उत्तर प्रदेश का मेरठ जिला. यहां का लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज ( LLRM).आरोप है कि इस अस्पताल की अनदेखी के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई. व्यक्ति का नामविजय गर्ग था. उनकी उम्र 66 साल थी. वह व्यापारी थे. परिवार वालों का आरोप है किउनमें कोरोना वायरस के लक्षण दिखाई दिए थे. इलाज के लिए वह 21 अप्रैल को अस्पतालभी गए थे, पर उन्हें वहां से दवाई देकर अस्पताल वालों ने घर भेज दिया. उसी के ठीकचार दिन बाद उनकी शनिवार, 26 अप्रैल को उनकी मौत हो गई.वहीं, दूसरा मामला मुंबई का है, जहां कोरोना संक्रमित एक ट्रैफिक कॉन्स्टेबल को एकअस्पताल से दूसरे अस्पताल जाने के लिए एम्बुलेंस नहीं दी गई. जब उन्होंने एक वीडियोबनाकर पूरा मामला बताया, तब जाकर प्रशासन ने उन्हें भर्ती किया और अब इलाज चल रहाहै. दोनों मामले हम विस्तार से बता रहे हैं.# मेरठ में मौतइस मामले की जानकारी के लिए हमने 'इंडिया टुडे' से जुड़े उस्मान चौधरी से बात की.उन्होंने बताया कि विजय गर्ग में कोरोना के लक्षण होने के बावजूद उन्हें एडमिट करनेकी बजाए घर भेज दिया गया था. दूसरे दिन यानी 22 अप्रैल को कुछ डॉक्टर्स की टीम घरपर सैम्पल लेने के लिए आई, उसका रिजल्ट उनकी मौत के बाद 27 अप्रैल को आया. उनकीपत्नी निगेटिव और वो खुद पॉजिटिव पाए गए. फिलहाल सभी को क्वारंटीन कर लिया गया है.वहीं, इस मामले में व्यापारी के भतीजे ने एक वीडियो बनाया. उसमें कहा कि उनकेमौसाजी थे विजय गर्ग. उन्हें पिछले 6-7 दिनों से उन्हें कोरोना के लक्षण दिखाई देरहे थे. जैसे- खांसी, जुकाम, बुखार. और फिर बाद में उन्हें सांस लेने में दिक्कतहोने लगी. भतीजे ने बताया कि विजय को कोरोना के इलाज के लिए दो प्राइवेट अस्पतालभेजा गया था, जहां उन्हें दवाई देकर वापस भेज दिया गया था. अस्पताल में ये कहा गयाकि पहले दवाई, खाओ फिर देखते हैं. तबीयत बिगड़ता देखकर विजय के परिजनों ने CMO कोकॉल किया, तो CMO ने नंबर मांगा और कोई जवाब नहीं दिया. फिर दो घंटे तक कोई जवाबनहीं आया, तो उन लोगों ने DM को फोन किया. तब उन्होंने कार्रवाई की. भतीजा वीडियोमें बताता है-22 अप्रैल रात के 11 बजे मौसाजी के यहां एंबुलेंस पहुंचती है. उन्हें मेडिकल कॉलेजलाया जाता है. वहां उन्हें दवाई दे दी जाती है. लेकिन एडमिट नहीं किया जाता. रातडेढ़ बजे वो पैदल घर पहुंचते हैं, क्योंकि उतनी रात कोई साधन नहीं होता. दूसरे दिनडॉक्टर्स की टीम आती है औऱ सैम्पल लेती है. मौसा-मौसी दोनों का. लेकिन तीन दिन बादभी रिपोर्ट नहीं आई. जब मौसाजी की स्थिति गंभीर हो गई, तब वो अपने साधन से मेडिकलआए. 26 अप्रैल की सुबह. यहां उनको फिर एडमिट नहीं किया गया. कहा गया तुम दवाई खाओ,तुमको कल एडमिट करेंगे. थोड़ी देर बाद ही उन्हें मेडिकल में पैरालाइज अटैक आता हैऔर आनन-फानन में एडमिट करते हैं. उनकी पत्नी को घर भेज देते हैं. अस्पताल से फिरउसी दिन शाम में फोन आता है कि विजय की डेथ हो गई है. लेकिन उस दिन तक बताया नहींकि उन्हें कोरोना है या नहीं.विजय गर्ग का भतीजा, वीडियो बनाकर अस्पताल की लापरवाही बताते हुए.वहीं आरसी गुप्ता, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल का कहना है कि उन्हें किसी और मामलेकी जानकारी नहीं है. उन्हें बस इतना पता है कि जब मरीज आया था अस्पताल, तो उसेपैरालाइज अटैक पड़ा था. उसी दौरान उसे एडमिट किया गया था. प्रॉपर इलाज किया गया.उनका कहना है कि उन्हें डॉक्टर्स ने बताया था कि ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा था, उसीकी वजह से उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ और मौत हुई है. वहीं उन्होंने टेस्ट रिपोर्ट परकहा कि प्रेशर ज्यादा है, फिर भी 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट आ जाती है. साथ ही ऐसानहीं हो सकता कि रिपोर्ट न आई हो, क्योंकि सैम्पल CMO की तरफ से आता है या फिर मरीजएडमिट होता है, तो उसका सैम्पल लिया जाता है.आखिरी में जब उनसे पूछा गया कि रिपोर्ट में आया क्या, तब उन्होंने बताया कि मरीजकोरोना पॉजिटिव था.मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल आरसी गुप्ता.# जब मरीज को एम्बुलेंस ही नहीं मिलीमुंबई के एक ट्रैफिक कॉन्स्टेबल का वीडियो वायरल हुआ. अपना नाम वो रोहन बता रहेहैं. इसमें उन्होंने बताया था कि बुधवार 22 अप्रैल से उन्हें कोरोना के लक्षण नज़रआ रहे थे. उन्हें तेज़ बुखार था. ठंड लग रही थी.ट्रैफिक कान्स्टेबल के वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट.वीडियो में रोहन बता रहे हैं कि उन्हें पुलिस अस्पताल में भर्ती किया गया. इसके बादKEM रेफर कर दिया गया, जहां से फिर उन्हें कस्तूरबा अस्पताल रेफर कर दिया गया.कॉन्स्टेबल ने बताया कि KEM अस्पताल ने उन्हें कस्तूरबा अस्पताल जाने के लिएएम्बुलेंस देने से मना कर दिया. कहा कि एम्बुलेंस सिर्फ गंभीर मरीजों के लिए है.वीडियो में रोहन कहते हैं -किस तरह के सीरियस पेशेंट के बारे में ये बोल रहे हैं? किसका इंतजार कर रहे हैं?KEM से कस्तूरबा अस्पताल कितनी दूरी पर है? मैं पुलिस डिपार्टमेंट में 24x7 नौकरीकरता हूं. बरकत अली के यहां तैनात हूं और लोग मुझे एंबुलेंस नहीं उपलब्ध करा सकतेहैं? प्रशासन को दखल देना चाहिए.इस वीडियो के वायरल होने के बाद उन्हें KEM में भर्ती किया गया. इस मामले ने इतनातूल इसलिए भी पकड़ा, क्योंकि 26 और 27 अप्रैल को दो पुलिस कॉन्स्टेबल की कोरोनासंक्रमण की वजह से मौत हुई थी.--------------------------------------------------------------------------------वीडियो देखें : जिस दवा से कोरोना वायरस के इलाज का दावा किया जा रहा था, वह पहलेही टेस्ट में फेल हो गई!