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  • Maharashtra: Row over renaming Aurangabad as Sambhajinagar, Congress opposed Shiv Sena proposal, NCP silence

औरंगाबाद का नाम बदलने के शिवसेना के प्रस्ताव का कांग्रेस विरोध क्यों कर रही है?

शिवसेना नाम बदलकर संभाजीनगर करना चाहती है.

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उद्धव ठाकरे ने कहा इन दिनों बस एक बात ही हो रही है ड्रग्स ड्रग्स और ड्रग्स.
उद्धव ठाकरे लगातार एनसीबी पर हमला बोल रहे हैं. (फाइल फोटो)
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डेविड
3 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 3 जनवरी 2021, 07:21 AM IST)
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महाराष्ट्र. यहां नगर निगम के चुनाव होने हैं. उससे पहले शिवसेना, औरंगाबाद का नाम बदलने की अपनी तीन दशक पुरानी मांग को पूरा करना चाहती है. लेकिन गठबंधन में शामिल कांग्रेस इसका विरोध कर रही है. पार्टी ने शिवसेना के औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजीनगर करने के प्रस्ताव का विरोध किया है. कांग्रेस का कहना है कि चुनाव में भावनात्मक मुद्दों के बजाय विकास और जनहित के मुद्दों को तरजीह देनी चाहिए. वहीं शनिवार दो जनवरी को मराठा कार्यकर्ता कांग्रेस के खिलाफ सड़क पर उतरे. औरंगाबाद में मराठा क्रांति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष और राज्य के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट का पुतला जलाया, जिन्होंने नाम बदलने का विरोध किया था. इससे एक दिन पहले यानी शुक्रवार, एक जनवरी को बालासाहेब थोराट ने साफ कर दिया था कि उनकी पार्टी कांग्रेस प्रस्ताव का विरोध कर रही है. उन्होंने कहा था,
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कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता एवं राज्य में मंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि शहर का नाम बदलना महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार की प्राथमिकता नहीं थी. चव्हाण ने कहा,
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दो जनवरी को एक और कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने इस मुद्दे पर कहा,
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शिवसेना का क्या कहना है?

शिवसेना ने शनिवार को अपने मुखपत्र 'सामना' में कहा कि कांग्रेस ने औरंगाबाद का नाम बदलने के प्रस्ताव का विरोध किया, जिससे भाजपा खुश हो गई. संपादकीय में कहा गया है,
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दूसरी ओर महाराष्ट्र में बीजेपी के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल का कहना है कि यदि औरंगज़ेब रोड एपीजे अब्दुल कलाम रोड हो सकता है, इलाहाबाद प्रयागराज हो सकता है, फ़ैज़ाबाद अयोध्या हो सकता है तो औरंगाबाद संभाजीनगर क्यों नहीं हो सकता?' छत्रपति संभाजी छत्रपति शिवाजी के पुत्र थे, जो मुगल सम्राट औरंगजेब की हिरासत में मारे गए थे. जून 1995 में, औरंगाबाद नगर निगम (एएमसी), जो कि तीन दशकों से अधिक समय से शिवसेना के अधीन है, ने राज्य सरकार को शहर के नाम में बदलाव की सिफारिश करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था. इस दौरान कई सरकारें आईं और गईं लेकिन इस मुद्दे का निर्णायक अंत करने में असफल रहीं. दिलचस्प बात यह है कि देवेंद्र फड़नवीस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने भी नाम नहीं बदला.

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