मणिपुर में दो छात्रों की हत्या का 'मास्टरमाइंड' पकड़ा गया, CBI ने नाम बताया
25 सितबंर को मणिपुर में दो छात्रों की हत्या के बाद राज्य में भारी बवाल मचा था. जुलाई में उनका अपहरण किया गया था. इसके बाद उनकी हत्या की तस्वीरें सामने आई थीं.

मणिपुर में दो छात्रों के अपहरण के बाद हत्या के मामले में पुलिस ने एक मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है. बीते सितंबर महीने में ही सामने आए इस मामले के चलते मणिपुर में बड़ा बवाल देखने को मिला था. सरकार ने इसकी जांच CBI को सौंप दी थी. अब एजेंसी ने इस केस के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार करने का दावा किया है. 22 साल के आरोपी पाओलुनमांग को CBI ने महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ्तार किया.
CBI की एक विशेष जांच टीम ने पाओलुनमांग को 11 अक्टूबर को पुणे से गिरफ्तार किया जिसकी खबर अब सामने आई है. पुलिस उसे अदालत में पेश करने के लिए गुवाहाटी ले गई. विशेष अदालत ने उसे 16 अक्टूबर तक CBI हिरासत में भेज दिया है. इससे पहले इस मामले में केंद्रीय एजेंसी ने पाओमिनलुन हाओकिप और स्मालसॉम हाओकिप के साथ दो महिलाओं ल्हिंगनेइचोंग बैतेकुकी और टिननेइलिंग हेंथांग को गिरफ्तार किया था.
दरअसल ये घटना जुलाई महीने में हुई. तब मणिपुर के दो छात्र, 17 साल की हिजाम लिनथोइंगंबी और 20 साल के फिजाम हेमजीत, अचानक लापता हो गए थे. इसके बाद उनकी हत्या कर दी गई. 25 सितंबर को उनकी तस्वीर जारी की गई. इसमें दोनों मृत अवस्था में दिखाई दिए. इससे साफ हुआ कि दोनों छात्रों की हत्या कर दी गई है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामले की दो तस्वीरें सामने आईं. पहली तस्वीर में दोनों किसी जंगल में बैठे दिखाई दे रहे थे. इसमें हिजाम लिनथोइंगंबी ने सफेद टी-शर्ट और हेमजीत ने चेक शर्ट पहन रखी थी. तस्वीर में बंदूक लिए हुए दो आदमी भी नजर आ रहे थे.
जबकि दूसरी तस्वीर में किसी जंगल में दोनों के शव जमीन पर गिरे हुए दिखाई दे रहे हैं. हालांकि, ये तस्वीर किस इलाके की है, ये साफ नहीं हो पाया. इससे पहले जुलाई में दोनों बच्चे दुकानों पर लगे CCTV कैमरों में दिखे थे, लेकिन बाद में वो गायब हो गए और उनका पता नहीं चल सका.
घटना के संबंध में मणिपुर सरकार ने एक बयान जारी किया था. कहा गया कि मामला सामने आने के बाद ही इसे तुरंत CBI को सौंप दिया गया है.
मणिपुर में हिंसामणिपुर में 5 महीने से ज्यादा वक्त से कुकी और मैतई समुदायों के बीच संघर्ष चल रहा है. यहां आर्थिक लाभ और अनुसूचित जनजातियों को मिलने वाले आरक्षण को लेकर आदिवासी समूहों और बहुसंख्यक मैतई समुदाय के बीच असहमति के चलते हिंसा शुरू हुई थी, जो अब तक खत्म नहीं हुई है. रह रह कर हिंसा भड़कने की तस्वीरें उत्तरपूर्वी राज्य से आती रहती हैं.
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