The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Manipur Internet Suspended for 5 days after Violence erupts due to demand of a Bill

'सांप्रदायिक तनाव की स्थिति', मणिपुर में पांच दिन के लिए इंटरनेट बैन, दो जिलों में धारा 144 लगी

एक बिल को लेकर मणिपुर में हुआ बवाल. अधिकारियों ने कहा कि असामाजिक तत्व सोशल मीडिया के जरिए हेट स्पीच फैला रहे थे.

Advertisement
pic
7 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 7 अगस्त 2022, 02:35 PM IST)
Manipur violence internet Suspended
Manipur में हालात तनावपूर्ण हो गए. (फोटो: सोशल मीडिया)
Quick AI Highlights
Click here to view more

मणिपुर (Manipur) में एक बिल को लेकर विवाद हुआ और पूरे राज्य में इंटरनेट सेवाओं पर रोक (Internet Ban) लगा दी गई. राज्य में पांच दिनों के लिए मोबाइल डेटा सर्विस को सस्पेंड करने का आदेश जारी हुआ है. ये आदेश स्पेशल सेक्रेटरी (होम) एच ज्ञान प्रकाश ने शनिवार, 6 अगस्त को जारी किया. सोशल मीडिया पर फैल रहे नफरती संदेशों के प्रचार-प्रसार को रोकने के लिए इंटरनेट बैन किया गया है, जिसके कारण राज्य में हिंसा भड़क रही थी.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 6 अगस्त शाम को बिष्णुपुर जिले से हिंसा की घटना सामने आई थी. जिले के एसपी ने बताया कि 3-4 लोगों ने एक गाड़ी को आग के हवाले कर दिया. उनके मुताबिक, घटना फूगाक्चाओ इखांग (Phougakchao Ikhang) की है.

आदेश की कॉपी में कहा गया है कि इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैल रहा है. कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया के जरिए हेट स्पीच फैला रहे हैं और लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं.

वहीं, बिष्णुपुर के जिलाधिकारी ने भी हालात को देखते हुए इलाके में धारा 144 लगाने के आदेश दिए हैं. इसके तहत, बिष्णुपुर और चुराचंदपुर में दो महीने के लिए (जिसकी अवधि शनिवार शाम से शुरू हो रही है) धारा 144 लागू रहेगी.

Manipur में हिंसा क्यों?

इस सब की शुरुआत हुई शुक्रवार, 5 अगस्त की सुबह से. जब ऑल ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन मणिपुर (ATSUM) ने राज्य के नेशनल हाईवे और उसके आसपास आर्थिक नाकेबंदी शुरू कर दी. इस छात्र संगठन की मांग है कि विधानसभा में मणिपुर (हिल एरिया) ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल बिल 2021 पेश किया जाए.

इस नाकेबंदी के जवाब में, शुक्रवार की दोपहर घाटी के संगठन मैतेई लीपन ने इंफाल स्थित ATSUM के ऑफिस को बंद कर दिया. उनकी तरफ से ये आरोप था कि आर्थिक नाकेबंदी से राज्य के घाटी इलाकों को निशाना बनाया जा रहा है.

दूसरी तरफ,  ATSUM की मांग है कि बिल को मानसून सत्र में ही पेश किया जाए, जिससे राज्य के घाटी क्षेत्रों की तरह पहाड़ी क्षेत्रों में भी विकास सुनिश्चित हो सके.

इससे पहले मंगलवार, 2 अगस्त को एन बीरेन सिंह की सरकार ने विधानसभा में दो बिल पेश किए. मणिपुर (हिल एरिया) डिस्ट्रिक काउंसिल 6th और 7th अमेंडमेंट बिल. लेकिन, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ये दोनों बिल उनकी मांग में शामिल नहीं थे.

छात्र संगठनों का आरोप है कि बिना किसी पूर्वसूचना के ये दोनों बिल पेश किए गए थे. इसी के बाद से उन्होंने आदिवासी-बहुल पहाड़ियों कांगपोक्पी और सेनापति में पूरी तरह नाकेबंदी कर दी.

वीडियो- RPF से जुड़े मणिपुर के पांच उग्रवादियों को म्यांमार ने भारत को सौंपने

Advertisement

Advertisement

()