गांधी की इस मूर्ति को गिरते देखा होगा आपने, अब यहां से खुशखबरी आई है
यहां गांधी की एक मूर्ति पर काफी बवाल हुआ था. कई सारे लोग चाहते थे कि गांधी की मूर्ति हटा दी जाए.
Advertisement

यूनिवर्सिटी ऑफ घाना के छात्रों और प्रफेसर्स के विरोध के बाद वहां लगी गांधी की एक मूर्ति हटा दी गई थी. अब इसे घाना के ही अंदर कहीं और रिलोकेट कर दिया गया है.
Quick AI Highlights
Click here to view more
पश्चिमी अफ्रीका का एक देश है घाना. यहां गांधी की एक मूर्ति पर काफी विवाद हुआ. लोगों ने विरोध किया और मूर्ति हटा दी गई. अब एक अच्छी खबर आई है. गांधी की इस मूर्ति को घाना में देशनिकाला नहीं मिला है. उसे किसी और जगह शिफ्ट कर दिया गया है.
क्या मामला है ये?
जून 2016 में भारत के उस समय के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी घाना के दौरे पर गए. इसी दौरान 13 जून को यहां यूनिवर्सिटी ऑफ घाना में उन्होंने महात्मा गांधी की एक प्रतिमा का अनावरण किया. घाना के लिए गांधी थोड़ा सेंसेटिव मुद्दा हैं. इसका बैकग्राउंड गांधी के शुरुआती दिनों से जुड़ा है. जब वो दक्षिण अफ्रीका में रहकर वकालत की प्रैक्टिस करते थे. इसी हिस्टोरिकल बैकग्राउंड की वजह से घाना के कई सारे लोगों को गांधी से आपत्ति है. यूनिवर्सिटी के भी कई छात्रों और प्रफेसर्स को गांधी की इस मूर्ति से दिक्कत थी. उनका कहना था कि गांधी नस्लभेदी थे. अश्वेतों पर आपत्तिजनक राय रखते थे. इसीलिए गांधी की जगह अफ्रीका के नायकों को तवज्जो दी जानी चाहिए.
कहां लगाई गई है अब ये मूर्ति?
दिसंबर 2018 में यहां के छात्रों और प्रफेसर्स ने गांधी की मूर्ति को हटवाने के लिए प्रदर्शन किया. पीटिशन भी लाए. उनके विरोध का नतीजा भी हुआ. यूनिवर्सिटी से गांधी की मूर्ति हटा दी गई. इसके बाद घाना के विदेश मंत्री का बयान आया. उन्होंने कहा कि गांधी की प्रतिमा को कोफी अन्नान सेंटर ऑफ एक्सिलेंस में लगाया जाएगा. इस बात पर अमल अब पूरा हुआ. मूर्ति रिलोकेट हो गई है. इसकी खबर देते हुए घाना में भारतीय दूतावास ने ट्वीट किया. उनका ट्वीट देखिए-
वीडियो- जदयू में कौन है नंबर 2, प्रशांत किशोर या कोई और?
गांधी की किस बात पर शिकायत है यहां? महात्मा गांधी करीब 21 सालों तक रहे दक्षिण अफ्रीका में. उनके आलोचक उनके ऊपर नस्लभेदी होने का आरोप लगाने में गांधी के उस दौर में लिखी गई कुछ बातों को आधार बनाते हैं. इन विवादित हिस्सों में गांधी ने अश्वेत दक्षिण अफ्रीकियों को 'काफ़िर' का संबोधन दिया. उस दौर के गांधी की शिकायत थी कि साउथ अफ्रीका की सरकार भारतीयों के साथ उसी तरह का बर्ताव करती है, जैसा इन अश्वेतों के साथ करती है. मतलब गांधी को इस बात से आपत्ति थी कि हिंदुस्तानी और अश्वेत एक ही दर्ज़े पर रखे जाएं. इससे मतलब निकलता है कि उस दौर के गांधी भारतीयों को श्रेष्ठ नस्ल का मानते थे. गांधी का पक्ष लेने वाले कई लोगों का कहना है कि गांधी ने आगे चलकर खुद को काफी इवॉल्व किया. उन्हें पूरी तरह उनके शुरुआती दौर की सोच के हिसाब से जज करना गांधी के साथ नाइंसाफ़ी है.Unveiling of Relocated Statue of Mahatma Gandhi at India-Ghana Kofi Annan Centre for Excellence in ICT (AITI-KACE) pic.twitter.com/oiFMh4uBra
— India in Ghana (@HCI_Accra) March 1, 2019
वीडियो- जदयू में कौन है नंबर 2, प्रशांत किशोर या कोई और?

