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कोर्ट ने माना नामांकन फॉर्म पर जयललिता से बेहोशी की हालत में लगवाया था अंगूठा, रद्द की विधायकी

मद्रास हाई कोर्ट ने विधायक एके बोस का निर्वाचन रद्द कर दिया है.

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23 मार्च 2019 (अपडेटेड: 23 मार्च 2019, 07:25 AM IST)
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मद्रास हाईकोर्ट ने AIADMK के विधायक एके बोस का निर्वाचन रद्द कर दिया है. हालांकि बोस अब इस दुनिया में नहीं हैं. 2 अगस्त 2018 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था. इसके बाद थिरुपरंकुन्द्रम विधानसभा सीट खाली है. हाईकोर्ट ने बोस के निर्वाचन को इसलिए रद्द कर दिया क्योंकि उन्होंने अपने निर्वाचन फॉर्म में पार्टी सुप्रीमो जयललिता के अंगूठे का निशान उस समय लगवाया था जब वह अस्पताल में बेहोशी की हालत में थीं. बोस के निर्वाचन को उनके विरोधी उम्मीदवार डीएमके के नेता डॉ. श्रवणन ने चुनौती दी थी.
क्या था मामला तमिलनाडु के थिरुपरंकुन्द्रम विधानसभा सीट पर 2016 में उपचुनाव हुए थे. AIADMK के एके बोस ने चुनाव जीता था. बोस की जीत को डीएमके के नेता डॉ श्रवणन ने चुनौती दी. उनका आरोप था कि बोस के नामांकन पत्र में तत्‍कालीन AIADMK सुप्रीमो जयललिता के अंगूठे का निशान बेहोशी की हालत में लगवाया गया था. श्रवणन का आरोप था कि चुनाव के समय जयललिता हॉस्पिटल में बेहोशी की हालत में भर्ती थीं. ऐसे में वह कोई फैसला नहीं ले सकती थीं. इसलिए एके बोस के निर्वाचन को रद्द किया जाए.
एके बोस (फाइल फोटो)
एके बोस (फाइल फोटो)

कोर्ट ने क्या कहा मद्रास हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि नामांकन पत्र के फॉर्म ए और बी पर अंगूठे का निशान लगाने की अनुमति आमतौर पर मान्य नहीं है.नामांकन पत्र पर पार्टी के आधिकारिक नेता का हस्ताक्षर होना चाहिए. वहीं बचाव पक्ष सबूत पेश करने में असफल रहा कि अस्पताल में भर्ती जयललिता ने होशोहवास में नामांकन फॉर्म पर अंगूठा लगाया था. हालांकि कोर्ट ने डीएमके के नेता श्रवणन की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने इस सीट से खुद को विजयी घोषित करने की मांग की थी. उनकी दलील थी कि नामांकन फॉर्म की छटनी सही होती और एके बोस का पर्चा खारिज हो जाता तो वह जीत जाते. कोर्ट ने उनकी दलील को खारिज कर दिया.
तमिलनाडु में 18 अप्रैल को लोकसभा चुनाव के साथ ही 18 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं. हालांकि चुनाव आयोग ने थिरुपरंकुन्द्रम विधानसभा सीट पर उपचुनाव नहीं कराने का फैसला किया था क्योंकि मामला कोर्ट में था. अब फैसला आने के बाद चुनाव आयोग इस सीट पर भी उपचुनाव का ऐलान कर सकता है. मुख्य विपक्षी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने 18 अप्रैल को होने वाले लोकसभा चुनाव के साथ ही सभी 21 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराने की मांग की है. जिन तीन सीटों पर उपचुनाव नहीं हो रहे हैं उनमें थिरुपरंकुन्द्रम सीट भी शामिल है.


 
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