भारत देश में मैटर किसी भी चीज़ पर खड़ा हो सकता है. दिवाली पर तमिल एक्टर विजय कीफिल्म आई मर्सल. इसके एक सीन को लेकर तमिलनाडु में गदर कट रहा है. वहां के भाजपानेता विजय के पीछे ऐसे पड़े हैं जैसे विजय ने उनकी भैंस खोल ली हो. भाजपा केराष्ट्रीय सचिव एच राजा ने ट्विटर पर गोद दिया कि विजय ईसाई हैं इसलिए सरकार के कामकी आलोचना कर रहे हैं. विजय इतने दिन चुप रहे. लेकिन अब उन्होंने जवाब दिया है औरवो भी पूरे इश्टाइल में.विजय ने 25 अक्टूबर, 2017 को अपने फैन्स के लिए एक खत जारी किया. इसमें उन्होंनेमर्सल को हिट कराने के लिए उनका शुक्रिया किया. इस खत में उन्होंने अपने विरोधियोंके खिलाफ कुछ नहीं कहा. लेकिन इस खत में दो ऐसी चीज़ें थीं जिन्हें खत का हाई पॉइंटकहा जा सकता है. लेटरपैड पर लाल स्याही से बोल्ड में विजय का पूरा नाम लिखा था - सीजोसफ विजय, इसके अलावा खत में विजय ने एक जगह लिखा, 'ईशू सबकी रक्षा करते हैं.'विजय का अपने फैन्स को लिखा खतविजय अपने फैन्स के लिए विरले ही लेटर जारी करते हैं और अपना नाम विजय ही लिखते रहेहैं. ये शायद पहली बार है कि विजय ने अपना पूरा नाम इस्तेमाल किया हो. साफ ज़ाहिरकिया कि वो ईसाई हैं. ताकि वो टुच्चई बंद हो, जो उनके ईसाई होने के इर्द-गिर्द होरही है.नाम की वाहियात पॉलिटिक्सनाम में से पहचान खोदकर निकालना और उस पर चोट करने का भाजपा का ट्रैक रिकॉर्ड रहाहै. एक वक्त कांग्रेस नेता अहमद पटेल का नाम ज़ोर देकर 'मियां' अहमद पटेल पुकाराजाता था. इसी तरह चुनाव आयुक्त लिंगदोह को 'जेम्स माइकल लिंगदोह' कहा गया. मंशा साफहोती थी, नाम में छुपी पहचान को लेकर कोई शुबहा न रहे. मालूम चले कि पटेल सरनेमवाले अहमद मुसलमान हैं और लिंगदोह ईसाई. एच राजा के ट्वीट से ये 'कड़वा सच' उजागरहुआ कि अपनी फिल्म में मंदिर से पहले अस्पताल बनाने की बात करने वाले विजय ईसाईहैं.एच राजा का ट्वीट जिसमें उन्होंने विजय की ईसाइयत को निशाना बनायाऐसा कर के आपको 'व्यापक भारत' से काट दिया जाता है. और एक बार साबित कर दिया जाए किआप भारत के 'देशभक्त मूल निवासी' (इसे हिंदू पढ़ें) नहीं हैं, तो आपको आसानी सेहाशिए पर धकेला जा सकता है. तब आप पर चोट होगी भी तो लोग आपके साथ आने से कतराएंगे.जंग के लिहाज़ से ये एक बढ़िया रणनीति है. लेकिन रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ये घातकहोता है. एक मियां को निशाना बनाता आक्षेप सैकड़ों या हज़ारों मुसलमानों को चुभताहै. 'सी जोसफ विजय' को सरकार का दुश्मन बताने से दूसरे ईसाई भी आहत होंगे. और बातआहत बस होने की नहीं है. ध्यान इस बात पर भी दिया जाता है कि आपको इस तरह निशानाबनाने वाला किस धर्म से आता है. पहचान एच राजा के नाम से भी झलकती ही है.लेकिन विजय ने इस बार इस रणनीति को पटखनी दे दी है. उन्होंने अपने पर हुए वार को हीअपना दांव बना लिया है. हम कायल हैं उस गज़ब के धीरज के, जो विजय ने दिखाया.अब ये सवाल नहीं बचा है कि एच राजा और उनके साथी भाजपा नेता क्या करेंगे. अब सवालये बचा है कि आप क्या करेंगे?सोचिए.--------------------------------------------------------------------------------ताजमहल भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है, सुबूत ये हैं!और पढ़ेंःपैगंबर मुहम्मद के वक़्त और भी कई लोगों ने पैगंबरी पर दावा कर रखा थामैं नहीं कहता तब करप्शन अपवाद था, पर अब तो माहौल फ़िल्म से बहुत ब्लैक है: कुंदनशाहउसने ग़ज़ल लिखी तो ग़ालिब को, नज़्म लिखी तो फैज़ को और दोहा लिखा तो कबीर को भुलवादियाकेरल के पहले दलित पुजारी पर साल में दूसरी बार जानलेवा हमला हुआ हैईश्वर व्यक्ति को उस समय क्यों नहीं रोकता, जब वह कोई पाप कर रहा हो?