पहली बार किसी सैनिक के पिता की बात सुनकर लगा कि कोई मरा भी है, 'शहीद' नहीं हुआ
शहीद या कुछ भी और होने से पहले सैनिक इंसान होते हैं. उनके मरने पर गर्व नहीं, शोक होना चाहिए.
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सिपाही जसगीर सिंह के पिता का बयान बहुत कातर है. किसी के मरने पर गर्व जताना स्वाभाविक नहीं लगता. मौत के साथ शोक स्वाभाविक लगता है.
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