उत्तर प्रदेश और पंजाब में चुनाव हैं. हां जी! जानते हैं कि उत्तराखंड, गोवा औरमणिपुर में भी हैं. लेकिन ये तीन राज्य 'भी ' की श्रेणी में हैं. कहना न होगा कि इनतीनों में सबसे ज़्यादा हाशिए पर मणिपुर है. ये लाइन घिस चुकी है, लेकिन लिखनाज़रूरी है - पूर्वोत्तर से हम तक कोई आवाज़ तब ही पहुंचती है, जब कोई अनहोनी होतीहै.इरोम शर्मिला की पार्टी से कैंडिडेट और मणिपुर की पहली मुस्लिम महिला कैंडिडेटनजीमा बीबी को मैतेई पंगल के मौलवियों की ओर से धमकी मिली है कि उन्हें अपने गांवमें कब्र भी नसीब नहीं होगी. मैतेई पंगल मणिपुर के मैतेई मुसलमानों को कहा जाता है.ये मौलवी नजीमा के चुनाव लड़ने से नाखुश हैं. नजीमा मणिपुर वाबगाई सीट से चुनाव लड़रही है.मणिपुर में मुसलमान अल्पसंख्यक हैं. लेकिन वाबगाई एक मुस्लिम बहुल इलाका है. इसकेअलावा 3 और सीटों पर मुस्लिम वोट निर्णायक हैं. इस हिसाब से 60 सीटों वाली मणिपुरविधानसभा में केवल 4 सीटों पर ही संभावना है कि कोई मुस्लिम जीत पाए.नजीमा बीबी 28 जनवरी को नजीमा, इरोम शर्मिला के साथ मणिपुर की राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला सेमिलीं और मौलवियों की हरकत के बारे में उन्हें बताया. बकौल हिंदुस्तान टाइम्स नजीमाके गांव संथेल ममंग लेइकाई में लोगों को उनसे बात तक करने से टोका जा रहा है. नजीमाका कहना है कि ये सब मौलवियों के इशारे पर हो रहा है जो खासतौर पर इस बात से नाखुशहैं कि वो एक महिला होकर चुनाव लड़ रही हैं.ये पहली बार नहीं है कि नजीमा इस तरह मौलवियों के निशाने पर हैं. नजीमा बीबी काफीलंबे समय से सोशल एक्टिविस्ट हैं. 2001 से वे महिला अधिकारों के लिए काम कर रहीहैं. मणिपुर अलायंस फॉर चाइल्ड राईट्स एंड सस्टेनेबल लाइवलीहुड फोरम, यूनाइटेडमणिपुर मुस्लिम वुमन डेवलपमेंट ऑरगनाज़ेशन और वुमन इन गवर्नेंस (विंग) जैसीसंस्थाओं के साथ जुड़ी रही हैं. ये एनजीओ समाज और सरकार में औरतों की भागीदारीबढ़ाने पर ज़ोर देते हैं. कट्टरपंथ मौलवियों को ये नागवार गुज़रा और उन्हें किसी नकिसी बहाने से नजीमा को रोकने, उन्हें परेशान करने की कोशिश की.इरोम की पार्टीःइरोम शर्मिला.पीपल्स रिसर्जेंस एंड जस्टिस अलायंस ( PRJA) इरोम शर्मिला की पार्टी है. मणिपुर में59 सालों से लागू सश्स्त्र सेना विशेषाधिकार अधिनियम (आफ्स्पा) हटवाने के लिए इरोमने 16 साल तक भूख हड़ताल की. सबसे लंबा अनशन. लेकिन कुछ न होते देख पिछले साल 10अगस्त को उन्होंने अपना अनशन खत्म कर दिया. ऐलान किया कि वो अब अपनी लड़ाई चुनावीराजनीति के ज़रिए आगे ले जाएंगी. फिर अक्टूबर 2016 को उन्होंने PRJA बनाई. नजीमाबीबी PRJA की ट्रेजरर (कोषाध्यक्ष) हैं.कौन हैं मैतेई पंगल?मैतेई पंगल मणिपुरी मुस्लिम हैं और बरसों बरस से मणिपुर में रह रहे हैं. मैतेईसंस्कृति में घुलमिल गए हैं, इसलिए इन्हें मियां मैतेई भी कहते हैं. लेकिन मणिपुरके बहुसंख्यक मैतेई (जो ज़्यादातर हिंदू हैं) और इनके बीच कम बनती है. कई दंगे भीहुए हैं. पूरे पूर्वोत्तर की तरह मणिपुर में भी 'बाहरी' वाला मुद्दा ज्वलंत है.चूंकि 'बाहरी' ज़्यादातर मुस्लिम बहुल बांग्लादेश से आते हैं, इसलिए मुसलमाननिशाने पर रहते हैं और मणिपुर में हाशिये पर हैं. इस समाज में औरतों के हाल वही हैंजो बाकी हिंदुस्तान में हैं. इसपर अलग से कुछ लिखने की ज़रूरत नहीं.तो नजीमा एक बेहद मुश्किल हालात में जी रहे समाज में से भी सबसे निचले दर्जे काप्रतिनिधित्व करती हैं. नजीमा को सिर्फ चुनाव लड़ना ही नहीं होगा. उनको कट्टरपंथ कोभी हराना पड़ेगा. -------------------------------------------------------------------------------- ये भी पढ़ेंः16 साल तक कुछ न खाने वाली इरोम का 'केजरीवाल दांव'जो मणिपुर में हो रहा है, अगर दिल्ली में होता तो ऐसे ही चुप रहते?घर बेचकर अपना इलाज करवा रहा है देश के लिए गोल्ड जीतने वालासरकार के डिपार्टमेंट दे रहे हैं उग्रवादियों को पैसा