अमेरिका में गांधी की मूर्ति तोड़े जाने पर खुश होने वाले कौन लोग हैं?
खबर उस दिन सामने आई है जिस दिन गांधी की डेथ एनिवर्सरी है.
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गांधी प्रतिमा की ये तस्वीर ट्विटर पर वायरल है. फोटो- Twitter
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अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक जगह है, डेविस. यहां के एक पार्क में महात्मा गांधी की मूर्ति लगी थी. कुछ लोगों ने इसे तोड़ दिया. अब वहां रहने वाले भारतीय-अमेरिकी इस बात से नाराज हैं. पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना की निंदा की है.
डेविस इलाके के सेंट्रल पार्क में गांधी की 6 फीट ऊंची और करीब 300 किलो वजनी प्रतिमा लगी थी. 27 जनवरी को सुबह पार्क के कर्मचारियों ने इसे गिरा हुआ पाया. इस प्रतिमा का आधा चेहरा टूटा हुआ है. टूटा हुआ हिस्सा गायब है. टखनों के पास से भी इस मूर्ति को तोड़ा गया है. पता नहीं चल पाया है कि इसे किसने और क्यों तोड़ा.
डेविस सिटी की पुलिस ने क्या कहा?
डेविस सिटी काउंसिलमैन लुकास फेरेरिचस ने कहा कि फिलहाल इस मूर्ति तो यहां से हटाकर कहीं और रखा जा रहा है. एक स्थानीय अखबार ने डेविस पुलिस विभाग के डिप्टी चीफ पॉल डोरोशॉव के हवाले से लिखा कि,"ये मूर्ति डेविस में रहने वाले कुछ लोगों के लिए सांस्कृतिक प्रतीक है, लिहाजा हम इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं."
भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि शांति और न्याय के प्रतीक महात्मा गांधी की प्रतिमा के तोड़े जाने की भारत निंदा करता है. भारत ने अमेरिकी अधिकारियों से इस मामले की उच्चस्तरीय जांच करने को कहा है.
ऑल पार्टी मीटिंग के बाद केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि महात्मा गांधी की प्रतिमा को तोड़ा गया है जिसकी पीएम मोदी ने कड़े शब्दों में निंदा की है. उन्होंने कहा कि ये बहुत गलत हुआ है और इसकी निंदा की जानी चाहिए.
https://twitter.com/PBNS_India/status/1355394751713820672
भारत सरकार ने भेंट की थी प्रतिमा
यह मूर्ति भारत सरकार ने डेविस शहर को दी थी. चार साल पहले एंटी गांधी और एंटी भारत संगठनों के विरोध के बाद भी सिटी काउंसिल ने ये मूर्ति सेंट्रल पार्क में स्थापित की थी. ऑर्गेनाइजेशन फॉर माइनॉरिटी इन इंडिया (OFMI) ने इस प्रतिमा का विरोध किया था और प्रदर्शन भी किए थे. हालांकि डेविस में इस प्रतिमा के लिए वोटिंग हुई और लोगों ने कहा कि प्रतिमा लगनी चाहिए. इसके बाद से ही OFMI इस प्रतिमा को यहां से हटाने की मांग करता आया है.
भारतीय अमेरिकियों ने घटना पर गहरा दुख जताया है. फ्रेंड्स ऑफ इंडिया सोसायटी इंटरनेशनल (FISI) से जुड़े गौरांग देसाई ने कहा,
"कई सालों से खालिस्तानी अलगाववादी और OFMI जैसे संगठन भारतविरोधी और हिंदूफोबिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं. ये लोग केवल भारतीय आइकॉन्स के खिलाफ ही नफरत फैलाने वाले अभियान नहीं चला रहे, बल्कि हिंदूफोबिया को फैलाने और कैलिफोर्निया की किताबों से भारत को हटाने की कोशिशें कर रहे हैं."साल 2016 में OFMI ने एक कैंपेन चलाया था. इस अभियान में कैलिफोर्निया में छठी और सातवीं क्लास की किताबों में से भारत शब्द को हटाने की मांग की गई थी. उनका कहना था कि इस शब्द (भारत) की जगह (दक्षिण एशिया) लिखा जाना चाहिए. इस मामले में बड़े स्तर पर छात्रों और अभिभावकों ने प्रदर्शन किया जिसके बाद कैलिफोर्निया डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन ने बदलाव नहीं किए. गांधीकी मूर्ति तोड़े जाने पर खुश होने वाले लोग कौन? गांधी की मूर्ति तोड़ने के मामले में हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) और फेडरेल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन (FBI) से इस घटना की हेट क्राइम के तहत जांच के लिए मांग की है. ट्विट्र पर कैलिफोर्निया के प्रो खालिस्तानी ग्रुप्स ने गांधी प्रतिमा के तोड़े जाने पर खुशी जताई है और फोटो शेयर किए हैं. https://twitter.com/__GRNY__/status/1354665316362506245 अमेरिका में गांधी प्रतिमा तोड़े जाने का ये कोई पहला मामला नहीं है. दिसंबर 2020 में भी खालिस्तानी समर्थकों ने वाशिंगटन में भारतीय दूतावास के सामने स्थापित गांधी प्रतिमा को तोड़ दिया था. घटना 28 जनवरी की है, लेकिन खबर उस दिन सामने आई है जिस दिन गांधी की डेथ एनिवर्सरी है. देश के लोग महात्मा गांधी को याद कर रहे हैं. उन्हें नमन कर रहे हैं.

