व्हेल के पेट से ये क्या निकला?
कुछ और होता तो हम ज़्यादा से ज़्यादा अफ़सोस कर लेते, लेकिन अब चिंता होने लगी है.
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फिलीपींस में व्हेल के पेट से 40 किलो पॉलीथिन मिला (तस्वीर साभार: डीबोन कलेक्टर म्यूज़ियम)
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आज अगर आपसे कोई सवाल पूछे कि दुनिया में सबसे बड़ा खतरा क्या है? आप कहेंगे आतंक. कोई कहेगा नॉर्थ कोरिया. कोई कहेगा वर्ल्ड वॉर थ्री न हो जाए. लेकिन दिमाग पर थोड़ा स्ट्रेस डालेंगे तो समझ में आएगा कि आज की तारीख में लोगों को सबसे ज्यादा खतरा ग्लोबल वॉर्मिंग से है. ग्लोबल वॉर्मिंग पर आज पूरी दुनिया बात कर रही है. इससे निबटने की प्लानिंग कर रही है, लेकिन धरातल पर कुछ खास बदलाव होता नहीं दिखता है. ग्लोबल वॉर्मिंग का सीधा कनेक्शन पॉलीथिन से होता है. दुनिया के कई देश इसे बैन तो करने की बात करते हैं. लेकिन ऐसा हो नहीं पाता है. आज ग्लोबल वॉर्मिंग के पीछे पॉलीथिन का भी बड़ा हाथ है.
लेकिन हम इतना ज्ञान क्यों दे रहे हैं? क्यूंकि फिलीपींस से कुछ तस्वीरें आई हैं, जो वाकई में परेशान करती है.
दरअसल वहां पॉलीथिन की वजह से एक व्हेल मछली की मौत हो गई. जब उसे पानी से बाहर निकाला गया, और उसकी जांच की गई तो पता चला उसकी मौत ‘गैस्ट्रीक शॉक’ की वजह से हुई, और उसके पेट से 40 किलो पॉलीथिन मिले.
फिलीपींस के डवाओ सिटी में ‘डीबोन कलेक्टर’ नाम का म्यूज़ियम है, जो जानवरों के स्केलेटन का शोकेस करते हैं. इसी म्यूज़ियम से जुड़े मरीन बायोलोजिस्ट को समुद्र में एक मरी हुई व्हेल मछली मिली. मछली को बाहर निकालकर उसकी अटॉप्सी की गई. जिसमें व्हेल के पेट से 40 किलो पॉलीथिन बरामद हुए. जिसमें खाली बोरियों के साथ कई शॉपिंग बैग और दूसरे तरह के पॉलीथिन मिले. म्यूजियम ने अपने फेसबुक पेज पर इस घटना की पूरी जानकारी शेयर की है.
पिछले साल जून में ही साउथ थाईलैंड में प्लास्टिक की वजह से एक व्हेल की मौत हुई थी. जांच करने पर उसके पेट के 80 प्लास्टिक के बैग मिले थे. जो करीब 18 किलो के थे. मरीन बायोलोजिस्ट के मुताबिक थाईलैंड में हर साल 300 के करीब समुद्री जीव की जान सिर्फ प्लास्टिक की वजह से ही जाती है.

पिछले साल जून में थाईलैंड में एक व्हेल मछली की पेट से 80 प्लास्टिक के बैग मिले थे (तस्वीर साभार: डीबोन कलेक्टर म्यूज़ियम)
इसके बाद गाहे-बगाहे कई देशों ने पॉलीथिन बैन करने की बात भी की. भारत में भी कई राज्यों में पॉलीथिन बैन कर दिया गया है. लेकिन हर बार इसका कुछ न कुछ ऑल्टरनेटिव निकाल कर लोग पॉलीथिन का इस्तेमाल कर ही लेते हैं. अब आप खुद ही अपने आस-पास देख लीजिए. सुबह-सुबह जब मॉर्निंग वॉक पर जाते हैं तो लौटते वक्त दूध की थैली उठा लेते हैं. फिर दूध की थैली के साथ फूल, फल, सब्जी कई चीज़ें उठा लेते हैं. ये सभी सामान पन्नी में ही आते हैं. नज़र दौड़ाएंगे तो घर के ऐसे कई सामान पर नज़र पड़ेगी जिसका सीधा सरोकार पॉलीथिन से ही होता है.
आज दुनिया भर के लोग पॉलीथिन के खतरे से वाकीफ हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल बंद नहीं कर रहे. लोगों की इसी ज़िद का खामियाजा बेजुबानों को किस तरह से उठाना पड़ रहा है. फिलीपींस से आई तस्वीर से समझ में आ गई होगी.
लेकिन हम इतना ज्ञान क्यों दे रहे हैं? क्यूंकि फिलीपींस से कुछ तस्वीरें आई हैं, जो वाकई में परेशान करती है.
दरअसल वहां पॉलीथिन की वजह से एक व्हेल मछली की मौत हो गई. जब उसे पानी से बाहर निकाला गया, और उसकी जांच की गई तो पता चला उसकी मौत ‘गैस्ट्रीक शॉक’ की वजह से हुई, और उसके पेट से 40 किलो पॉलीथिन मिले.
फिलीपींस के डवाओ सिटी में ‘डीबोन कलेक्टर’ नाम का म्यूज़ियम है, जो जानवरों के स्केलेटन का शोकेस करते हैं. इसी म्यूज़ियम से जुड़े मरीन बायोलोजिस्ट को समुद्र में एक मरी हुई व्हेल मछली मिली. मछली को बाहर निकालकर उसकी अटॉप्सी की गई. जिसमें व्हेल के पेट से 40 किलो पॉलीथिन बरामद हुए. जिसमें खाली बोरियों के साथ कई शॉपिंग बैग और दूसरे तरह के पॉलीथिन मिले. म्यूजियम ने अपने फेसबुक पेज पर इस घटना की पूरी जानकारी शेयर की है.
एक कम उम्र की व्हेल मछली की बॉडी 16 मार्च 2019 को रिकवर की गई. व्हेल मछली की पेट से 40 किलो प्लास्टिक बैग, 16 चावल की बोरियां, कई शॉपिंग बैग बरामद की गई. प्लास्टिक सामान की पूरी जानकारी अगले कुछ दिनों में दे दी जाएगी. इस व्हेल के पेट से जितनी प्लास्टिक मिली है, इतनी प्लास्टिस कभी किसी व्हेल के पेट में नहीं मिली. ये बहुत ही वाहियात है. सरकार को इसके खिलाफ कुछ करनी चाहिए. उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए जो समुद्र को कूड़ादान समझे हैं.व्हेल की अटॉप्सी की तस्वीरें विचलित करने के साथ-साथ परेशान भी करती हैं. व्हेल की अटॉप्सी करने वाले मरीन बायोलोजिस्ट डैरेल ब्लैचली ने कहा-
मैं 10 साल से मरी हुई व्हेल और डॉलफिंस की जांच कर रहा हूं. जितनों की मौत हुई हैं उनमें से 57 व्हेल मछली की मौत सिर्फ प्लास्टिक की वजह से ही हुई.मरीन बायोलोजिस्ट के मुताबिक ज्यादार व्हेल के पेट से से सिंगल यूज़ पॉलीथिन ही मिले हैं. ओशियन कंज़रवेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक सिंगल यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल ज्यादार साउथ-ईस्ट एशिया में ही होता है. ओशियन कंज़रवेंसी की 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक चीन, इंडोनेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड और वियतनाम ही वो देश हैं, जो पूरी दुनिया की मुकाबले समुद्र में ज्यादा प्लास्टिक डंप कर रहे हैं.
पिछले साल जून में ही साउथ थाईलैंड में प्लास्टिक की वजह से एक व्हेल की मौत हुई थी. जांच करने पर उसके पेट के 80 प्लास्टिक के बैग मिले थे. जो करीब 18 किलो के थे. मरीन बायोलोजिस्ट के मुताबिक थाईलैंड में हर साल 300 के करीब समुद्री जीव की जान सिर्फ प्लास्टिक की वजह से ही जाती है.

पिछले साल जून में थाईलैंड में एक व्हेल मछली की पेट से 80 प्लास्टिक के बैग मिले थे (तस्वीर साभार: डीबोन कलेक्टर म्यूज़ियम)
इसके बाद गाहे-बगाहे कई देशों ने पॉलीथिन बैन करने की बात भी की. भारत में भी कई राज्यों में पॉलीथिन बैन कर दिया गया है. लेकिन हर बार इसका कुछ न कुछ ऑल्टरनेटिव निकाल कर लोग पॉलीथिन का इस्तेमाल कर ही लेते हैं. अब आप खुद ही अपने आस-पास देख लीजिए. सुबह-सुबह जब मॉर्निंग वॉक पर जाते हैं तो लौटते वक्त दूध की थैली उठा लेते हैं. फिर दूध की थैली के साथ फूल, फल, सब्जी कई चीज़ें उठा लेते हैं. ये सभी सामान पन्नी में ही आते हैं. नज़र दौड़ाएंगे तो घर के ऐसे कई सामान पर नज़र पड़ेगी जिसका सीधा सरोकार पॉलीथिन से ही होता है.
आज दुनिया भर के लोग पॉलीथिन के खतरे से वाकीफ हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल बंद नहीं कर रहे. लोगों की इसी ज़िद का खामियाजा बेजुबानों को किस तरह से उठाना पड़ रहा है. फिलीपींस से आई तस्वीर से समझ में आ गई होगी.

