पेशेवर खेल में जितनी ज़ल्दी शुरूआत हो उतना ही अच्छा होता है. सचिन ने भी सिर्फ 15साल की उम्र में अपना पहला फर्स्ट क्लास मैच खेला था. पर इतनी ज़ल्दी शुरूआत हो जाएकि आपकी हाईट ही विकेटों जितनी हो तब क्या कहेंगे ? सोशल मीडिया पर एक क्लिप वायरलहुई जिसमें 5 साल का एक बच्चा दिल्ली की अंडर-14 टीम में खेल रहा है. वो भी बाकायदाहैलमेट-पैड लगाए हुए प्रोपर लैदर बॉल से. 2014 में खेले गए इस मैच में रूद्र प्रतापनाम का यह बालक अपने से तीगुणी उम्र के खिलाड़ियों के साथ खेल रहा है. हैलमेट सिरपर सही से नहीं आ पाया इसलिए टोपी लगाकर जैसे-तैसे हैलमेट फंसाया है. आकार इतनाछोटा है कि कोई तेज़ गेंदबाज़ी करे तो हर गेंद सिर के ऊपर से जाकर वाईड होगी.https://www.youtube.com/watch?v=n6jBv0c_lS05 साल के रूद्र प्रताप ने अपने स्टांस और आत्मविश्वास से सोशल मीडिया का दिल जीताहुआ है. यू ट्यूब टिप्पणियों में एक शख्स ने कहा है – इसके पापा ही कोच होंगे, सहीसमय पर बच्चे को भेज दिया. बहुत सारे लोग इस नन्हे-मुन्ने के शॉट सेलेक्शन की तारीफकर रहे हैं. तारीफों के बीच एक टिप्पणी काबिल-ए-गौर है - इस उम्र में इस बच्चे कोखेलने देने का फैसला सही नहीं है. हैलमेट, पैड, गार्ड इस लिटिल मास्टर के लिए भारीहैं. यह अपने आपको चोटिल कर सकता है. 5 साल और ट्रेनिंग करके किसी टीम के लिए खेलेतो बेहतर. क्रिकेट का वज़न उठाने के लिए शरीर भी होना चाहिए.एक लिटिल मास्टर इससे भी छोटा हैअगर 5 साल के रूद्र से आपको अचंभा नहीं हुआ है तो 4 साल के शायन जमाल से मिलिए. इसबालक को 4 साल की उम्र में डेढ साल क्रिकेट खेलने का अनुभव है. शायन नेट प्रैक्टिसही नहीं करता बल्कि मैच भी खेलता है. दिल्ली के संगम विहार के एक स्कूल में कच्चीकक्षा में पढ़ने वाला शयान विराट कोहली जैसा खिलाड़ी बनना चाहता है और अपने स्कूलकी अंडर-12 टीम का खिलाड़ी है. शयान के पिता क्लब स्तर के क्रिकेटर रहे हैं तोक्रिकेट की समझ बेहतर है इसलिए अभी से पेशेवर कोच लगा रहा है.https://www.youtube.com/watch?v=SEOX6faeDMsइनमें से कौन इंडिया के लिए पहले खेलता है ये कोई नहीं जानता लेकिन ज़ल्दी के चक्करमें क्रिकेट प्रतिभाएं खो न जाएं इसका तो ख़याल रखना ही पड़ेगा.