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साइंस को लात मारके इन्होंने केवल लड़का पैदा करने का तरीका खोज निकाला

ये लोग आज के जमाने के डिजिटल नीम-हकीम, ओझा हैं, जो बता रहे हैं लड़का पाने के टिप्स.

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16 दिसंबर 2016 (अपडेटेड: 16 दिसंबर 2016, 01:47 PM IST)
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हमारे यहां दादा-दादी की ख्वाहिश पोते का मुंह देखने की होती है. ताने मारते हैं बहू-बेटे को. लड़के की चाह इस समाज की नेशनल चाह है. बहुत से फैक्टर काम करते हैं इसके लिए. दहेज़ से लेकर वंश बढ़ाने तक. लड़की को कोख में मार देने की बात अब पुरानी हो गई है. पेट में बच्चे का सेक्स पता करना अब पुराना क्राइम हो गया है. 'नया समय' है, 21वीं सदी है तो 'लड़का' पाने के तरीके भी नए होने चाहिए. इसके लिए डिजिटल नीम-हकीम, ओझा मार्केट में हैं. पुत्र जीवक बीज की भी जरूरत नहीं होगी. लड़का चाहने वालों को एक अखबार की वेबसाइट कुछ टिप्स बता रही है. इनके हिसाब से इन टिप्स से केवल लड़के पैदा होंगे. यानी आपका कंट्रोल स्पर्म के क्रोमोज़ोम पर होगा. इस बात का ख़ास ख्याल रखा गया है कि ये टिप्स मर्दों को ही दिए जाएं, क्योंकि बच्चा पैदा करने में उनकी ही 'बड़ी भूमिका' होती है. एक मलयालम अखबार है, मंगलम. इसने लड़का पाने के लिए ''वैज्ञानिक तरीके'' बताए हैं. ये लिस्टिकल्स भी इन्टरनेटिया समाज की बड़ी खोज और बड़ी मौलिक बीमारी है. सब कुछ पॉइंट्स में जल्दी-जल्दी पढ़ने की बीमारी. हर चीज के लिए 10 टिप्स या 20 टिप्स बताने वालों की इन्टरनेट पे बाढ़ है. इनके पास हर चीज के नुस्खे हैं. ये बेसिकली दादी नानी के नुस्खों के मॉडर्न वर्जन हैं.
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अच्छा एक और बात, अपनी हर अंट-शंट बात को मनवाना हो तो विज्ञान को बीच में ले आओ. व्हाट्सऐप पर ये हथियार खूब अपनाया जाता है. 'फलाने के अनुसार' इस हथियार का बटन है. इसे दबाते ही अगले की तर्क-शक्ति जवाब दे जाती है. वो कभी चेक नहीं करते कि 'फलाने' ने ऐसा कहा भी है या नहीं. तो अब मुद्दे की बात. वेबसाइट ने नीम हकीमों से एक कदम आगे बढ़ते हुए सिर्फ मर्दाना ताकत बढ़ाने की बात नहीं की है बल्कि ये भी बता दिया है कि पहले से कैसे तय करें कि आपको संतान सुख में 'लड़का' ही मिले. ये भी बता दें कि इस टिप्स बाजार में ये अकेले नहीं हैं. दूसरे भी उन्हें कम्पटीशन दे रहे हैं. पहले लड़का पाने के लिए इस मलयालम अखबार की टिप्स जान लो-
पहली बात, हफ्ते में कुछ ख़ास दिन स्पर्म ज्यादा मजबूत होते हैं. इन्होंने पता लगा लिया है कि वो दिन 1, 3, 5 और 7 हैं. किस माइक्रोस्कोप से उन्होंने ये पता लगाया, ये नहीं बताया. दूसरी बात, आंधी आए या तूफ़ान सुबह का नाश्ता नहीं छोड़ना है. हल्के में मत लेना, इसके आगे भी उन्होंने 'वैज्ञानिक तरीका' जोड़ा है. औरतों को मटन, सूखे अंगूर और ज्यादा नमक वाला खाना खाना है. तीसरी बात, मर्द को दारू वगैरह और एसिडिक चीजों से कोसों दूर रहना चाहिए. इससे क्या होता है कि Y क्रोमोज़ोम मजबूत होते हैं. लड़का प्राप्ति में बाधा नहीं होती. और अंत में सबसे ज़रूरी टिप, इसे मिस किया तो लड़का मिस हो जाएगा. मां को अपना सिर पश्चिम की तरफ करके सोना चाहिए. क्यों? लॉजिक क्या है? उन्होंने बता दिया तो बता दिया. सवाल नहीं ज्यादा.
अब दूसरे डिजिटल नीम-हकीमों का हाल देखिए. दूसरी कई साइट में भी इस तरह की टिप्स दी गई हैं. जैसे इन्हें देखिए- ये कह रहे हैं, अगर ढीली अंडरवियर पहनी जाए तो ये मेल स्पर्म के लिए अच्छा है. मेल स्पर्म के लिए कम टेम्परेचर चाहिए होता है. इनकी हेडिंग देखिए. How to conceive A 'Boy'.
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दूसरे नमूनों को देखिए. इन्होने अपने टिप्स का टाइटल दिया है, For a 'Boy'. इनका कहना है, लड़का पाने के लिए चॉकलेट खूब खाना चाहिए. वजन बढ़ाना चाहिए, क्योंकि कम वजन से 'बेबी गर्ल' के होने का ख़तरा होता है.
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काम-सूत्र से भी टिप्स उधार लिया है.
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एक और टिप्स में ये औरतों को सलाह दे रहे हैं कि पहले उन्हें कैफीन पिलाएं. इससे Y-स्पर्म ज्यादा एक्टिव हो जाता है.
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क्या ये बातें सच हैं? इस तरह की बातें उन लोगों के लिए हैं जो दसवीं में रिप्रोडक्शन वाला चैप्टर आने पर कूदकर आगे बढ़ जाते हैं. पढ़ते कम हैं, मजे ज्यादा लेते हैं. ये लोग इन वेबसाइट्स की बातों पर यकीन भी करते हैं. सच्चाई ये है कि किसी भी तरीके से स्पर्म के क्रोमोज़ोम को कंट्रोल नहीं किया जा सकता. असल में लड़का या लड़की का पैदा होना सेक्स-सेल पर निर्भर होता है. फीमेल सेक्स-सेल में XX क्रोमोज़ोम होते हैं जबकि मेल सेक्स-सेल में XY क्रोमोसोम. सेक्स के दौरान जब मेल का Y क्रोमोज़ोम फीमेल के X क्रोमोज़ोम से मिलता है तो लड़का पैदा होता है. मेल का X क्रोमोज़ोम जब फीमेल के X क्रोमोज़ोम से मिलता है, तो लड़की पैदा होती है. इस डायग्राम को देखो-
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तो इसीलिए ऊपर कैफीन से Y क्रोमोज़ोम की क्षमता बढ़ाने की बात की जा रही है. इससे वो किसी भी फीमेल क्रोमोज़ोम से मिले, अंत में XY ही बनाएगा और इसका मतलब है, लड़का.
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इस तरह की भ्रम फैलाने वाली साइट्स से दूर रहें तो बेहतर. कायदे से तो पहले दसवीं का रिप्रोडक्शन वाला चैप्टर पढ़ लें. इन मॉडर्न नीम-हकीमों को बिल्कुल भी गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए, जो सिर्फ 'लड़का' पैदा करने की टिप्स बताते हैं. देश का सेक्स रेशियो पहले ही कम है. सरकारें बेटी बचाने की बात कर रही हैं. जेंडर इक्वैलिटी की बातें होती हैं. ऐसे में इस तरह के झूठ फैलाना भी नए तरीके का अपराध ही है.

ये स्टोरी निशांत ने की है.

 

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