1 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 1 जनवरी 2021, 07:55 AM IST)
मानवाधिकार सेल किसी भी मानवाधिकार उल्लंघन रिपोर्ट की जांच करने के लिए नोडल बिंदु होगा. मानवाधिकार सेल को मंजूरी रक्षा मंत्रालय ने अगस्त 2019 में दी थी. (सांकेतिक फोटो)
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भारतीय सेना ने हाल ही में बने ह्यूमन राइट सेल के प्रमुख के तौर पर मेजर जनरल रैंक के अधिकारी को नियुक्त किया है. मेजर जनरल गौतम चौहान ने गुरुवार, 31 दिसंबर को अतिरिक्त महानिदेशक, मानवाधिकार के रूप में पदभार ग्रहण किया. वह भारतीय सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एस. के. सैनी के नेतृत्व में काम करेंगे.
सेना मुख्यालय में पहले विशेष मानवाधिकार सेल का कार्यभार संभालने से पहले मेजर जनरल चौहान ऑपरेशंस लॉजिस्टिक (मुख्यालय आईडीएस) में कार्यरत थे. वह तीनों सेनाओं के लिए कोविड-19 संबंधित मुद्दों के लिए नोडल अधिकारी भी हैं. गोरखा राइफल्स के इन्फेंट्री अधिकारी, मेजर जनरल चौहान ने उत्तर पूर्व क्षेत्र में भी ब्रिगेड का नेतृत्व किया है. इसके साथ ही उन्होंने सैन्य संचालन निदेशालय में भी काम किया है. इस नियुक्ति को भारतीय सेना की मानवाधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है.
अगस्त 2019 में मिली थी मंजूरी
मानवाधिकार सेल किसी भी मानवाधिकार उल्लंघन रिपोर्ट की जांच करने के लिए नोडल बिंदु होगा. मानवाधिकार सेल को मंजूरी रक्षा मंत्रालय ने अगस्त 2019 में दी थी. सेना मुख्यालय के पुन: संगठन के रूप में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा अनुमोदित सुधारों के तहत अतिरिक्त महानिदेशक, सामान्य मानवाधिकार का पद सृजित किया गया था. रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि नई सेल मानवाधिकार सम्मेलनों और मूल्यों के साथ सेना के अनुपालनों को सुनिश्चित करेगी.
मानवाधिकार प्रकोष्ठ में एक भारतीय पुलिस सेवा का अधिकारी भी होगा, जो अन्य संगठनों और गृह मंत्रालय के साथ मानव अधिकारों के मुद्दों पर आवश्यक समन्वय की सुविधा प्रदान करेगा.
भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी के पद पर आसीन होने के कारण सेना के कुछ वर्गों में नाराजगी थी. इसे किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा अनावश्यक हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है. सेना मुख्यालय ने कहा कि जब विभिन्न मंत्रालयों और नागरिक एजेंसियों, विशेष रूप से पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करने की बात आती है, तो बोर्ड में एक पुलिस अधिकारी का होना महत्वपूर्ण है.
भारतीय सेना अक्सर मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों का सामना करती है. विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के राज्यों में जहां वह सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (अफस्पा) के तहत काम करती है. हालांकि भारतीय सेना ने हमेशा से इस बात को खारिज किया है. सेना ने कहा है कि उसके मानवाधिकार को लेकर रिकॉर्ड अच्छा रहा है, लेकिन ऐसा निकाय पेशेवर तरीके से आरोपों को देखने में मदद करेगा और आंतरिक प्रहरी के रूप में भी कार्य करेगा.