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नीम-हकीम, झोलाछाप डॉक्टरों को डिप्लोमा देकर 'आत्मनिर्भर' बनाएगी शिवराज सरकार

एमपी की यूनिवर्सिटी ने इश्तिहार भी निकाल दिया है

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मध्य प्रदेश के अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय ने नीम हकीम और छोलाछाप डॉक्टरों को डिप्लोमा देकर आत्मनिर्भर बनाने का इश्तिहार निकाला है.
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अमित
17 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 17 दिसंबर 2020, 02:20 PM IST)
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जिन नीम हकीमों और झोलाछाप डॉक्टरों को खतरा-ए-जान कहा जाता है, उन्हें इलाज करने का सर्टिफिकेट देने की तैयारी है. यह काम भोपाल की अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी यूनिवर्सिटी कराएगी. इस कोर्स का नाम 'प्राथमिक चिकित्सा विशेषज्ञ डिप्लोमा कोर्स' रखा गया है. अखबार में छपे यूनिवर्सिटी के विज्ञापन में पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम शिवराज चौहान भी नजर आ रहे हैं. विज्ञापन में 'झोलाछाप डॉक्टर' को पीएम मोदी के रोजगार एवं स्वरोजगार के सपने से जोड़ा गया है. इस डिप्लोमा की फीस 24 हजार रुपए रखी गई है.
क्या कहता है यूनिवर्सिटी का इश्तिहार
झोलाछाप डॉक्टरों को खास डिप्लोमा कराने के लिए यूनिवर्सिटी के इश्तिहार का मजमून भी देख लीजिए. इश्तिहार में लिखा है
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अभ्यर्थी का बैकग्राउंड नहीं देखते- वीसी आजतक संवाददाता रवीश पाल सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय के वीसी रामदेव भारद्वाज से बात करके कोर्स के बारे में जाना. वीसी ने बताया कि
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यूनिवर्सिटी के वीसी ने कहा है कि हमें स्टूडेंट्स के बैकग्राउंड से कोई मतलब नहीं है. मन लगाकर पढ़े और डिप्लोमा ले.

‌कांग्रेस ने जताया विरोध कांग्रेस की पिछली कमलनाथ सरकार में रोजगार के नाम पर गाय हांकने और बैंड बाजा बजाने की ट्रेनिंग के कोर्स आए थे. इसे लेकर शिवराज सिंह चौहान सहित बीजेपी के तमाम नेताओं ने जमकर मजाक उड़ाया था. अब शिवराज के सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार के अधीन आने वाले अटल बिहारी हिंदी विश्वविद्यालय के कोर्स पर कांग्रेस तंज कस रही है. कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने कहा
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क्यों बना था अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय दरअसल हिंदी के प्रचार प्रसार और हिंदी माध्यम में हर विषय में शिक्षा के लिहाज से इस विश्वविद्यालय को बनाया गया था. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर मध्य प्रदेश की इस एकमात्र हिंदी यूनिवर्सिटी की स्थापना साल 2011 में की गई थी. लेकिन यूनिवर्सिटी हिंदी के क्षेत्र में वो काम नहीं कर पाई, जिसके लिए इसे बनाया गया था.

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