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MCD स्टैंडिंग कमेटी का कार्यकाल सिर्फ 38 दिन का, फिर क्यों भिड़ गए AAP-BJP के पार्षद?

स्टैंडिंग कमेटी के चुनाव को लेकर MCD सदन में जमकर हंगामा हुआ. पार्षदों में मारपीट भी हुई.

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23 फ़रवरी 2023 (अपडेटेड: 23 फ़रवरी 2023, 05:04 PM IST)
MCD Standing Committee Election
MCD सदन के अंदर हंगामे की तस्वीर. (आजतक)
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दिल्ली में मेयर का चुनाव हो गया है. पिछले साल 4 दिसंबर को MCD (दिल्ली नगर निगम) के चुनाव हुए और 7 दिसंबर को नतीजे आए. लेकिन कल यानी 22 फरवरी को दिल्ली को उसका मेयर मिला. आम आदमी पार्टी की शैली ओबेरॉय को MCD सदन में वोटिंग के बाद मेयर चुना गया. मेयर का चुनाव हुआ, फिर डिप्टी मेयर चुने गए. थोड़ा बवाल उसमें भी हुआ. फिर बारी स्टैंडिंग कमेटी की. स्टैंडिंग कमेटी को लेकर तो भंयकर हंगामा हुआ. थप्पड़बाजी, माइक तोड़ दिया, एक दूसरे पर बोतलें फेंकी और भयंकर हंगामा. रातभर हंगामा चला लेकिन चुनाव नहीं हो पाए और हालात इतने बिगड़ गए कि सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा. लेकिन दिलचस्प बात ये है कि ये जो मेयर, डिप्टी मेयर और स्टैडिंग कमेटी के चुनाव हो रहे हैं, इन पदों की मान्यता सिर्फ 31 मार्च तक है.

38 दिन के मेयर के लिए इतना बवाल!

22 फरवरी को शैली ओबेरॉय दिल्ली की मेयर बनीं. उनका कार्यकाल 31 मार्च तक ही है. इस तरह वो कुल 38 दिन के लिए मेयर बनी हैं. ऐसा MCD एक्ट के अनुसार है. एक्ट के मुताबिक, हर वित्त वर्ष की पहली बैठक में सदन में MCD के मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव होगा. और उन्हीं के नेतृत्व में सालभर निगम काम करेगा. 

यानी कुछ ऐसे ही नियम स्टैंडिंग कमेटी के लिए भी हैं. जिस स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों का चुनाव अभी तक नहीं हो पाया है, उनके पद की वैधता सिर्फ 31 मार्च तक ही है.

स्टैंडिंग कमेटी के लिए इतना बवाल क्यों?

दरअसल, स्टैंडिंग कमेटी को दिल्ली नगर निगम की सबसे ताकतवर कमेटी माना जाता है. कहा जाता है कि MCD में मेयर और डिप्टी मेयर के पास फैसले लेने की शक्तियां स्टैंडिंग कमेटी से कम होती हैं. इसकी एक बड़ी वजह ये है की लगभग सभी किस्म के आर्थिक और प्रशासनिक फैसले 18 सदस्यों वाली स्टैंडिंग कमेटी ही लेती है और उसके बाद ही उसे आगे सदन में पास करवाने के लिए भेजा जाता है. ऐसे में स्टैंडिंग कमेटी की ताकत अपने आप बढ़ जाती है. कहा तो ये भी जाता है कि स्टैंडिंग कमेटी का चेयरमैन MCD के चेयरमैन से भी ज्यादा शक्तिशाली होता है.

अगर बात चुनाव की करें तो इस कमेटी में कुल 18 सदस्य होते हैं. इनमें में 6 सदस्यों का चुनाव सदन की पहली बैठक में होता है. इन सदस्यों का चुनाव प्रेफरेंशियल वोटिंग से होता है. यानी पार्षदों को उम्मीदवारों को अपनी पंसद के क्रम में नंबर देने होते हैं. ऐसे में अगर पहले प्रेफरेंस से चुनाव नहीं हो पाता, तो काउंटिंग आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से होती है. यानी दूसरे और तीसरे नंबर के प्रेफरेंस पर जाया जाता है. यहां मामला पेचीदा हो जाता है.

इसके अलावा 12 सदस्यों को 12 अलग-अलग जोन से चुनकर लाया जाता है. जोन की मीटिंग में एल्डरमैन यानी मनोनीत पार्षदों को भी वोटिंग का अधिकार है. बिना एल्डरमैन के आम आदमी पार्टी को 12 में से 8 जोन आसानी से मिलने चाहिए थे, जबकि बीजेपी को 4 जोन में जीत हासिल होनी चाहिए थी. लेकिन उपराज्यपाल के जारी किए गए नोटिफिकेशन में एल्डरमैन को सिर्फ 3 जोन में नियुक्त किया गया है. ऐसे में बीजेपी 4 की बजाय 7 जोन से अपने सदस्यों को स्टैंडिंग कमेटी में भेज सकती है.

अगर बीजेपी हाउस स्टैंडिंग कमेटी की 3 सीटें जीत लेती है और साथ ही साथ 7 सदस्य उसके अलग-अलग जोन से चुने जाते हैं तो स्टैंडिंग कमेटी में बीजेपी का बहुमत हो जाएगा. क्योंकि उसके 18 में से 10 सदस्य चुन लिए जाएंगे. ऐसे में मेयर होने के बाद भी आम आदमी पार्टी को परेशानी होगी.

वीडियो: MCD चुनाव के महीने भर बाद भी दिल्ली को मेयर क्यों नहीं मिल रहा?

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