देश में करीब 1.5 लाख लोगों को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए किडनी की जरूरत है. बतायाजाता है कि जरूरतमंद 90 % से ज्यादा लोग तो डोनर के इंतजार में जान गंवा देते हैं.यही हाल लिवर ट्रांसप्लांट का है. हर साल 25000 लोगों को लिवर की जरूरत होती है,मगर 800 लोगों को ही लिवर मिल पाता है. बाकि की किस्मत में मौत होती है. इसका बड़ाकारण लोगों में जागरूकता की कमी है. बात वही है कि लोग खून तो मुश्किल से देते हैं,तो ऑर्गेन डोनेशन तो बहुत बड़ी बात हो गई. मगर भोपाल का एक परिवार इस मामले मेंमिसाल बन के सामने आया है. उनकी सिर्फ एक हां से तीन लोगों को नई जिंदगी मिल सकेगी.भोपाल के परिवार ने पिता के ब्रेन डेड होने के बाद डोनेशन का फैसला कर मिसाल पेश कीहै.मामला भोपाल के कटारा हिल्स का है. यहां रहने वाले प्रॉपर्टी डीलर विष्णु कुमार को10 अक्टूबर को ब्रेन हैमरेज हुआ. उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां 11 अक्टूबर कोउन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया. इसके बाद भोपाल ऑर्गेन डोनेशन सोसाइटी(BODS)केकॉउंसलर विष्णु के परिवार के पास पहुंचे. पत्नी रेखा, बेटी श्रद्धा और बेटो दक्क्षको समझाया कि उनका एक फैसला तीन लोगों की जिंदगी बचा सकता है. परिवार तैयार हो गया.इसमें 23 साल की श्रद्धा ने सबसे ज्यादा हिम्मत दिखाई और मां-भाई को डोनेशन के लिएतैयार किया. परिवार की मंजूरी के बाद विष्णु की बॉडी को ऑर्गेन हार्वेस्ट के लिए लेजाया गया. हम सबको भोपाल के इस परिवार के जज्बे से सीख लेनी चाहिए.परिवार के बाकी लोगों का विरोध झेलाविष्णु की मौत की खबर सुनके परिवार के करीब 150 लोग अस्पताल पहुंचे. सभी ने श्रद्धाके फैसले का विरोध किया और नाराजगी जताई. मगर श्रद्धा और उनकी मां ने यहां भी हारनहीं मानी और परिवार के लोगों को समझाया कि उनके इस फैसले से तीन जिंदगियां बचजाएंगी.देश में हर साल ऑर्गेन डोनेशन की कमी के कारण हजारों लोग मरते हैं.बातें सब करते हैं पर देता कोई नहींश्रद्धा ने डीबी पोस्ट से बातचीत में बताया कि वो अपने परिवार के तमाम लोगों केमुंह से ऑर्गेन डोनेशन की बात सुन चुकी थी. मगर जब उन्होंने ये फैसला किया तो सबनेविरोध किया. उनका कहना था कि लोग बात तो खूब करते हैं, पर कोई डोनेशन के लिए आगेनहीं आता है. श्रद्धा अब BODS की अंबैसडर हैं. 12 अक्टूबर को श्रद्धा, उनकी मां औरभाई ने उस परिवार से भी मुलाकात की, जिनको उनके पिता के ऑर्गेन से नई जिंदगी मिलनेवाली है.--------------------------------------------------------------------------------लल्लनटॉप बुलेटिन देखिए:ये भी पढ़ें: इतना भयंकर तूफान आया कि समंदर गायब हो गया!जाना था जापान, गलती से पहुंचे अमेरिका, बोले- भारत है!महान नहीं था अशोक, इतिहास का सबसे बड़ा झूठ बेपर्दा हुआतूफान पीछे छोड़ गया है उस जीव को जिसे दुनिया पहचान नहीं पा रहीसमुद्र को सागर क्यों कहते हैं?समुद्रों के बनने की कहानी का ‘घोड़ा कनेक्शन’