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बीरेन सिंह के खिलाफ रैली में शामिल हुए थे मिजोरम के CM, मणिपुर CM ने ऐसा जवाब दिया है

एन बीरेन सिंह ने कहा कि मिजोरम के मुख्यमंत्री दूसरे राज्य के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप नहीं करें.

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27 जुलाई 2023 (अपडेटेड: 27 जुलाई 2023, 01:16 PM IST)
Manipur CM said not to interfere on internal matters to Mizoram CM Zoramthanga.
मणिपुर के मुख्यमंत्री ने अपने पड़ोसी राज्य मिज़ोरम को क्यों सुनाई खरी-खोटी?(फोटो क्रेडिट - ट्विटर)
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मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह (N Biren Singh) ने मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथंगा को नसीहत दी है. उन्होंने कहा कि जोरमथंगा दूसरे राज्य के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप नहीं करें. मिजोरम के मुख्यमंत्री राजधानी आइजोल में 25 जुलाई को हुई एकजुटता मार्च में शामिल हुए थे. ये मार्च मणिपुर के कुकी-जोमी समुदायों के समर्थन में निकाला गया था.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब मणिपुर के मुख्यमंत्री ने इसका जवाब दिया है. एन बीरेन सिंह ने ये भी कहा कि वे अपने राज्य से अवैध शरणार्थियों की पहचान करेंगे. और उन्हें राज्य से बाहर निकालेंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि मणिपुर सरकार किसी भी धमकी के आगे झुकने वाली नहीं है.

‘ड्रग कार्टेल की वजह से शुरू हुई हिंसा’

मुख्यमंत्री बीरेन सिंह 26 जुलाई को कारगिल दिवस के मौके पर अपनी बात रख रहे थे. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर तरह से अवैध प्रवासियों के खिलाफ है. वो लंबे समय से राज्य में रह रहे कुकी समुदाय के खिलाफ नहीं हैं. मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य में हुई हिंसा उन लोगों के कारण है, जो मणिपुर में शांति व्यवस्था नहीं रहने देना चाहते. उन्होंने कहा,

"ये समस्या सरकार के अवैध ड्रग कार्टेल के खिलाफ कार्रवाई करने से हुई है. लेकिन सरकार किसी भी धमकी से नहीं डरती है. हम राज्य की अखंडता की रक्षा करेंगे."

बीरेन सिंह ने कहा कि राज्य में किसी भी कीमत पर अलग प्रशासन नहीं हो सकता. उन्होंने 25 जुलाई को मिजोरम में हुई एकजुटता रैली पर अपनी बात रखी. मुख्यमंत्री ने उनके खिलाफ इस्तेमाल हुए अपमानजनक शब्दों की भी कड़ी निंदा की.

'शांति लाने की पूरी कोशिश कर रही है सरकार'

मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने यूरोपीय संघ की संसद के प्रस्ताव की भी निंदा की. इसमें कहा गया था कि हिंदुओं और ईसाइयों के बीच टकराव है. उन्होंने कहा कि ये जमीनी हकीकत की समझ से परे है. उन्होंने कहा कि राज्य में शांति व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य दोनों सरकारों की है. मुख्यमंत्री ने कहा,

"सरकार राज्य में शांति वापस लाने और सामान्य हालात बहाल करने की पूरी कोशिश कर रही है. हिंसा से दूर रहें ताकि हम सभी पहले की तरह फिर से एक साथ रह सकें."

NDA का सहयोगी दल है MNF

मिजोरम में NGOs की समन्वय समिति (NCC) ने  25 जुलाई को मणिपुर के कुकी-जोमी आदिवासी समुदाय के समर्थन में एकजुटता मार्च निकाला था. इसमें राज्य के मुख्यमंत्री जोरमथंगा, उपमुख्यमंत्री तावंलुइया, कई मंत्री और विधायक भी शामिल हुए थे. 

दरअसल, मुख्यमंत्री जोरमथंगा मिजो नेशनल फ्रंट पार्टी(MNF) के अध्यक्ष हैं. और MNF केंद्र में NDA का सहयोगी दल है. मुख्यमंत्री जोरमथंगा ने यहां कहा था कि मणिपुर और केंद्र दोनों सरकारों को राज्य में जातीय हिंसा को शांत करने के लिए मिलकर कोशिश करनी होगी. उन्होंने चेतावनी दी,

"ये घाव बहुत गहरा है. इसे ठीक करना बहुत मुश्किल होगा."

मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरमथंगा पहले भी BJP से अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं. समान नागरिक संहिता(UCC) को लेकर 24 जुलाई को उन्होंने कहा था कि मिजोरम सरकार और MNF केंद्र में NDA की सरकार से नहीं डरते हैं. ना ही वे म्यांमार से आए रिफ्यूजी लोगों को वापस भेजने के पक्ष में हैं. उन्होंने कहा था कि MNF, NDA का सहयोगी दल है. हम उनके साथ हैं लेकिन उनकी नीतियों और उद्देश्य से सहमत नहीं हैं.
 

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