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कोर्ट ने कहा, इस बाघ को जेल में बंद कर दो

कहते हैं कि इस शेर ने बहुत लोगों को मारा है, लेकिन कुछ लोगों को इस बात पर बिलकुल भरोसा नहीं है.

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31 मार्च 2016 (अपडेटेड: 30 मार्च 2016, 02:21 AM IST)
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उस्ताद नाम का एक बाघ है. राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में एक नेशनल पार्क है, रणथंभौर नेशनल पार्क. उस्ताद का घर वहीं था पर अब नहीं है. कोर्ट ने उसे वहां रहने देने से मना कर दिया है. उस्ताद का नया ठिकाना उसके पुराने घर से कोसों दूर सज्जनगढ़ जूलॉजिकल पार्क में होगा. ये उदयपुर में है. उस्ताद को एक तरह से जेल भेजा जा रहा है. जहां वो किसी को हर्ट न कर पाए. टी-24, उस्ताद का एक और नाम है. ऊ का है न कि पार्क में बहुते जानवर होते हैं. किसका-किसका नाम याद रखेंगे लोग, एही लिए नंबरिंग कर दी है. कुछ लोगों का कहना है वो आदमखोर हो गया है. कोर्ट ने उस्ताद को आदमखोर मान भी लिया. और फैसला सुना दिया कि उसे चिड़ियाघर में बंद कर दो. बाघ के बारे में चिंता फिकिर करने वाले अजय दुबे और एक वकील इंदिरा जयसिंह ने कोर्ट के फैसले को चैलेंज किया है. तीन जजों की बेंच के सामने इंदिरा ने खूब बहस की. उसने कहा कि उस्ताद के खिलाफ कोई प्रूफ नहीं है कि उसने पिछले पांच साल में चार लोगों की जान ली है. एक आदमखोर बाघ और लोगों द्वारा उकसाने के बाद खौराए बाघ में अंतर होता है. उस्ताद को उसके घर से दूर नहीं करना चाहिए. रणथंभौर उसके लिए बेस्ट जगह है. https://www.youtube.com/watch?v=v4tUVuRkjec इंदिरा ने आगे कहा कि जंगल में इंसानों के शरीर के पास बाघ को देखा गया है पर इसका मतलब ये नहीं कि टी-24 ने ही उन्हें मारा है. इसके जवाब में कोर्ट ने इंदिरा से कहा कि, क्या आपको चश्मदीद चाहिए. बाघ क्या वहां इंसान के शरीर की देखरेख कर रहे थे? आगे कोर्ट ने कहा कि एक्सपर्ट ने टी-24 को आदमखोर बताया है. और अब हम इसमें टांग नहीं अड़ाएंगे. लोगों की सुरक्षा का सवाल है. इंदिरा ने जब देखा कि कोर्ट में उसकी दाल नहीं गलने वाली तो उसने फौरन नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉीरिटी (NTCA) के बनाए कानून की बात छेड़ दी. उसने कहा कि जनवरी 2013 में NTCA ने बाघों से निपटने के लिए एक नियम बनाया था. स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के नाम से. उसके तहत SOP इस तरह के मामलों से निपटेगी. टी-24 के केस में डाक्यूमेंट्स बताते हैं कि स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के मुताबिक कोई कमेटी नहीं बनी थी. साथ ही उस्ताद के खिलाफ प्रूफ जुटाने के लिए भी कोई कोशिश नहीं की गई है. सुरक्षा की कमी के चलते रणथंभौर के बाघ लोगों पर हमला करने के लिए जिम्मेदार हैं. इतनी दलीलें देने के बाद भी कोर्ट ने इंदिरा की एक न सुनी. और उस्ताद को भेज दिया सज्जनगढ जू में बंद हो जाने को.

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