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रामवृक्ष चेले बढ़ाने के लिए ये जादुई फॉर्मूला लगाता था

जवाहरबाग में जंगल था और जंगल का कानून था. वहां रामवृक्ष के गुंडे कैसे इतनी जल्दी बढ़ गए.

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आशुतोष चचा
10 जून 2016 (अपडेटेड: 10 जून 2016, 10:36 AM IST)
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रामवृक्ष यादव का किस्सा खत्म हो गया है. ही इज नो मोर. लेकिन उसकी ज्यादती के किस्से जवाहरबाग में रहने वाले सुनाते जा रहे हैं. कि उसने वहां कैसे पूरा नई सरकार सा इंतजाम कर रखा था. कोई रामवृक्ष को शैतान कह रहा है कोई कंस. लेकिन ये सब उपमाएं उसके लिए बेकार हैं. वह इनसे भी आगे की चीज था. जवाहरबाग में रहने वालों को उसने सपने दिखा रखे थे. ऐसे वादे किए जैसे कोई नेता करता है. नेता वो था भी, सत्याग्रही सेना का. उसने सपना दिखाया था कि हम अपनी आजाद हिंद सरकार बनाएंगे. और फिर होगा सब कुछ आजाद. जबकि वहां आजाद कुछ नहीं था, कोई नहीं था. इन दो कौड़ी के सपनों के बदले मिलती थी दो वक्त की रोटी. और करना पड़ता था ढेर सारा काम. छुट्टी लेने में लोगों की दैया बोल जाती थी. छुट्टी की अर्जी दो फिर सौ ऊटपटांग सवालों के जवाब दो. कहां जाना है? क्या काम है? फिर नहीं हो सकता क्या? और ऐसे ही तमाम क्वेस्चन. इनके जवाब देने के बाद दो जमानतदार भेजना पड़ता था अपनी जगह. मरियल से जमानतदार काम कर करके उन्हीं के रंग में ढल जाते थे. फिर औ कहीं जाने लायक नहीं बचते थे. इस तरह जवाहरबाग के में इसके चेलों की संख्या बढ़ रही थी. मथुरा केस की सारी खबरें यहां पढ़ें अखिलेश सरकार को सब पता था, मथुरा के लिए 80 बार चेताया, कुछ नहीं किया जवाहरबाग रामवृक्ष के नाम पट्टा होने में सिर्फ दो महीने रह गए थे 'रामवृक्ष जिंदा होता तो मुलायम फैमिली फंस जाती, साजिशन मरवाया गया' 'वकील दिल्लीवाले' पर रामवृक्ष ने किया सबसे ज्यादा पैसा खर्च मथुरा: SP मुकुल द्विवेदी के सिर पर पड़ा डंडा, तो मैदान छोड़ भागे पुलिसवाले मथुरा का 'मुजरिम', जिसके गुरु कानपुर में चप्पलियाए गए थे मथुरा: रामवृक्ष यादव के गुंडों ने SP-SHO को मार डाला, कुल 22 की मौत

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