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सब्जीवाला पहले पत्रकार बना, फिर तांत्रिक, हत्या की और साधु बनकर भाग गया

साधू का भेष बनाकर दिल्ली में रह रहा था नजाकत अली. 50 हजार का इनाम था.

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Meerut absconded murder accused arrested
7 साल से फरार आरोपी नजाकत अली पकड़ा गया (फोटो: आजतक)
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सुरभि गुप्ता
15 सितंबर 2022 (अपडेटेड: 15 सितंबर 2022, 06:49 PM IST)
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मामला है यूपी के मेरठ का. टाइमलाइन जाती है साल 2015 तक. एक था नज़ाकत. उसके ऊपर हत्या करने के केस थे. उसके ऊपर ठगी करने के केस थे. पुलिस की हिरासत में था. पुलिस के साथ जा रहा था कोर्ट में. पेशी पर. लेकिन पेशी में मामला गड़बड़ हो गया. नज़ाकत भाग गया. पुलिस के चंगुल से.  

फिर नज़ाकत मिला. लेकिन नज़ाकत नज़ाकत नहीं रह गया था. नज़ाकत साधु बन गया था. फर्जी वाला. दिल्ली में रह रहा था.

उसको मंगलवार, 13 सितंबर की शाम को मेरठ के गोल मार्केट सिविल लाइन से गिरफ्तार कर लिया गया. स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने गिरफ्तार किया. आजतक के उस्मान चौधरी की रिपोर्ट के मुताबिक, नजाकत अली पर 50 हजार रुपये का इनाम भी रखा गया था. 

कैसा पकड़ा गया?

अपर पुलिस अधीक्षक एसटीएफ बृजेश सिंह ने बताया,

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पुलिस कस्टडी से कैसे भागा?

नजाकत 26 नवंबर 2013 को हुए बिलाल हत्याकांड का मुख्य आरोपी है. इस मामले में उसे जेल भेजा गया था. 26 सितंबर, 2015 को नजाकत मेरठ कोर्ट में पेशी पर लाया गया था. इसी दौरान पुलिसकर्मियों से सेटिंग करके वो फरार हो गया था.

फरार होने के बाद कहां-कहां रहा?

पूछताछ में नजाकत ने बताया कि साल 2015 में पुलिस कस्टडी से फरार होने के बाद वो 2-3 महीने आगरा में रहा. इसके बाद वो हिमाचल प्रदेश के शिमला चला गया. शिमला में 6-7 महीने रहने के बाद वो हरियाणा पहुंच गया. वहां वो लगभग डेढ़ साल रहा. हरियाणा से वो 4-5 राजस्थान में रहा. फिर यूपी के मिर्जापुर में, इसके बाद सोनभद्र में रहा. वो इलाहाबाद के एक मंदिर के बाबा के पास लगभग एक साल तक रहा. इलाहाबाद से बनारस पहुंचा, वहां भी एक साल तक रहा. वहां से वो पश्चिम बंगाल भी जाकर रहा. इसके बाद साल 2020 में वो दिल्ली आ गया और यहां संजय शर्मा के नाम से रहने लगा.

जानकारी के मुताबिक नजाकत अली पर अलग-अलग राज्यों में लगभग 13 मुकदमें दर्ज हैं. वह यूपी पुलिस सहित राजस्थान और हरियाणा पुलिस का मोस्ट वांटेड भी है. उसके खिलाफ हत्या के दो और ठगी के कई मुकदमे दर्ज हैं. हरियाणा के हिसार से एक व्यक्ति ने नजाकत के खिलाफ इसी साल 4 लाख रुपये की ठगी का केस दर्ज कराया था.

सब्जी की दुकान चलाई, तांत्रिक बना, पार्षद भी रहा

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक नजाकत ने पूछताछ में बताया,

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नजाकत ने बताया कि वो साल 2005 में पहली बार तमंचे व कारतूस के मुकदमे में जेल गया था और तीन दिन बाद उसकी जमानत हो गई थी. जमानत के बाद वो पैसे कमाने के लिए अपने साढ़ू सिराज के साथ मिलकर तांत्रिक बन गया था. तांत्रिक बनकर वो लोगों को गड़ा धन निकालने, पैसा दोगुना करने और पुत्र प्राप्ति वगैरह का उपाय बताकर ठगने लगा. इस काम से उसने बहुत पैसा कमाया. 

रिपोर्ट के मुताबिक नजाकत अली साल 2007 से 2012 तक रसीदनगर का पार्षद रहा. इस दौरान 2009 में कॉपरेटिव बैंक का वाइस चैयरमेन बना, लेकिन कुछ विवादों के चलते 2 महीने बाद पद से हट गया. 

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