झुट्ठई का जमाना है भाईसाब. आदमी को अपने रोंएं पर भरोसा नहीं है. आधार पर भी नहींहै. लेकिन ट्रू कॉलर पर है. जब ये ऐप नया नया आया था तो लोग इस पर अननोन नंबर केमालिक का नाम बताकर लाल बुझक्कर बन जाते थे. कुछ वक्त पहले तक भरोसनीय था भी. अबनहीं है. रायपुर का एक सब इंजीनियर इस पर बहुत भरोसा कर लिहिस. ठगों ने मिन्टों काकाम सेकंडों में करके उसके अकाउंट से 40 हजार निकाल लिए. दरअसल अब चोट्टे हाईटेक होगए हैं. उनको पता है कि आदमी लपक के ट्रू कॉलर की शरण में जाता है. इसलिए वो डाटाबेस में ही धुप्पल मार के गलत जानकारी डाल रहे हैं.ट्रू कॉलर में सिम का असली मालिक दिखता है, ऐसा माना जाता हैकथा सुनो. रायपुर के जल संसाधन डिपार्टमेंट में सब इंजीनियर शिव प्रकाश मिश्र को एकनंबर से फोन आया. फोन करने वाला खुद को एसबीआई का तोप बताइस. कहा कि मिसरा जी आपकाखाता जो है, वो आधार से लिंक नहीं है. अब मिसरा जी को शक हुआ. ट्रू कॉलर पर चेककिया. वहां भी नंबर एसबीआई का दिखा रहा था. तब मिसरा जी ने अपने अकाउंट की जानकारीठग्गू को दे दी. 40 हजार चिपक गए. मिसरा जी दौड़कर कबीर नगर थाने गए. रपट लिखाई.धोखा है धोखाअनुरूप मुखर्जी नाम के एक साइबर एक्सपर्ट हैं. वो कहते हैं कि लोगों को लगता हैजिसके नाम से सिम होता है, ट्रू कॉलर वही नाम दिखाता है. लेकिन होता ये है कि ट्रूकॉलर जिसके मोबाइल में होता है, उसके सारे कॉन्टैक्ट उसी फोन में दिए नामों से सेवकरता है. वहीं से सर्वर पर डाटा चला जाता है. मतलब ट्रू कॉलर लाई कॉलर है. ये हमनहीं साइबर एक्सपर्ट ने कहा है. हमको ये जानकारी हमारे साथी सुनील नामदेव ने दी.हमने आपको दी. लेना है तो लो नहीं तो फंसोगे तो हमसे न कहिना.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:लड़की ने कत्ल किया, हथियार इस सेल्फी में दिख गया और पकड़ ली गईकोई दो मासूम बच्चों को सेक्स करते देख आनंद कैसे ले सकता है?SBI की चेतावनी: किसी को अपना 'घर का नाम' न बताना, बैंक खाता खाली हो जाएगादस स्वेटर, आठ पैंट पहनीं थीं इसलिए गिरफ्तार हो गया – वीडियो देखें