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मध्य प्रदेश के रतलाम में सांप्रदायिक टकराव रोकने वाले एसपी का ट्रांसफर, बीजेपी नेताओं ने की थी कार्रवाई की मांग

Madhya Pradesh के रतलाम जिले में तैनात SP राहुल कुमार लोढ़ा का ट्रांसफर हो गया है. 7 सितंबर को गणेश पंडाल पर कथित पथराव के चलते Communal tension की स्थिति बन गई थी. इस दौरान स्थानीय बीजेपी नेताओं ने उन पर पक्षपात करने का आरोप लगाया था. और उनके ट्रांसफर की मांग की थी.

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12 सितंबर 2024 (पब्लिश्ड: 09:14 AM IST)
SP Rahul Kumar Lodha madhya pradesh ganesh chaturthi
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के एसपी राहुल कुमार लोढ़ा का ट्रांसफर कर दिया गया है. (एक्स ग्रैब)
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मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रतलाम जिले के SP राहुल कुमार लोढ़ा का ट्रांसफर कर दिया गया है. यह कार्रवाई रतलाम में गणेश चतुर्थी उत्सव पंडाल पर पथराव के आरोपों के कुछ दिन बाद की गई है. बीजेपी ने राहुल कुमार लोढ़ा पर सांप्रदायिक तनाव (Madhya Pradesh ratlam communal tension) के दौरान पक्षपात करने का आरोप लगाया था. और उन पर कार्रवाई की मांग की थी. गृह विभाग ने एक सर्कुलर जारी कर लोढ़ा का रतलाम एसपी के पद से भोपाल ट्रांसफर कर दिया है. जहां वे रेलवे विभाग के प्रभारी होंगे. उनकी जगह नरसिंहपुर के पूर्व SP अमित कुमार रतलाम जिले का कार्यभार संभालेंगे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक जब राहुल कुमार लोढ़ा से उनके ट्रांसफर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि वो इसे एक रेगुलर ट्रांसफर की तरह से देख रहे हैं. रतलाम में दक्षिणपंथी संगठन लोढ़ा के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे. और इसके लिए उन्होंने जिला कलेक्टर को पत्र भी लिखा था. रतलाम जिला भाजपा उपाध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय ने बताया,  

हमने SP के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था क्योंकि उन्होंने हिंदू संगठन के नेताओं के खिलाफ सही तरीके से जांच नहीं की थी. हमारा मुख्य मुद्दा ये था कि  SP लोढ़ा ने दावा किया था कि हिंदू संगठनों ने पत्थरबाजी की. और यही रतलाम में सांप्रदायिक तनाव और दंगे जैसी स्थिति का सबसे बड़ा कारण था.

7 सितंबर को मध्य प्रदेश के रतलाम में गणेश की मूर्ति ले जा रहे जुलूस पर पत्थरबाजी की अफवाह के बाद सांप्रदायिक तनाव के हालात बन गए. जुलूस पर पत्थराव की अफवाह से गुस्साई भीड़ ने पत्थरबाजी शुरू कर दी. जिसके बाद सांप्रदायिक तनाव को रोकने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस ने भारी सुरक्षा बल तैनात किया था.

इस घटना के बाद 7 सितंबर की रात को ही करीब 500 लोगों की भीड़ ने पुलिस थाने का घेराव किया. और गणपति जुलूस पर कथित तौर पर पत्थर फेंकने वाले अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. जब पुलिस की टीम मामले की जांच शुरू की तो फिर से किसी ने पत्थर फेंका. जिसके बाद पथराव शुरू हो गया. जिसमें पुलिस की गाड़ी का शीशा टूट गया. पुलिस को मौके पर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा.

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पंडाल पर पत्थर फेंके जाने की अफवाहों के बारे में एसपी राहुल कुमार लोढ़ा ने बताया था कि इस घटना में कोई मूर्ति नहीं तोड़ी गई है. हम पथराव में लोगों के घायल होने के आरोपों की जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं. लोगों को किसी भी सोशल मीडिया पोस्ट को देखकर प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए.

वहीं बीजेपी नेता प्रदीप उपाध्याय ने दावा किया, 

 पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज नहीं की. जिसके बाद लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बिगड़ गई. हमें लाठीचार्ज से कोई दिक्कत नहीं थी. लेकिन बाद में रात में पुलिस ने हिंदू संगठन के नेताओं को उठा लिया. और पुलिस हिरासत में उनके साथ बेरहमी से मारपीट की.

हालांकि सीनियर पुलिस अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया है. एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि 13 नामजद लोगों और करीब 500 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. और उनमें से कुछ लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है.

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