अस्पताल से निकले शव वाहन से कोरोना मरीज़ की बॉडी सड़क पर गिर गई
मामला मध्य प्रदेश के विदिशा का है.

कोरोना के विकराल रूप की कई तस्वीरें लगातार सामने आ रही हैं. तस्वीरें ऐसी, जिसे देखकर रूह कांप जाती है. बोलती बंद हो जाती है. ऐसी की एक तस्वीर मध्य प्रदेश के विदिशा ज़िले से भी सामने आई है. जो प्रशासन की बड़ी लापरवाही और जर्जर हो चुके हालात को बयां कर रही है. शुक्रवार यानी 24 अप्रैल के दिन यहां एक शव वाहन अस्पताल से कोरोना मरीज़ों के शव को लेकर मुक्तिधाम जा रहा था. रास्ते में वाहन के अंदर मौजूद एक कोरोना मरीज़ का शव सड़क पर गिर गया. 'इंडिया टुडे' से जुड़े विवेक ठाकुर की रिपोर्ट के मुताबिक, विदिशा के अटल बिहारी वाजपेई मेडिकल कॉलेज से ये शव वाहन बाहर निकला था. मोड़ पर स्पीड तेज़ थी, और इस वाहन की हालत जर्जर थी. जैसे ही इसने टर्न लिया, वाहन का गेट खुला और मरीज़ का सफेद प्लास्टिक में लिपटा शव धड़ाम से सड़क पर गिर गया.
जो खुला हुआ दरवाज़ा लाल घेरे में देख रहे हैं, यहीं से शव निकला था. (फोटो- विवेक ठाकुर)
अस्पताल के बाहर मौजूद लोगों ने जब ये देखा तो जमकर हंगामा किया. उस वक्त जो भी लोग वहां मौजूद थे, उनमें से ज्यादातर लोगों के रिश्तेदारों का अस्पताल के अंदर इलाज चल रहा था. यानी वो कोरोना पेशेंट्स के परिवार वाले थे. लोगों ने शव सड़क पर पड़ा देखकर कहा कि प्रशासन बहुत बुरे तरीके से कोरोना के मामलों को हैंडल कर रहा है. बहुत ज्यादा लापरवाही बरती जा रही है. उनके रिश्तेदार अंदर भर्ती हैं, लेकिन दो-दो दिनों तक कोई सूचना ही नहीं मिल रही. ये भी आरोप लगाया कि पूछने पर कोई जानकारी तो मिलती नहीं है, और फिर जब मिलती है, तो कहते हैं कि वो मर चुका है, इससे अच्छा तो सबको ज़हर देकर ही मार डालो. हालांकि हमें ये नहीं पता कि वाहन के अंदर कितने मरीज़ों के शव मौजूद थे, लेकिन इस घटना ने प्रशासन पर सवाल ज़रूर खड़े किए हैं. खैर जनता के हंगामे के बाद कर्मचारियों ने शव को दोबारा वाहन में डाला और आगे लेकर गए.
जनता की शिकायत क्या और प्रशासन की सफाई क्या?
विदिशा अस्पताल के बाहर कई लोगों की भीड़ जमा है. सबके परिवार के सदस्य अंदर भर्ती हैं और वो स्टेटस जानने के इंतज़ार में वहां खड़े हुए हैं. एक मरीज़ के परिवार के एक मेंबर का कहना है,
"रात ढाई बजे हमारे परिवार के सदस्य की अस्पताल में मौत हो गई. हम सुबह से यहां खड़े हैं. हम उनका शव चाहते हैं. हमसे कहा गया कि सारे दस्तावेज़ जमा कराए जाएं, हमने सब किया. लेकिन पांच-छह घंटों से हम यहां धूप में खड़े हैं, कोई कुछ नहीं बता रहा कि कब शव मिलेगा."
अस्पताल के बाहर खड़े एक व्यक्ति ने कहा-
"मरीज़ के साथ जो उसका परिवार का साथी अंदर मौजूद है, उसकी भी हालत खराब है. हम यहां से पानी पहुंचा रहे हैं, उसे वो मिल नहीं रहा है. कोई व्यवस्था नहीं है. ऑक्सीजन भी पांच-पांच छह-छह हज़ार रुपए में खरीद कर हम ला रहे हैं. बड़ी मुश्किल से."
अस्पताल के सामने मरीज़ों के परिवार वाले. (फोटो- विवेक ठाकुर)
कुछ मरीज़ों का कहना है कि उनके परिवार वाले कोरोना के मरीज़ नहीं थे, लेकिन उनकी मौत के बाद भी अस्पताल प्रशासन शव नहीं दे रहा है. विदिशा के इस अस्पताल का दौरा SDM जीएस वर्मा ने भी शुक्रवार को किया. उनका कहना है कि अस्पताल के डॉक्टर्स सारे इलाज में व्यस्त हैं, ऐसे में जब मरीज़ के परिवार वाले कॉल करते हैं, तो वो उठा नहीं पाते. उन्होंने आगे कहा-
"हम मानते हैं कि परिवार वाले अपने मरीज़ के हाल जानना चाहते हैं, लेकिन हम उन्हें अंदर नहीं भेज सकते. और इलाज में बिज़ी होने के चलते डॉक्टर्स कैसे फोन पर बात कर पाएंगे. वो अपना काम कर रहे हैं, प्रशासनिक काम वो कैसे करेंगे."
SDM से जब ये पूछा गया कि मरीज़ों का शव परिवार को मिलने में देरी क्यों हो रही है, तो उन्होंने कहा कि कई सारी औपचारिकताएं पूरी करनी होती है और उसमें समय लग ही जाता है.
SDM जीएस वर्मा. (फोटो- विवेक ठाकुर)
विदिशा में कोरोना से कितनी मौत?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, विदिशा में रोज़ाना करीब 20 से 25 कोरोना मरीज़ दम तोड़ रहे हैं. 22 अप्रैल को 20 लोगों की मौत हुई. लोगों का आरोप है कि मौतों के आंकड़े छिपाने की कोशिश की जा रही है. सूत्रों से शुक्रवार दोपहर तक ये जानकारी सामने आई थी कि ऑक्सीजन की कमी के चलते 40 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन 14 की ही पुष्टी हो पाई थी.

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