The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Madrasa Education System NCPCR Criticized in Supreme Court Urge Changes

'मदरसों में इस्लाम की सुप्रीमसी को प्रमोट किया जा रहा... ' NCPCR ने किताबें देख बड़े सवाल उठा दिए

NCPCR ने Supreme Court से कहा है कि Madrasa में बच्चों को एक सख्त धार्मिक पाठ्यक्रम को अपनाने के लिए मजबूर किया जाता है. इसके कारण वो मुख्यधारा के एजुकेशन सिस्टम तक नहीं पहुंच पाते. और क्या-क्या कहा है?

Advertisement
pic
12 सितंबर 2024 (पब्लिश्ड: 10:46 AM IST)
Madrasa
NCPCR ने मदरसों में पढ़ाए जाने वाली किताबों पर भी सवाल उठाए हैं. (सांकेतिक तस्वीर: इंडिया टुडे)
Quick AI Highlights
Click here to view more

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में ‘मदरसा एजुकेशन सिस्टम' की आलोचना की है. उन्होंने कहा है कि मदरसों में पढ़ाने के तरीके से बच्चों के ‘शिक्षा के मौलिक अधिकारों’ का उल्लंघन होता है. NCPCR का मानना है कि इन संस्थानों में संवैधानिक आदेशों के साथ-साथ ‘राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट' 2009 का भी पालन नहीं हो रहा है.

"Madrasa में सख्त धार्मिक पाठ्यक्रम"

भारत सरकार ने मार्च 2007 में NCPCR की स्थापना की थी. इसका उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, NCPCR ने कहा कि मदरसों में बच्चों को एक सख्त धार्मिक पाठ्यक्रम को अपनाने के लिए मजबूर किया जाता है. इसके कारण वो मुख्यधारा के एजुकेशन सिस्टम तक नहीं पहुंच पाते.

ये भी पढ़ें: बिहार- मदरसा में हुए ब्लास्ट में दो लोग घायल, पुलिस के पहुंचने से पहले सबूत मिटाने की कोशिश!

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ सामान्य शिक्षा को भी जोड़ा जाए. उन्होंने आगे कहा कि इन संस्थानों में फॉर्मल एजुकेशन की कमी की वजह से बच्चों का पूरी तरह से विकास नहीं हो पाता. उन्हें जरूरी स्किल्स और ज्ञान की जानकारी नहीं मिल पाती. 

मदरसे की किताबों पर भी सवाल उठे

NCPCR ने मदरसों में पढ़ाए जाने वाली कुछ किताबों के कई हिस्सों पर भी चिंता जताई है. खासकर उन हिस्सों पर जिसमें ‘इस्लाम की सुप्रीमसी’ को प्रमोट किया गया है. उन्होंने कहा है कि बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मदरसों में कई गैर-मुस्लिम बच्चे भी पढ़ते हैं. 

क्या है पूरा मामला?

ये मामला मार्च 2024 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के दिए एक आदेश से जुड़ा है. कोर्ट ने ‘उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2004’ को असंवैधानिक और धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन करने वाला बताया था. मदरसा संचालकों, प्रबंधन समितियों और शिक्षक संघों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं. और इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले को चुनौती दी थी. NCPCR ने इन्हीं याचिकाओं के जवाब में ये दलीलें दी हैं.

Supreme Court ने Madrasa पर क्या है?

सुप्रीम कोर्ट ने 5 अप्रैल को हाई कोर्ट के इस फैसले पर रोक लगा दी थी. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने इस बात पर जोर दिया था कि ये मामला मदरसा एक्ट से नहीं जुड़ा है. बल्कि मामला ये सुनिश्चित करने से जुड़ा है कि छात्रों को वहां उचित शिक्षा मिले. 

उत्तर प्रदेश सरकार ने दावा किया कि राज्य की ओर से मदरसों को सलाना करीब 1,098 करोड़ रुपये की मदद दी जाती है. ये मदद मदरसों को जारी रहेगी या नहीं? कोर्ट ने इस पर कोई निर्देश नहीं दिया था.

वीडियो: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने UP के मदरसा एजुकेशन एक्ट को असंवैधानिक क्यों ठहराया?

Advertisement

Advertisement

()