पुलिस का ख्याल आते ही क्या ज़हन में आता है? कुछ ख़ास किस्म के पूर्वाग्रह हैंउन्हें लेकर. यही कि वो खडूस होते हैं. घूसखोरी करते हैं. टॉर्चर करते हैं. बात-बातपर लाठी चलाते हैं. ड्यूटी का फ्रस्ट्रेशन दूसरों पर निकालते हैं. मुंबई पुलिस कानाम आते ही अक्सर पाटिल, शिंदे, कदम जैसे नाम घूमने लगते हैं, जिनकी एक ख़ास इमेजमुंबईया मसालेदार फिल्मों ने बना रखी है. लेकिन मुंबई की ही एक घटना मुंबई पुलिस कीएक और छवि सामने आती है. सेंट्रल मुंबई की एक जगह है. वडाला. यहां के एक फ्लैट मेंबुजुर्ग ललिता सुब्रमण्यम रहती हैं. सोमवार को अचानक उनके फ्लैट के दरवाजे के सामनेपुलिस खड़ी थी. हाथ में केक और गुलदस्ता लेकर. उस रोज़ ललिता सुब्रमण्यम का 83वांबड्डे था. जाहिर है इस बुजुर्ग महिला के चेहरे पर लंबी चौड़ी मुस्कान आई होगी. ललितासुब्रमण्यम 25 सालों से इस इलाके में रह रही हैं. वो लोकल पुलिस की ऐसे सीनियरसिटिजन की लिस्ट में हैं, जिन्हें केयर की जरूरत है. ललिता सुब्रमण्यम के दो लड़केयूएस में रहते हैं और एक लड़का बंगलौर में. इनमें से कोई भी जब अपनी मम्मी के पासनहीं पहुंच पाया तो माटुंगा पुलिस उन्हें बड्डे विश करने पहुंच गई. फ्लैट मेंडिप्टी कमिश्नर अशोक दुधे भी पहुंचे. पिछले साल वो इस एरिया में जोनल DGP थे. इसकेअलावा सीनियर इंस्पेक्टर बीएम काकड़ भी एक हवलदार के साथ पहुंचे. वो ललितासुब्रमण्यम से मिलते रहते हैं. इस मौके पर ये बुजुर्ग महिला भावुक हो गईं. सीनियरइंस्पेक्टर काकड़ ने कहा कि वो मेरी मां जैसी हैं. वो काफी खुश थीं. मुंबई मेंसीनियर सिटीजन के लिए अलग से हेल्पलाइन भी है. 1090. इसमें बुजुर्ग लोग कभी भी मददके लिए फ़ोन कर सकते हैं. पुलिस के इस एक दूसरे रूप ने दिल खुश कर दिया. जाहिर हैपूर्वाग्रह हर वक्त सही हों, ये ज़रूरी नहीं. एक ही चश्मे से सब कुछ देखना भी नहींचाहिए.--------------------------------------------------------------------------------ये स्टोरी निशांत ने की है.