सूखा राहत पैकट लेने जा रहे चार दिन से भूखे मजदूर की मौत
बांदा का था ये मजदूर. इसकी फैमिली को सीएम अखिलेश यादव ने पांच लाख रुपए की हेल्प का वादा किया है.
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फोटो - thelallantop
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बांदा में तीन मई को एक दलित मजदूर की मौत हो गई. उसकी मौत से बवाल मच गया. बताया जाता है कि उसकी मौत भूख से तड़पकर हुई थी. उसके घर में चार दिन से चूल्हा नहीं जला था. उसके आश्रितों को सीएम अखिलेश यादव की तरफ से पांच लाख रुपए मदद की घोषणा हुई है. जिस पर बांदा के डीएम योगेश कुमार ने मोहर लगा दी है.
नत्थू का घर था नरैनी तहसील के मुंगुस गांव में. अपनी बीवी और 6 बच्चों के साथ रहता था. दो बच्चे महाराष्ट्र में नौकरी कर रहे थे. बाकी पूरा परिवार भी मजदूरी करता था. उसके बावजूद खाने को नहीं मिलता था. इतना नहीं कमा पाते थे.
बीती एक मई को सीएम ने लखनऊ में मजदूरों के साथ खाना खाया. और एक नई योजना का एलान किया. कहा कि मजदूर कड़ी धूप में इतनी मेहनत करता है. उसको 10 रुपए में खाना मिलेगा. और वो खाना उनके काम काज की जगह तक पहुंचाया जाएगा.
नत्थू की बड़ी बेटी ने बताया कि घर में चार दिन से चूल्हा नहीं जला था. और मेहनत बराबर कर रहा था वो. पता चला कि सूखा राहत का पैकेट मिल रहा है. वही लेने जा रहा था. रास्ते में प्यास लगी तो पानी पीने लगा. पानी पीने से पेट में तेज दर्द हुा. रास्ते में गिरा, और वहीं उसकी मौत हो गई.
तीन मई को जब प्रशासन को पता चला कि उसकी मौत भूख से हुई है तो हंगामा हो गया. पहले तो ऑफिसर्स ने इससे इंकार कर दिया. कहा कि उसके पास मनरेगा का कार्ड था, अंत्योदय का राशन कार्ड था. उसकी मौत भूख से हो ही नहीं सकती.
बात ऊपर तक पहुंची तो लेखपाल और पंचायत सचिव सस्पेंड हो गए. डीएम योगेश ने बताया कि हमारे पास सीएम ऑफिस से फोन आया. कि मजदूर की फैमिली को पांच लाख रुपए दिए जाएं. और वो जब चाहें, लखनऊ आएं. सीएम से मिलें. वहीं अपना पैसा भी ले लें.
बीती एक मई को सीएम ने लखनऊ में मजदूरों के साथ खाना खाया. और एक नई योजना का एलान किया. कहा कि मजदूर कड़ी धूप में इतनी मेहनत करता है. उसको 10 रुपए में खाना मिलेगा. और वो खाना उनके काम काज की जगह तक पहुंचाया जाएगा.
नत्थू की बड़ी बेटी ने बताया कि घर में चार दिन से चूल्हा नहीं जला था. और मेहनत बराबर कर रहा था वो. पता चला कि सूखा राहत का पैकेट मिल रहा है. वही लेने जा रहा था. रास्ते में प्यास लगी तो पानी पीने लगा. पानी पीने से पेट में तेज दर्द हुा. रास्ते में गिरा, और वहीं उसकी मौत हो गई.
तीन मई को जब प्रशासन को पता चला कि उसकी मौत भूख से हुई है तो हंगामा हो गया. पहले तो ऑफिसर्स ने इससे इंकार कर दिया. कहा कि उसके पास मनरेगा का कार्ड था, अंत्योदय का राशन कार्ड था. उसकी मौत भूख से हो ही नहीं सकती.
बात ऊपर तक पहुंची तो लेखपाल और पंचायत सचिव सस्पेंड हो गए. डीएम योगेश ने बताया कि हमारे पास सीएम ऑफिस से फोन आया. कि मजदूर की फैमिली को पांच लाख रुपए दिए जाएं. और वो जब चाहें, लखनऊ आएं. सीएम से मिलें. वहीं अपना पैसा भी ले लें.
