महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पीएम मोदी को फोन कर मदद मांगी है.कोरोना वायरस या लॉकडाउन को लेकर नहीं बल्कि संकट में पड़ी अपनी कुर्सी बचाने केलिए. इंडिया टुडे के सोर्सेज के मुताबिक उद्धव ठाकरे ने पीएम मोदी से कहा है किसंकट के इस समय में किसी भी तरह की राजनैतिक अस्थिरता प्रदेश के लिए सही नहीं होगी.इससे लोगों के बीच गलत मैसेज भी जाएगा. इसलिए इस परिस्थिति से बचना चाहिए. सोर्सेजके मुताबिक प्रधानमंत्री ने उद्धव को भरोसा दिलाया है कि वे जल्द ही इस मसले कोदेखेंगे.Maharashtra CM Uddhav Thackeray called PM about his nomination. He asked forhelp, saying if it doesn’t happen he will have to resign. PM said he will lookat the matter and get more details: Sources tell ANI (File pics)pic.twitter.com/GPUgx62CG8— ANI (@ANI) April 29, 2020क्या है मसला? दरअसल इस फोन कॉल के एक दिन पहले ही यानी 27 अप्रैल को महाराष्ट्रकैबिनेट ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के पास एक प्रस्ताव भेजा था. कि उद्धव ठाकरेको महाराष्ट्र विधान परिषद में नॉमिनेट किया जाए. लेकिन राज्यपाल की तरफ से अभी तककोई फैसला नहीं लिया गया है. संवैधानिक संकट बढ़ता देख उद्धव ने पीएम मोदी को फोनकर मदद मांगी है. उद्धव ठाकरे राज्य के मुख्यमंत्री हैं. लेकिन किसी भी सदन केसदस्य नहीं हैं. न तो विधानसभा, न ही विधान परिषद.संविधान का अनुच्छेद 164 (4) कहता है कि किसी भी सदन का सदस्य हुए बिना व्यक्ति 6महीने से ज़्यादा राज्य में किसी भी मंत्री पद पर नहीं रह सकता. उद्धव ने 28नवंबर,-2019 को सीएम पद की शपथ ली थी. 28 मई को छह महीने पूरे हो रहे हैं. तब तककिसी सदन के सदस्य नहीं बने, तो मुख्यमंत्री पद जा सकता है.उद्धव ठाकरे नवंबर-2019 में महाराष्ट्र के सीएम बने थे. अब छह महीने होने को हैं औरवो अब तक किसी सदन के सदस्य नहीं बन सके हैं. (फोटो- Mandar Deodhar for IndiaToday)उद्धव की क्या प्लानिंग थी?उद्धव ने विधानसभा चुनाव तो लड़ा ही नहीं था. लेकिन अब महाराष्ट्र के विधान परिषदके नौ सदस्यों का कार्यकाल 24 अप्रैल को खत्म हो रहा है. इन्हीं में से एक सीट परउद्धव ने चुनाव लड़ने की सोच रखी थी. लेकिन उनके लिए दिक्कत तब हो गई, जब कोरोनावायरस के चलते चुनाव अनिश्चितकाल तक के लिए टल गए. इसी के साथ उद्धव का विधान परिषदसदस्य बनना भी अनिश्चितकाल के लिए टल गया. आगे क्या विकल्प हैं?संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप बताते हैं – “उद्धव ठाकरे के पास दो विकल्प हैं.1- राज्यपाल कोटे से उनके नाम की सिफारिश कर दी जाए और वो विधान परिषद के सदस्य बनजाएं.2- 28 मई को छह महीने पूरे होते ही उद्धव इस्तीफा दे दें. एक-दो दिन के भीतर हीराज्यपाल की सहमति से दोबारा मुख्यमंत्री चुन लिए जाएं. इस तरह उन्हें फिर छह महीनेका वक्त मिल जाएगा.” सुभाष कश्यप साफ कर देते हैं कि इन दोनों में से कोई भी तरीकानैतिकता के लिहाज से सही नहीं है. फिर भी कम अनैतिक तरीका पहला वाला ही है.और एक बात. इन दोनों विकल्पों में एक बात डिसाइडिंग फैक्टर रहेगी कि राज्यपाल क्याचाहते हैं? उनका स्व-विवेक क्या कहता है? अब राज्यपाल की तरफ से कोई जवाब न मिलतादेख उद्धव ने पीएम से मदद मांगी है. पीएम की तरफ से कितनी मदद मिलती है, ये तो आनेवाला वक्त ही बताएगा.--------------------------------------------------------------------------------नीतीश कुमार ने PM मोदी के साथ हुई मीटिंग में कोटा में फंसे छात्रों के बारे मेंक्या कहा?