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  • Match report of India vs West Indies match played at Wankhede Mumbai. India lost by 7 wickets in semifinal of T-20 world cup 2016

नो बॉल ने हराया इंडिया को

सेमी फाइनल से इंडिया बाहर हो चुका है. वेस्ट इंडीज़ के हाथों. जिसने हराया वो दो बार आउट हो चुका था. लेकिन दोनों बार नो बॉल थी. रिपोर्ट पढ़ो.

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केतन बुकरैत
1 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 31 मार्च 2016, 03:31 AM IST)
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मुंबई. वानखेड़े स्टेडियम. वही स्टेडियम जिसपे 2011 का वर्ल्ड कप जीता था. इंडिया को पहले बैटिंग करने को कहा गया. एक चौथाई मैच वेस्ट इंडीज़ ने यहीं जीत लिया था. वानखेड़े की पिच हमेशा चेजिंग के लिए मुफ़ीद रही है. मैदान पर ओस पड़ती है. स्पिनर्स को दिक्कत होती है. वर्ल्ड कप में स्पिनर्स के दम पर आधा गेम खेलती थी टीम इंडिया. यहां ये दांव उल्टा पड़ने वाला था. टूर्नामेंट में चुप्पी पकड़े हुए धवन को बिठा दिया गया. उनकी जगह आये अजिंक्य रहाने. पहले दो ओवर सन्नाटे में निकलने के बाद रोहित
Ind Vs WI
शर्मा किसी जिद्दी लड़के की माफ़िक बॉलर्स पर पिल पड़े. पॉवरप्ले में 55 रन आये. 3 से 6 ओवर में 54. इसमें रोहित शर्मा आगे थे. 31 गेंद पे 43 रन बनाकर आउट हुए. 3 छक्के मारे. यहां तक इंडिया खुद को सम्हालता हुआ दिख रहा था. कोहली के आने पर लोगों की आशाएं चरम पर थीं लेकिन नौवें ओवर की तीसरी गेंद पर उनके रन आउट के दो मौके छूटे. कोहली कुछ हड़बड़ी में तो कुछ घबराये से लग रहे थे. लेकिन ऐसा उन्हें बिलकुल भी नहीं लग रहा था. रहाने से बात की, सब कुछ समझाया, और जुट गए रन बनाने में. धीमी शुरुआत के साथ रन बनाते हुए रहाने और कोहली ने 66 रनों की पार्टनरशिप की. 51 गेंद में. रहाने ने इंडिया को वो दिलाया जिसके लिए टीम पूरे वर्ल्ड कप तरस रही थी. दोनों ओपनर्स रन बना के आउट हुए. कोहली का भार किसी ने शेयर किया. रहाने के आउट होने पर धोनी का आना कुछ अजीब ज़रूर लगा लेकिन वो सही डिसीज़न साबित हुआ. उस जगह ऐसा लग रहा था कि तेज़ रन बनाने की खातिर पांड्या को भेजा जाएगा. लेकिन धोनी ने आकर रन बनाने की जगह रन चुराने का खेल खेलना शुरू किया. धोनी और कोहली ने जिस तरह से अपनी रनिंग बिटवीन द विकेट्स के दम पर रन बनाये उसके लिए जितना भी कहा जाए कम ही रहेगा. धोनी को बुड्ढा कहने वाले कल मुंह छुपाने की जगह ज़रूर ही ढूंढ रहे होंगे. विराट कोहली की 89 रन की पारी में मात्र 1 छक्का शामिल था. और गेंदें खेलीं थीं उन्होंने 47. 190 का स्ट्राइक रेट. ये अपने आप में सब कुछ कह जाता है. रन बाउंड्रीज़ से कम और दौड़ कर ज़्यादा बनाये गए थे. कोहली अपने गेम ही नहीं अपनी फिटनेस के दम पर भी वेस्ट इंडीज़ को पिछाड़ते दिख रहे थे. सिंगल, डबल में बदल रहे थे. धोनी पूरी तरह से उनका साथ दे रहे थे. स्कोर बना 192 का.
Ind Vs WI Kohli
जीत के लिए ज़रूरी 193 रन देखकर एक बार को डैरेन समी डरे ज़रूर होंगे. उनके फेवर में सिर्फ़ दो ही चीज़ें थीं - वानखेड़े की चेजिंग का इतिहास और क्रिस गेल. वो पूरे टूर्नामेंट में गेल के बारे में बात कर रहे थे. वो क्या, हर कोई वेस्ट इंडीज़ का नाम आते ही क्रिस गेल का नाम लेता है. लेकिन इनिंग्स की सातवीं गेंद और गेल अपना ऑफ स्टम्प उड़वा बैठे. बुमराह की मैच की पहली ही गेंद. लो-फुलटॉस, सीधे स्टम्प पर और स्टम्प की लाल बत्तियां चमक उठीं. बुमराह कुछ फुट हवा में उछल गए. इंडिया ने 1 तिहाई मैच जीत ही लिया था.
Ind Vs WI
छक्के पे छक्के लगाने वाला बैट्समैन एक भी बाउंड्री ठोंके बिना वापस जा रहा था. तीसरे ओवर की आखिरी गेंद पर मार्लोन सैमुएल्स भी चलते बने. आशीष नेहरा ने उन्हें निपटाया. आशीष नेहरा जिनकी टूर्नामेंट की इकॉनमी 6 के नीचे चल रही है. इंडिया की जीत दो तिहाई हो चली थी. अब पिच पे थे जॉनसन चार्ल्स जिन्हें इंडिया में कदम रक्खे ही दो दिन हुआ था, और लेंडल सिमंस. इन दोनों ने तीसरे ओवर से लेकर चौदहवें ओवर तक हर ओवर में एक बाउंड्री मारनी शुरू की. चार्ल्स को आउट किया कोहली ने. पहली ही गेंद पे.
Ind VS WI Kohli
कोहली के ओवर में सिर्फ़ 4 रन आये. कोहली सचमुच ऐसे माहौल में थे कि वो मैदान पर कुछ भी ग़लत कर ही नहीं सकते थे. लेकिन पांड्या का अगला ओवर काफ़ी भारी पड़ गया. उस ओवर में आये 18 रन और आखिरी पांच ओवर में 55 रन का टार्गेट आ गया.
Ind Vs Wi
इंडीज़ के चौड़े बैट्समेन अपनी पावरफुल हिटिंग के लिए जाने जाते हैं. गेंद भले ही बल्ले के बीच में न आये, लेकिन हाथों की ताकत उसे बाउंड्री पार भेजने के लिए बहुत होती है. बस इसी सूत्र के दम पर अगले पांच ओवेरों में इंडिया को वर्ल्ड कप से बाहर निकालने की स्क्रिप्ट लिख डाली गयी. ऐसा नहीं है कि वेस्ट इंडीज़ ने टीम इंडिया को मौके ही नहीं दिए. सातवें ओवर में अश्विन ने सिमंस को शार्ट थर्ड मैन पर कैच करवाया लेकिन रीप्ले में मालूम चला कि वो नो-बॉल थी. हार्दिक पांड्या ने दोबारा सिमंस को पन्द्रहवें ओवर में एक्स्ट्रा कवर पर कैच करवाया लेकिन वो भी नो बॉल ही थी. ऐसा लग रहा था इंडिया वेस्ट इंडीज़ से नहीं नो-बॉल से हार रही थी. इसके बाद भी बुमराह ने 18वें ओवर में तीन गेंदें डॉट फेंकी. तीनों बेहतरीन स्लोवर गेंदें. वेस्ट इंडीज़ को चाहिए थे 14 पे 32. मैच फंसता हुआ दिख रहा था. लेकिन अगली गेंद लेंथ पे गिरी और उसे लेग साइड में भेज दिया गया. जडेजा ने रिले कैच में गेंद कोहली की और फेंकी और कोहली ने कैच भी कर ली. लेकिन रीप्ले में मालूम चला कि जडेजा ने कैच लेते हुए बाउंड्री पर पैर रख दिया था. इंडिया के पास कई सवालों के जवाब देने थे. मेन सवाल था - इतनी नो बॉल क्यूं? और दूसरा ये कि दोनों नॉकआउट मैचों में आश्विन को मात्र दो-दो ओवर क्यूं? जब मालूम था कि ओस स्पिनर्स के लिए दिक्कत करेगी, तो क्यूं नहीं कोहली को पहले ही गेंद दे दी गयी? मगर हां दोनों टीमों में जिसकी ज़्यादा 'ताकतवर' बैटिंग थी, वो टीम ही जीती. हालांकि कोहली मैदान पर सभी लॉजिकों के उलट अपना गेम खेल रहे थे. वो एक ऐसी ताकत थे जिसे रोकने को किसी टीम के पास कोई जुगाड़ नहीं था. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ 82 स्पेशल था लेकिन वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ़ 89 और भी ज़्यादा कमाल की इनिंग्स थी क्यूंकि शुरूआती हड़बड़ी के बाद उन्होंने खुद को संभालते हुए बैटिंग करी थी.
Kohli
कोहली पिछले दो मैचों में नॉट-आउट रहे हैं. इसका मतलब ये है कि इस वर्ल्ड कप में कोहली का एवरेज है 136.5. 1 छक्के के बाद भी 190 का स्ट्राइक रेट फिटनेस का गवाह है. कोहली मैदान पर जब उतरे थे उस वक़्त उनके टोटल रन, टीम इंडिया के टॉप 5 प्लेयर्स के मिले हुए रनों से ज़्यादा थे.

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