नक़ल की थी. सर्ज के हाथ मेंदिक्कत है. मेरील ने बेहद भावुक होते हुए कहा, “एक एक्टर का काम लोगों कीजिंदगियों में शिरकत करना और उन्हें महसूस करना होता है. इस लिहाज़ से इस साल बहुतसे शानदार, सांस रोकने वाले और पावरफुल परफॉरमेंसेस हुए. लेकिन सबसे बुरा एक ही थाजिसने मुझे हिला के रख दिया. उसने मेरा दिल दुखाया. उसमे कुछ भी अच्छा नहीं था,लेकिन उसने अपना मकसद पूरा किया. ये वो घड़ी थी, जब हमारे मुल्क की सबसे इज्ज़तदारपोस्ट पर बैठे आदमी ने एक विकलांग रिपोर्टर की नक़ल उतारी. एक ऐसे शख्स को अपमानितकिया जो अधिकार, ताकत और पलट कर लड़ने की क्षमता के मामले में उससे कमतर था." वो आगेबोलती गईं, "इस घटना ने मेरा दिल तोड़ दिया. मैं उसे अब तक भुला नहीं पाई हूं क्योंकि वो किसी फिल्म का सीन नहीं था, असल ज़िंदगी में हो रहा था. किसी को अपमानित करनेकी ये प्रवृत्ति जब किसी पब्लिक फिगर में पाई जाती है, तब इसके लोगों की ज़िंदगी काहिस्सा बनने की संभावना बढ़ जाती है. इसका मतलब आप लोगों को भी ऐसा करने की परमिशनदे रहे हो. अपमान का जवाब अपमान होगा, हिंसा और ज़्यादा हिंसा भड़काएगी. जब ताकतवरलोग अपनी ताकत का इस्तेमाल लोगों को धमकाने में करते हैं, हम सबकी हार होती है.”मेरील के इन शब्दों को सबने पूरी ज़िम्मेदारी से सुना. जब मेरील ये कह रही थी ऑडियंसमें मौजूद कई सितारों की आंखें झिलमिलाने लगी थी. गला भर आया था. दर्शकों मेंभारतीय अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा भी मौजूद थी. दुनियाभर में जिस किसी ने भी मेरीलकी ये ‘नो-नॉनसेंस’ स्पीच सुनी वो उनका कायल हो गया. दुनिया की सबसे ताकतवर जगह परबैठे शख्स को आईना दिखाने के लिए हिम्मत चाहिए. गलत को किसी भी हाल में गलत कहने केलिए हौसले की दरकार होती है. देखिये वीडियो मेरील की इस स्पीच के जवाब में ट्रंप काजो जवाब आया है वो उनकी शोहरत के मुताबिक़ ही है. यानी बदतमीज़ी भरा. हॉलीवुड की इसबेहतरीन अदाकारा को उन्होंने 'ओवर-रेटेड एक्ट्रेस' कहा है. बात सही भी है. एकविकलांग का मज़ाक उड़ाने जैसा घिनौना टैलेंट जो नहीं मेरील के पास! इस घमंड भरेरवैये को देखने के बाद ये और भी साबित हो गया कि मेरील ने इस आदमी के बारे में जोकहा वो सही भी था और ज़रूरी भी. दुनिया के शीर्ष पर बैठा आदमी इतना हल्का हो ये शर्मकी बात है. मेरील ना भी बोलती तो भी चलता. लेकिन अपनी आवाज़ पहुंचाने के लिए एक मंचके मिलते ही उन्होंने अपनी बात पुरज़ोर ढंग से रखी. इतने बड़े बड़े नामों की मौजूदगीमें दृढ़ता से अपनी बात कहना अभिव्यक्ति की आज़ादी के दुर्लभ क्षणों में से एक है. अपने यहां तो असहिष्णुता शब्द के मुंह से निकलते ही गालियों की बौछार करने का चलनहै.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़िएमेक्सिको के लोगों ने डोनाल्ड ट्रम्प को मरवा दियामुंबई हमला हुआ ना, इसीलिए इस मुस्लिम औरत ने ट्रंप को वोट कियाहॉलीवुड को 'हॉलीवीड' बनाने वाले अमेरिकी क्या खाकर इंडिया की बराबरी करेंगे?