The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Meghalaya miners : Updates on 15 miners trapped in east jayantia hills from last 15 days and rescue operation is going on

मेघालय : कोयला खदान में फंसे 15 मज़दूरों का क्या हुआ?

NDRF के बाद अब एयरफोर्स और ओडिशा फायर डिपार्टमेंट के लोग भी मौके पर पहुंच गए हैं.

Advertisement
pic
28 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 28 दिसंबर 2018, 12:29 PM IST)
Img The Lallantop
मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स में पिछले 15 दिनों से फंसे हुए 15 मज़दूरों को अब तक नहीं निकाला जा सका है.
Quick AI Highlights
Click here to view more
अगर एक लाइन में इस सवाल का जवाब दिया जाए तो जवाब है कुछ नहीं. ईस्ट जयंतिया हिल्स की अवैध कोयला खदान में फंसे मज़दूरों के बारे में अब तक कुछ भी पता नहीं चल पाया है. अब भी मज़दूरों को निकालने की कोशिश जारी है, लेकिन किसी तरह की कोई कामयाबी नहीं मिल पाई है.
अब तक क्या-क्या हुआ?
एनडीआरएफ के साथ ही ओडिशा फायर सर्विस स्टेशन के 21 लोग मौके पर पहुंच गए हैं.
एनडीआरएफ के साथ ही ओडिशा फायर सर्विस स्टेशन के 21 लोग मौके पर पहुंच गए हैं.

सभी बचाव दल मज़दूरों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिली है. एनडीआरएफ के असिस्टेंट कमांडेंट संतोष सिंह के मुताबिक एनडीआरएफ के गोताखोरों ने बदबू की सूचना दी थी. ये अच्छा संकेत नहीं है. एनडीआरएफ की टीम को टनल से तीन हेलमेट भी मिले हैं, जो मज़दूरों के हैं. इसके अलावा अभी तक कुछ खास नहीं मिल पाया है. फिलहाल खदान के अंदर 70 फीट तक पानी भरा है. अब तक उस खदान से कुल 12 लाख लीटर पानी बाहर निकाला जा चुका है. मेघालय सरकार की ओर से फंसे हुए मज़दूरों के परिवारवालों के लिए एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है.
मौके पर पहुंचे एयरफोर्स, कोल इंडिया और किर्लोस्कर के लोग
कोयला खदान में फंसे मज़दूरों को निकालने के लिए एयर फोर्स, कोल इंडिया, एनडीआरएफ और ओडिशा फायर सर्विस की टीमें लगी हुई हैं.
कोयला खदान में फंसे मज़दूरों को निकालने के लिए एयर फोर्स, कोल इंडिया, एनडीआरएफ और ओडिशा फायर सर्विस की टीमें लगी हुई हैं.

8 दिसंबर को एयरफोर्स का लॉकहिड मॉर्टिन सी-130 जे सुपर हरक्यूलस विमान ओडिशा से गौहाटी पहुंच गया है. ओडिशा के फायर सर्विस डिपार्टमेंड के 21 लोगों की एक टीम किर्लोस्कर के 20 पंप लेकर मेघालय पहुंची है. गोहाटी से हादसे वाली जगह करीब 200 किमी है. सभी पंप को ट्रक के जरिए मौके पर पहुंचाया जा रहा है. ओडिशा के फायर सर्विस के डॉयरेक्टर जऩरल बीके शर्मा ने बताया है कि एक पंप एक मिनट में 1600 लीटर पानी निकालने में सक्षम है. और हमें उम्मीद है कि हम मज़दूरों को बचा लेगें. बीके शर्मा ने बताया-
'हम पहले और भी बेहतर कर सकते थे. लेकिन गृहमंत्रालय ने हमसे 27 दिसंबर को हमसे संपर्क किया था. इसके बाद हमने तुरंत काम शुरू कर दिया था. हम उन कुछ चुनिंदा राज्यों में हैं, जिनके पास ऐसी स्थितियों से निबटने की ताकत है.'
कोल इंडिया ने भी पश्चिम बंगाल के आसनसोल और झारखंड के धनबाद से पंप मंगवाए हैं, जो टनल से पानी निकालने की कोशिश कर रहे हैं. उत्तरी पूर्वी कोल फिल्ड के जनरल मैनेजर जेके बोरा ने बताया कि सात पंप पानी निकालने में लगे हुए है. कोल इंडिया के और दूसरे उपकरणों को हादसे वाली जगह पर पहुंचाने में तीन से चार दिन और लगेंगे. एनडीआरएफ के मुताबिक अगर पानी 70 फीट से 40 फीट तक आ जाता है, तो एनडीआरएफ के गोताखोर 40 फीट अंदर डाइव कर सकते हैं और मज़दूरों की स्थिति का पता लगा रहे हैं.
स्थितियां बेहद खराब : कोनराड संगमा
मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने कहा है कि स्थितियां इतनी खराब हैं कि मज़दूरों को निकाला नहीं जा सका है.
मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने कहा है कि स्थितियां इतनी खराब हैं कि मज़दूरों को निकाला नहीं जा सका है.

मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा का कहना है कि स्थितियां बेहद खराब हैं. और मुख्यमंत्री जिन स्थितियों की बात कर रहे हैं, उनमें मज़दूरों का बचना बेहद मुश्किल लग रहा है. ऐसा इसलिए भी है कि फरवरी 2014 में गारो हिल्स में अवैध खदान की दीवार धंसने से चार मज़दूरों की मौत हो गई थी. दिसंबर 2013 में इसी जयंतिया हिल्स में मज़दूरों को खदान के अंदर ले जाने वाली ट्रॉली की केबल टूट गई थी और पांच खनन मज़दूरों की मौत हो गई थी. जुलाई 2012 में एक अवैध खदान में पानी भरने की वजह से 15 मज़दूरों की मौत हो गई. इन सभी हादसों में भी मज़दूरों को बचाने की कोशिश हुई थी, जो कामयाब नहीं हो सकी थी.
गिरफ्तार हुआ खदान का मालिक
मेघालय में फंसे हुए मज़दूरों को खदान से बाहर निकालने के लिए एनडीआरएफ की टीमें कोशिश कर रही हैं.
मेघालय में फंसे हुए मज़दूरों को खदान से बाहर निकालने के लिए एनडीआरएफ की टीमें कोशिश कर रही हैं.

जिस खदान में ये हादसा हुआ है, उसके मालिक को मेघालय पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. उसका नाम क्रिप चुलेत है और उसने स्वीकार कर लिया है कि खदान उसी की है. वहीं इस खदान के दो और मैनेजर मोहेश और जेम्स सखलैन अब भी फरार हैं. जेम्स सखलैन खदान में खुदाई करवाता था. वहीं मोहेश के जिम्मे मज़दूर लाने का काम था.


 

Advertisement

Advertisement

()