भारत में कम उम्र की लड़कियों के शारीरिक शोषण की घटनाओं का प्रतिशत काफी बड़ा है. येअलग बात है कि इनमे से ज़्यादातर केसेस दर्ज नहीं हो पाते. इस बात के पीछे शायद सबसेबड़ी वजह ‘लोग क्या कहेंगे’ वाला हव्वा ही है. अव्वल तो बच्चियां ही मां-बाप के डरसे बता नहीं पाती. और कुछ बताने की हिम्मत भी करती हैं तो उन्हें अभिभावक ही चुपकरा देते हैं.source: Pamir Timesजिस समाज में लड़की के शरीर की प्यूरिटी ('सो कॉल्ड', ऑफ़ कोर्स) ही उसके मूल्यांकनका सबसे बड़ा पैमाना हो वहां ऐसी घटनाएं दबा देने में ही भलाई समझते हैं लोग. बच्चीकी लेबलिंग होने का ख़तरा जो उन्हें नज़र आता है. फिर ख़ानदान की इज्ज़त भी एक मसलाहोता है. कई बार आरोपी घर-ख़ानदान का ही बंदा होता है. और सबसे बड़ा खौफ़ कि ‘इससेशादी कौन करेगा?” तो इन तमाम बेतुकी वजहों से बच्चियों पर हुए वहशियाना अटेम्प्टअन-रजिस्टर्ड ही रह जाते हैं. और इसी से हौसला मिलता है उन लोगों को जो अपनी विकृतमानसिकता की तसल्ली के लिए बेख़ौफ़ होकर शिकार खोजते हैं. वो जानते हैं कि शराफत केनक़ाब में वो सालों-साल छिपे रह सकते हैं. कई बार तो हमेशा के लिए. एक हिला देनेवाले खुलासे में सामने आया है कि एक शख्स ने 500 से ज़्यादा बच्चियों का शारीरिकशोषण किया. 38 साल के सुनील रस्तोगी ने कबूला है कि उसने 13 साल के वक़्फ़े में इसकरतूत को अंजाम दिया. और सिर्फ एक बार पकड़ा गया. बाकी सारे मौकों पर साफ़ बच निकला.बस एक बार 2006 में उत्तराखंड के रुद्रपुर में उसे 6 महीने की जेल हुई थी.रस्तोगी दिल्ली, उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी में अपने शिकार ढूंढता था. वो खासतौर सेस्कूल से घर लौटने वाली लड़कियों को निशाना बनाता था. उसने पूर्वी दिल्ली में कुछवक़्त तक टेलर का काम भी किया. वो अक्सर इस इलाके में काम की तलाश में भटकता रहताथा. दिल्ली पुलिस ने अब तक 6 रजिस्टर्ड केसेस के साथ रस्तोगी का कनेक्शन खोज निकालाहै. इनमे से तीन केस दिल्ली के हैं, दो रुद्रपुर और एक बिलासपुर जिले का है. 2004में रस्तोगी और उसके परिवार को मयूर विहार इलाके से तब निकाला गया था जब उसने पड़ोसकी एक लड़की को हैरेस किया था. रस्तोगी के पकड़ाई में आने का घटनाक्रम उस दिन सेशुरू हुआ जब एक 10 साल की लड़की पर सेक्सुअल असॉल्ट हुआ. जब पुलिस ने खोजबीन शुरू कीतो सामने आया कि न्यू अशोक नगर में भी इसी तरह दो और बच्चियों पर हमले की खबर है.बच्चियों की उम्र 9 और 10 साल थी. रस्तोगी ने उन्हें नए कपड़ों का लालच दिखाया और एकअंडर-कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग की सीढ़ियों के नीचे ले गया. लड़कियों के शोर मचाने पर वोभाग निकला. पूछताछ के दौरान रस्तोगी ने बताया कि वो पिछले 10 सालों से ऐसा कर रहाहै. वो अक्सर वीकेंड पर दिल्ली काम की तलाश में आया करता था. अपने शिकार को तय करलेने के बाद वो कोई न कोई लालच देकर उन्हें तनहा जगह ले जाता था और फिर उनका रेपकरता था. लड़कियों के विरोध करने की सूरत में वो उन्हें छोड़ देता था और शहर छोड़ करभाग जाता था. कई बार उसने अपने शिकारों को ब्लैकमेल भी किया ताकि वो उसके पास लौटकर आ सकें. सब-इंस्पेक्टर संदीप और उनकी टीम को उसे पकड़ने का टास्क सौंपा गया थाजिन्होंने उसे कोंडली गांव के पास से गिरफ्तार किया. ये बेहद हैरानी की बात है कि13 साल से एक शख्स ये सब करता रहा और इक्का-दुक्का मौके को छोड़ तकरीबन हर बार वोबचता रहा. ज़ाहिर सी बात है उसके सैंकड़ों शिकारों की शिकायत कहीं दर्ज नहीं हुई. येएक गंभीर बात है. इतने बड़े पैमाने पर कोई आदमी वहशत का मुज़ाहिरा करें और साफ़ बचारहे ये हमारी क़ानून-व्यवस्था से ज़्यादा हमारे सामाजिक ढांचे की खामी है. अब वक़्त आगया है कि नैतिकता के पैमाने कुछ ढीले कर दिए जाएं ताकि कम से कम इनकी आड़ मेंगुनाहगारों को बच निकलने का रास्ता न मिले.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़िएजब लड़की को 'छेड़ा' जाता है, क्या करते हैं आप?रात भर गैंगरेप किया और सुबह सड़क पर फेंक गएगैंग रेप की शिकार के बयान का वीडियो अदालत में चला, जज भी सन्न