युद्ध प्रेम की तरह होता है. इसे सही ठहराने के लिए आपके पास हजार तर्क होते हैं:ब्रेख्तफेसबुक पर एक जनाब हैं मेजर गौरव आर्य. अपने बारे में लिखते हैं कि 1993 में सेनामें शामिल हुए थे और कश्मीर में कई ऑपरेशन्स में शामिल रहे. इन दिनों दिल्ली में एकमल्टी-नेशनल कंपनी के प्रेसिडेंट हैं. इनका एक ओपन लेटर फेसबुक पर खूब शेयर किया जारहा है, जिसमें ये सैनिकों का हवाला देते हुए युद्ध को जायज बता रहे हैं.हमारी-आपकी बातचीत से पहले इनकी बात पढ़ ली जाए...'सफल सर्जिकल स्ट्राइक के बाद हमारे जवान LOC से लौट आए हैं. कुछ लोगों को छोड़करपूरा देश खुश है. आज मैं JNU के एक पैनल डिस्कशन में शामिल हुआ जो 'इंट्लेक्चुअलटेररिज्म' पर था. इस टर्म का मतलब अपने-आप समझ आ जाता है. मैं यहां एक तरह केइंट्लेक्चुअल टेररिज्म की बात करूंगा. इस आतंकवाद के समर्थक जिंदगी में हर कदम परमिल जाते हैं, लेकिन इस बीमारी की जड़ें कुछ एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स में धंसी हुईहैं.करण जौहर जानना चाहते हैं कि क्या फवाद खान को पाक वापस भेजने से आतंकवाद खत्म होजाएगा. महेश भट्ट भी उनके समर्थन में बोल रहे हैं, 'आतंकवाद रोकिए, बातचीत नहीं.'उनके मुताबिक हमें पाक से बातचीत जारी रखनी चाहिए. क्रिकेट बोर्ड पाकिस्तान के साथमैच खेलना जारी रखेगा. कुछ बिजनस घराने पाक के साथ बिजनस जारी रखेंगे. ये सब तब होरहा है जब हमारे सैनिक सीमा पर जान दे रहे हैं.मेजर गौरव आर्यपाक कलाकारों को वापस भेजने, क्रिकेट और बिजनस रोकने से पाक की तरफ से होने वालाआतंक खत्म हो जाएगा? यकीनन नहीं. लेकिन एकता नाम की भी कोई चीज होती है. आप इस तरहफिल्में नहीं बना सकते और क्रिकेट नहीं खेल सकते जैसे सब कुछ ठीक हो, क्योंकि सबकुछ ठीक नहीं है. ये देखकर एक सैनिक को बड़ा ताज्जुब होता है कि 'इस युद्ध का बोझअकेले मैं ही क्यों झेलूं?' देशभक्ति और त्याग सिर्फ सैनिक की जिम्मेदारी नहीं है.ये देश उतना ही महेश भट्ट का भी है, जितना उस सैनिक का है.18 परिवार एक झटके में तबाह हो गए (उड़ी हमले के शहीद). इस पर बॉलीवुड से कोई कुछनहीं बोला, लेकिन उन्हें फवाद खान के वापस जाने का दुख है. पाक कलाकारों के सपोर्टमें एक ट्वीट जरूरी हो गया है. बॉलीवुड के डायरेक्टर और प्रड्यूसर आपको ये यकीनदिलाएंगे कि राहत फतेह अली खान के आने से पहले हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में म्यूजिकही नहीं था. क्रिकेट बोर्ड पैसे कमाने में इतना बिजी है कि उसे विधवाओं की सिसकियांसुनाई ही नहीं दे रहीं. सिर्फ भारत-पाक के बीच मैच जरूरी है. शांति कोई पंचलाइननहीं है. ये युद्ध का आखिरी परिणाम है.'गौरव आर्य की पूरी फेसबुक पोस्ट यहां देख सकते हैं...--------------------------------------------------------------------------------'शांति कोई पंचलाइन नहीं है. ये युद्ध का आखिरी परिणाम है.' ये लाइन गौरव ने अपनीपोस्ट के आखिर में लिखी है. यकीनन बड़े जोशो-खरोश से लिखी होगी कि ये एक कालजयीवाक्य साबित होगा और इसे पढ़नेवाला मुगदर लेकर सीमा की तरफ दौड़ जाएगा. पर बेहदघटिया है ये वाक्य. उनके हिसाब से शांति युद्ध से ही हासिल होगी. शायद उन्हें शांतिऔर सन्नाटे में फर्क नहीं समझ आ रहा है. तर्क या कॉमन सेंस की बात कहनाइंट्लेक्चुअल टेररिज्म होता जा रहा है.ब्रेख्त ने बड़ी सीधी सी बात कही है. जो युद्ध चाहते हैं, उन्हें समझाया नहीं जासकता. भारत में कई ऐसे लोग हैं जो पाकिस्तान को लेकर ऐसा ही सोच रहे हैं. उनका बसचले तो आज ही पाकिस्तान पर न्यूक्लियर मिसाइल छोड़ दें. तर्क दे रहे हैं कि जबबॉलीवुड पाक कलाकारों को काम देना चाहता है, BCCI पाक के साथ क्रिकेट खेलना चाहताहै और बिजनसमैन अपना धंधा जारी रखना चाहते हैं तो फिर देश का सैनिक ही सीमा परदेशभक्ति का झंडा क्यों लहराता रहे.ये आर्किमिडीज की तरह कोई खोज का मसला नहीं है. इंसानियत की बात है. कभी आपने सीमापर तैनात उस जवान से पूछा है कि क्या वो मरना चाहता है? क्या वो युद्ध चाहता है?नहीं पूछा होगा. क्यों? क्योंकि जरूरत ही नहीं है. उसे तो हमने मरने के लिए ही खड़ाकिया है न सीमा पर. पैसा भी मिलता है उसे उस हाड़ कंपाती ठंड को झेलने का. तो युद्धहो जाने दो. हमारा क्या है. राशन थोड़ा महंगा हो जाएगा. बच्चों के स्कूल कुछ दिनबंद रहेंगे. ये सब होता रहे, लेकिन पाक को सबक सिखाना सबसे जरूरी है.1947 के बाद से भारत पाकिस्तान से चार बार युद्ध कर चुका है. चारों में जीत मिली,लेकिन मसले जस के तस हैं, सियासत जस की तस है. कश्मीर की लड़ाई आज भी उसी मोड़ परहै, जहां 69 साल पहले थी. तो क्या फायदा है अपने सैनिकों को युद्ध की आग में झोंकदेने का. पाकिस्तानी कलाकारों को क्यों वापस भेजना चाहिए? श्रीलंका में लिट्टे था,जिसने हमारे एक प्रधानमंत्री को मार डाला. फिर भी जैक्लीन फर्नांडिस बॉलीवुड मेंकाम कर रही हैं न. हमारी फिल्म इंडस्ट्री ने कभी इस तरह का भेदभाव नहीं किया, तो आजये सेलेक्टिव नीचता क्यों.सलमान खान, महेश भट्ट और करण जौहर जैसे सेलिब्रिटी सॉफ्ट टारगेट हैं. सोशल मीडियापर आसानी से निशाना बना दिए जाते हैं. उग्र 'देशभक्ति' की बलि चढ़ जाते हैं. लेकिनऐसे 'देशभक्तों' को खुद सोचने की जरूरत है कि क्या हम युद्ध झेलने की स्थिति मेंहैं? क्या हमें अधिकार है कि हम अपनी सनक के लिए देश के जवानों को बलि चढ़ा दें?इंसानों से नफरत करने की इतनी आजादी किसने दी हमें?और जो युद्ध चाहते हैं, उनके लिए हमारी तरफ से सप्रेम...https://www.youtube.com/watch?v=4Z4Lq8kBricये भी पढ़ें:'सलमान खान इंडिया के हाफिज सईद हैं. ठीक है मितरों?'हमने पाकिस्तानी तनवीर को सुरक्षित लौटाया, वो चंदू को लौटाएंगे?बधाई हो! सलमान खान ने सेंसिबल बयान दिया हैपाकिस्तानियों को भगाने वालों, सेंधा नमक चाटना भी छोड़ दो!इंडिया में काम करने पर किया था कमेंट, पाक एक्ट्रेस माहिरा ने धो डालाफिर फड़फड़ाए ‘पूर्व सिंगर’ अभिजीत, करण जौहर, महेश भट्ट को कहा दलालभारत-पाकिस्तान पर सबसे अलग हटकर बात आजम खान ने कही है