क्यों मनरेगा मजदूरों को तीन महीने से नहीं मिली मजदूरी? अब योजना ही ख़तरे में
PM मोदी ने योजना को 'राष्ट्रीय गर्व' से जोड़ा था

मनरेगा. Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act. इस योजना का आने वाला कल मुश्किलों से घिरता नजर आ रहा है. दरअसल, इसके लिए तय बजट का तक़रीबन 96 प्रतिशत हिस्सा ख़र्च हो चुका है, जबकि इस वित्तीय साल में अभी दो महीने और बचे हुए हैं. ज़्यादातर राज्यों ने केंद्र सरकार से पैसा न मिलने की वजह से हाथ खड़े कर लिए हैं. मजदूरों की पिछली देनदारी बची हुई है. अब दिहाड़ी नहीं मिल रही, तो मजदूर काम पर नहीं आ रहे.
The Hindu में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़, मनरेगा के तहत राजस्थान 620 करोड़ के निगेटिव बैलेंस में है. माने कि इतनी देनदारी मजदूरों की बची हुई है. राजस्थान अकेला राज्य नहीं है, जो दो महीने पहले ही निगेटिव बैलेंस में जा चुका है. उत्तर प्रदेश समेत कई राज्य हैं, जिनके खाते में अब मनरेगा चलाने के लिए पैसा नहीं है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल ही में केंद्र सरकार से तत्काल फंड भेजने के लिए चिट्ठी लिखी थी.
# पहले से ही कम था बजट
रिपोर्ट के मुताबिक, कई अर्थशास्त्री ये कह चुके हैं कि ग्रामीण उपभोक्ताओं के पास मजदूरी के तौर पर मनरेगा का पैसा पहुंचना ज़रूरी है. इससे अर्थव्यवस्था को फ़ायदा पहुंचेगा. लेकिन इस बार मनरेगा का बजट था 60 हज़ार करोड़, जो कि पिछले वित्त वर्ष से भी कम था. जानकार बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में नवंबर से फरवरी तक सबसे ज़्यादा काम होता है मनरेगा के तहत. लेकिन राज्य सरकारों के पास बजट नहीं है, इसलिए ज़्यादातर राज्यों में योजना ठप पड़ी हुई है.
राजस्थान ने पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर 1950 करोड़ रुपए तत्काल मांगे हैं. इनमें से 848 करोड़ रुपए मजदूरों की मजदूरी और बाक़ी पैसा सामान के लिए मांगा गया है. राजस्थान में 11 अक्टूबर, 2019 के बाद से ही मजदूरों को पैसा नहीं दिया गया है, जबकि इस योजना का असल मकसद ही रोज़ के रोज़ मजदूरी देना था.
आंकड़े ये भी बता रहे हैं कि इस साल मजदूरों की संख्या में भी भारी उछाल आया है. मनरेगा योजना पहले 23 करोड़ व्यक्ति प्रतिदिन के हिसाब से चल रही थी, लेकिन अब इसके तहत हर दिन 30 करोड़ लोग काम करने के लिए आ रहे हैं.
# गाजा-बाजा और पीएम मोदी
2015 का बजट सत्र था. सम्बोधित कर रहे थे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. लोकसभा में मोदी ने मनरेगा को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, ‘मेरी राजनीतिक सूझ-बूझ कहती है कि मनरेगा कभी बंद मत करो, क्योंकि मनरेगा आपकी विफलताओं का जीता-जागता स्मारक है और मैं गाजे- बाजे के साथ इस स्मारक का ढोल पीटता रहूंगा.’
इसके एक साल बाद ही, 2016 में मनरेगा योजना के 10 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री मोदी ने इसे 'राष्ट्रीय गर्व का विषय' बताया था.
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