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एक की गलती और फिर भेड़चाल किस तरह दिक्कत पैदा कर देती है

दिल्ली की सड़कों पर अमेरिका के कायदे-कानून.

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अनिमेष
25 नवंबर 2016 (अपडेटेड: 24 दिसंबर 2016, 09:21 AM IST)
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दुनिया अभी काले धन की सर्जिकल स्ट्राइक और बैंक की लाइन से उबर भी नहीं पाई है. दिल्ली के लोगों ने बीती रात ट्रैफिक के नियमों पर ही सर्जिकल स्ट्राइक कर दी. 24 नवम्बर की रात दिल्ली के छतरपुर मेट्रो स्टेशन से लेकर फोर्टिस अस्पताल तक की 1 किलोमीटर की सड़क पर सभी गाड़ियां अमरीका के ट्रैफिक नियमों की तर्ज पर राइट साइड में चलने लगीं. मेट्रो से उतरी जनता और एअरपोर्ट से आ रही गाड़ियां काफी देर तक तो समझ ही नहीं पाईं कि आखिर नई दिल्ली को न्यूयॉर्क बनाने का ये फैसला कब हो गया.
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दरअसल हुआ ये था कि सड़क के बाईं तरफ कुछ देर के लिए ट्रैफिक धीमा हुआ और इसी समय किसी चौपहियाधारी दिल्लीवासी ने अपनी कार सड़क पर गलत तरफ घुमा दी. देश के लिए लाइन में लगने वाली जनता ने भी तुरंत इस फैसले का समर्थन करते हुए उस इन्नोवेटिव आदमी के पीछे चलना शुरू कर दिया. बस, ऑटो, मोटरसाइकिल, रिक्शा सभी वाहन वर्ग-भेद भूल कर लोकतंत्र में जनता की शक्ति को दिखाते हुए एक के पीछे एक चलने लगे. दिल्ली की सड़कों को अमरीका बनाने की चाहत में जनता इतनी उत्साहित थी कि दूसरी तरफ की सड़क खाली थी तब भी गाड़ियां गलत तरफ ही चलती रहीं. हालांकि जिन्होंने गलती की, वो इसे गलती नहीं मानेंगे क्योंकि आज की तारीख में तो 'खाता न बही जो पब्लिक कहे वही सही.' एक घंटे तक चले इस नियम उल्लंघन को उसके बाद उसी सड़क पर जेएनयू की तरफ से आने वाले लोगों ने वापस पहले जैसा कर दिया. ये जेएनयू की दिशा है ही ऐसी कि देश में कुछ भी अच्छा होने की बात हो, वाम दिशा वाले लोग उस पर राजनीति करने लगते हैं. और हां, राजनीति से याद आया कि दिल्ली के पॉश समझे जाने वाले इलाके में हुई इस बहुतै क्रांतिकारी घटना की गवाह दिल्ली पुलिस नहीं बनी. ‘आप’ जानते हैं न कि इस काफिले में कोई आम विधायक नहीं था न. देश को बदलने की कोशिश कर रही जनता को रोकने का प्रयास करने के लिए किसी ट्रैफिक पुलिस, पीसीआर का न आना भी एक तरह का सर्जिकल स्ट्राइक माना जाना चाहिए. तो खुश रहिए, देश बदल रहा है कतारों में लग रहा है, कतारें बना रहा है.

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